स्वात के कबाल पुलिस स्टेशन में आत्मघाती हमला: 7 की मौत, 18 घायल; TTP से जुड़े संगठन पर शक
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले के कबाल पुलिस स्टेशन में रविवार, 2 अगस्त को एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोट किया, जिसमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और 18 अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हमले के समय पुलिस स्टेशन के निकट कबाल चौक में सैकड़ों लोग एक सार्वजनिक प्रदर्शन में शामिल थे।
मुख्य घटनाक्रम
स्वात के जिला पुलिस अधिकारी (DPO) उमर गंडापुर ने बताया, 'शुरुआती जानकारी के मुताबिक सात लोगों की मौत हुई है और 18 लोग घायल हुए हैं। हमारी पुलिस पूरी तरह सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और सबूत जुटाने के लिए जाँच जारी है।'
मलाकंद के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) सैयद फिदा हुसैन ने बताया कि पुलिस स्टेशन के आसपास पुलिस लाइंस और कई अन्य संवेदनशील सरकारी इमारतें स्थित हैं। उन्होंने कहा, 'शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार धमाके में चार पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि दो आम नागरिक भी जख्मी हुए हैं।'
हमले के पीछे कौन
खैबर पख्तूनख्वा के इंस्पेक्टर जनरल (IG) जुल्फिकार हमीद ने कहा कि इस हमले के पीछे फिटना अल खवारिज का हाथ है — यह नाम पाकिस्तान सरकार द्वारा प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े आतंकवादियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
हमीद ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने हमले का तत्काल जवाब दिया और अतिरिक्त बल मौके पर भेजे गए। पुलिस और हथियारबंद हमलावरों के बीच हुई गोलीबारी में एक डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) समेत नौ पुलिसकर्मी मारे गए, जबकि 28 अन्य घायल हो गए।
राहत और बचाव अभियान
घायलों को तत्काल नज़दीकी सईदू शरीफ टीचिंग अस्पताल पहुँचाया गया। सुरक्षा बलों ने इलाके को सील कर तलाशी अभियान शुरू किया। स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
पिछले हमलों से संबंध
गौरतलब है कि इसी सप्ताह की शुरुआत में खैबर पख्तूनख्वा के हंगू जिले में खजाना बांदा चेकपोस्ट पर हुए हमले में कम से कम नौ पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी और 28 अन्य घायल हो गए थे। यह ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान में — विशेष रूप से बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे सीमावर्ती प्रांतों में — सुरक्षाकर्मियों पर हमलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
आगे क्या
जाँच एजेंसियाँ विस्फोटकों की प्रकृति और हमलावर की पहचान स्थापित करने में जुटी हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि TTP से जुड़े गुट स्वात घाटी में अपनी सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जो एक दशक पहले सैन्य अभियानों के बाद अपेक्षाकृत शांत हो गई थी।