पोलैंड के जारोस्लाव मठ में चाकू हमला: पादरी की मौत, चार घायल; यूक्रेनी संदिग्ध गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पूर्वी पोलैंड के जारोस्लाव शहर स्थित बेनेडिक्टिन सिस्टर्स मठ में गुरुवार, 24 सितंबर 2026 की सुबह प्रार्थना सभा के दौरान एक 31 वर्षीय यूक्रेनी नागरिक ने मैचेट (बड़ा चाकू) से पाँच लोगों पर हमला किया, जिसमें एक पादरी की अस्पताल में मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए। पोडकारपैकी पुलिस ने संदिग्ध को मौके से हिरासत में ले लिया है और हमले के कारणों की जाँच जारी है।
हमले का विवरण
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संदिग्ध सुबह 9:30 बजे IST के आसपास मठ परिसर में घुसा, जब वहाँ सामूहिक प्रार्थना (मास) चल रही थी। उसने चार पुरुषों और एक महिला पर ताबड़तोड़ वार किए, जिनमें तीन पादरी भी शामिल थे। सभी पाँचों को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ तीन पुरुषों की हालत गंभीर बताई गई।
जारोस्लाव पुलिस ने पोलिश समाचार चैनल टीवीएन24 को बताया कि हमले में गंभीर रूप से घायल एक पादरी ने बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया। पोलिश रेडियो स्टेशन रेडियो ईएसकेए की रिपोर्ट के अनुसार, हमलावर मठ में मैचेट लेकर घुसा था।
पुलिस की प्रतिक्रिया और गिरफ्तारी
पोडकारपैकी पुलिस बल के एक प्रवक्ता ने बताया, 'जारोस्लाव के पुलिस अधिकारियों ने एक 31 वर्षीय यूक्रेनी नागरिक को हिरासत में लिया है, जिसने चार पुरुषों और एक महिला को चाकू मारा था। सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया — जिनमें से तीन पुरुषों को गंभीर चोटें आईं। अधिकारी घटना के सही क्रम और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए मौके पर काम कर रहे हैं।' हमले के उद्देश्य और पृष्ठभूमि की जाँच अभी जारी है।
शहर प्रशासन का कदम
जारोस्लाव के मेयर मार्सिन नाजारेविच ने बताया कि शहर ने क्राइसिस मैनेजमेंट प्रक्रिया सक्रिय कर दी है। उन्होंने कहा कि आसपास के स्कूलों को सुरक्षित करने के उपाय किए जा रहे हैं और मठ के कर्मचारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
मठ का ऐतिहासिक महत्व
जारोस्लाव स्थित बेनेडिक्टिन सिस्टर्स मठ की स्थापना 1611 में हुई थी। इसके परिसर में सेंट निकोलस और सेंट स्टैनिस्लॉस बिशप का चर्च है, जो 1614 से 1624 के बीच निर्मित हुआ था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसे क्षति पहुँची थी, जिसके बाद इसका पुनर्निर्माण किया गया।
आगे क्या
पुलिस हमले के संभावित कारणों — मनोवैज्ञानिक, सांप्रदायिक या अन्य — की जाँच कर रही है। यह घटना ऐसे समय में आई है जब यूरोप में धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो रही है। जाँच के परिणाम सामने आने के बाद अधिकारियों के अगले कदम स्पष्ट होंगे।