जगन मोहन रेड्डी का आरोप: चंद्रबाबू राज में आंध्र प्रदेश में भ्रष्टाचार और अराजकता चरम पर
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 16 जुलाई को अमरावती में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में राज्य का शासन-तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है। उन्होंने युवजन श्रमिक रैतु कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के सांसदों को निर्देश दिया कि वे 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में राज्य की जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को दोनों सदनों में पूरी ताकत से उठाएं।
मानसून सत्र में क्या उठाएंगे वाईएसआरसीपी सांसद
जगन मोहन रेड्डी ने पार्टी सांसदों की बैठक में स्पष्ट किया कि संसद में भ्रष्टाचार, अवैध मामले, किसानों की परेशानी, कर्मचारियों की समस्याएं, बढ़ता कर्ज और घोटालों के मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के लोगों का हित पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक के प्रति वाईएसआरसीपी के पूर्व समर्थन को भी दोहराया।
डीएससी 2025 भर्ती घोटाले के आरोप
जगन ने डीएससी 2025 को एक बड़े भर्ती घोटाले के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार, उम्मीदवारों की प्रतियोगी परीक्षा आयोजित होने से पहले ही नियुक्तियां कर दी गईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रश्न पत्र लीक हुए और खेल कोटे की नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका दावा है कि सरकारी आदेश केवल चहेते लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जारी किए गए और उद्देश्य पूरा होते ही रद्द कर दिए गए।
खेल संघों और जमीन आवंटन पर गंभीर आरोप
जगन मोहन रेड्डी ने आरोप लगाया कि खेल प्रमाण-पत्र जारी करने वाले संघ सत्ताधारी दल के नेताओं के नियंत्रण में हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि सॉफ्टबॉल एसोसिएशन के प्रमुख तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के विधायक कुना रवि कुमार हैं, जबकि जूडो एसोसिएशन के मानद अध्यक्ष विशाखापत्तनम के सांसद और मंत्री लोकेश के बहनोई भरत हैं।
जमीन आवंटन पर उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग ₹5,000 करोड़ की सरकारी भूमि मंत्री लोकेश के बहनोई को अत्यंत कम कीमत पर सौंपी गई। उन्होंने यह भी कहा कि अमरावती निर्माण कार्य में ₹20,000 रुपए प्रति वर्ग फुट से अधिक की लागत लगाई जा रही है, जो देश में अभूतपूर्व है।
किसानों और लोकतांत्रिक अधिकारों पर चिंता
जगन ने कहा कि जो किसान 'पूलिंग' के तहत अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं, उन्हें परेशान किया जा रहा है और उनकी भूमि जबरदस्ती छीनी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले से अधिग्रहित हजारों एकड़ भूमि का विकास नहीं हुआ, तो और जमीन क्यों ली जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की विफलताओं को उजागर करने वाले या सत्तारूढ़ दल से सवाल पूछने वाले लोगों को झूठे मुकदमों और मनमानी गिरफ्तारियों से दबाया जा रहा है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति के नाम पर भी दमन हो रहा है। वाईएसआरसीपी सांसदों से उन्होंने आग्रह किया कि वे संसद में लोकतांत्रिक अधिकारों पर हो रहे इन हमलों का मुद्दा उठाएं।
आगे क्या होगा
20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने के साथ ही वाईएसआरसीपी सांसदों द्वारा इन मुद्दों को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में उठाए जाने की संभावना है। यह देखना होगा कि केंद्र सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं।