वाईएसआरसीपी सांसद अविनाश रेड्डी ने पेट्रोलियम सचिव को लिखा पत्र, आंध्र प्रदेश में ईंधन संकट पर मांगी जाँच
सारांश
Key Takeaways
- वाईएसआरसीपी सांसद अविनाश रेड्डी ने 28 अप्रैल को पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की।
- आंध्र प्रदेश के 4,510 पेट्रोल पंपों में से करीब 70 प्रतिशत बंद या गंभीर कमी से जूझ रहे हैं।
- कार चालकों को 10-15 लीटर डीजल और दोपहिया वाहन चालकों को केवल ₹200 तक का पेट्रोल दिया जा रहा है।
- पड़ोसी राज्यों — तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र — में इस तरह की कोई कमी नहीं।
- सांसद ने राज्य सरकार पर जमाखोरों से मिलीभगत और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर जानबूझकर आपूर्ति घटाने के आरोप लगाए।
- कृषि, एक्वाकल्चर, परिवहन और छोटे व्यवसायों पर गंभीर आर्थिक असर की आशंका।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सांसद वाई.एस. अविनाश रेड्डी ने आंध्र प्रदेश में डीजल और एलपीजी की गंभीर कमी का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। 28 अप्रैल को लिखे गए इस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के 4,510 पेट्रोल पंपों में से करीब 70 प्रतिशत बंद हैं या गंभीर ईंधन संकट से जूझ रहे हैं।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
सांसद अविनाश रेड्डी ने पत्र में बताया कि राज्य के अनेक पेट्रोल पंपों पर 'नो स्टॉक' के बोर्ड लगे हुए हैं और ईंधन की राशनिंग की जा रही है। उनके अनुसार, कार चालकों को 10 से 15 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है, जबकि दोपहिया वाहन चालकों को मात्र ₹200 तक का पेट्रोल मिल पा रहा है। इसके अलावा, कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी की बात कही गई है।
केंद्र के दावों पर सवाल
पत्र में सांसद ने उल्लेख किया कि केंद्रीय मंत्रालय की ओर से दावा किया जा रहा है कि देशभर में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के आउटलेट्स पर कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, और एलपीजी, पीएनजी व सीएनजी की आपूर्ति 100 प्रतिशत क्षमता पर जारी है। अविनाश रेड्डी ने सवाल उठाया कि यदि स्थिति सामान्य है, तो केवल आंध्र प्रदेश में ही माँग और आपूर्ति के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों दिखाई दे रहा है, जबकि पड़ोसी राज्यों — तमिलनाडु, कर्नाटक और महाराष्ट्र — में इस तरह की कोई कमी नहीं है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
अविनाश रेड्डी ने कहा कि इस संकट का सीधा असर कृषि, एक्वाकल्चर, सड़क परिवहन और छोटे व्यवसायों पर पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब रबी फसल की कटाई और मत्स्य पालन का मौसम चल रहा है, जिससे किसानों और मछुआरों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। गौरतलब है कि डीजल की कमी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए विशेष रूप से नुकसानदेह होती है।
कृत्रिम संकट और कालाबाज़ारी के आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि यह संकट कथित तौर पर कृत्रिम रूप से पैदा किया गया प्रतीत होता है। उन्होंने राज्य सरकार पर जमाखोरों के साथ मिलीभगत के आरोप लगाए और कहा कि कुछ ऑयल मार्केटिंग कंपनियाँ जानबूझकर आपूर्ति कम कर रही हैं। इसके साथ ही ईंधन और एलपीजी की कालाबाज़ारी की भी आशंका जताई गई है। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
माँगें और आगे की राह
अविनाश रेड्डी ने केंद्र सरकार से पूरे मामले की जाँच कराने, ईंधन आपूर्ति को सुचारू करने, जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई करने और एलपीजी कीमतों में राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने की माँग की है। अब देखना यह होगा कि पेट्रोलियम मंत्रालय इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या आंध्र प्रदेश में ईंधन संकट की केंद्रीय स्तर पर जाँच होती है।