केरल आयुर्वेद अस्पतालों में फर्नीचर खरीद घोटाले की जांच, विजयन सरकार के कार्यकाल पर उठे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को पूर्ववर्ती पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल के दौरान सरकारी आयुर्वेद अस्पतालों में कथित फर्नीचर खरीद अनियमितताओं की व्यापक जांच के आदेश दिए। यह जांच राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में खरीद और वित्तीय निर्णयों की श्रृंखलाबद्ध पड़ताल का नवीनतम अध्याय है, जो पिछले कई महीनों से जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री मुरलीधरन ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव की उस सिफारिश को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि वित्त विभाग की जांच ही पर्याप्त होगी। उन्होंने इसके बजाय अधिक विस्तृत और स्वतंत्र जांच का निर्देश दिया। यह जांच मुख्य रूप से पीआर साजी पर केंद्रित होगी, जो पूर्व में नेशनल आयुष मिशन में राज्य कार्यक्रम प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे।
आरोपों का विवरण
जांच के दायरे में आई सूचनाओं के अनुसार, कन्नूर जिले के पिनाराई स्थित सरकारी आयुर्वेद अस्पताल में भवन निर्माण पूर्ण होने से पहले ही ₹11.45 लाख मूल्य का फर्नीचर कथित तौर पर खरीद लिया गया था। गौरतलब है कि भवन तैयार न होने के बावजूद भारी खरीद को प्रक्रियागत उल्लंघन माना जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, मट्टन्नूर, चालाकुडी और वेंगानूर के सरकारी आयुर्वेद अस्पतालों में भी फर्नीचर खरीद में निर्धारित नियमों के व्यापक उल्लंघन के आरोप सामने आए हैं। इन सभी मामलों में खरीद प्रक्रिया और वित्तीय औचित्य पर सवाल उठाए गए हैं।
जांचों की व्यापक पृष्ठभूमि
यह ताज़ा जांच एकाकी घटना नहीं है। इससे पहले जुलाई 2026 में स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले 10 वर्षों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा खरीदे गए प्रमुख चिकित्सा उपकरणों की विभागीय जांच के आदेश दिए थे। यह कदम उन रिपोर्टों के बाद उठाया गया था जिनमें मोबाइल मोर्चरी सहित कई महंगे उपकरण सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में बिना उपयोग के धूल फाँकते पाए गए थे। उस जांच में योजना निधि, प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) तथा कोविड-19 महामारी के दौरान केंद्र से प्राप्त उपकरण भी शामिल किए गए थे।
अगस्त 2026 में मंत्री ने केरल मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (KMSCL) द्वारा ब्लीचिंग पाउडर खरीद में कथित ₹7.32 करोड़ के अनावश्यक खर्च के मामले को सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) को सौंप दिया था, यह मानते हुए कि विभागीय जांच अपर्याप्त थी। इसके अलावा, राज्य की आयुर्वेदिक दवा कंपनी औषधि में कथित वित्तीय अनियमितताओं, निर्माण ठेकों और खरीद विसंगतियों की सतर्कता जांच की भी माँग की गई है।
सरकार की स्थिति और जवाबदेही
वर्तमान केरल सरकार की इन लगातार जांचों से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक खर्च और खरीद प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष राज्य में प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाता रहा है।
आगे की राह
इन जांचों के निष्कर्ष यह निर्धारित करेंगे कि कहीं प्रक्रियागत चूक या वित्तीय अनियमितताएँ हुईं अथवा नहीं, और यदि हुईं तो किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। वर्तमान में जांच का दायरा चिकित्सा उपकरणों, दवाओं और सरकारी एजेंसियों के माध्यम से की गई अन्य खरीद तक भी विस्तृत है।