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केरल बजट पर कांग्रेस नेता वी.एम. सुधीरन का विद्रोह: कम अल्कोहल टैक्स प्रस्ताव वापस लेने की माँग

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केरल बजट पर कांग्रेस नेता वी.एम. सुधीरन का विद्रोह: कम अल्कोहल टैक्स प्रस्ताव वापस लेने की माँग

सारांश

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.एम. सुधीरन ने अपनी ही यूडीएफ सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है — कम अल्कोहल पेय पर टैक्स प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से नकारते हुए। यह केरल में शराब नीति पर दशकों पुरानी लड़ाई का नया अध्याय है, और सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर दरार का ताज़ा संकेत।

मुख्य बातें

सुधीरन ने 25 जून को केरल बजट में कम अल्कोहल पेय पदार्थों पर प्रस्तावित कर की सार्वजनिक आलोचना की।
उन्होंने माँग की कि वित्त विधेयक विधानसभा में पेश होने से पहले यह प्रावधान वापस लिया जाए ।
सुधीरन ने दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री को पहले ही आपत्तियाँ जता दी थीं।
2016 में यूडीएफ के सत्ता से बाहर होने तक केरल में तीन दर्जन से कम बार थे; एलडीएफ कार्यकाल में यह संख्या लगभग 900 हो गई।
सुधीरन ने खनिज रेत खनन नीति पर भी अस्पष्टता का आरोप लगाते हुए स्पष्ट घोषणा की माँग की।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.एम. सुधीरन ने केरल की वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार को एक बार फिर असहज स्थिति में डाल दिया है। उन्होंने राज्य बजट में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर प्रस्तावित कर ढाँचे की खुलकर आलोचना करते हुए माँग की है कि वित्त विधेयक विधानसभा में पेश होने से पहले इस प्रावधान को वापस लिया जाए। 25 जून को की गई इस सार्वजनिक टिप्पणी ने सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर आंतरिक असहमति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

सुधीरन का राजनीतिक कद और पुरानी पहचान

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष, पूर्व लोकसभा सांसद, विधानसभा अध्यक्ष और मंत्री रह चुके सुधीरन की राजनीतिक पहचान दशकों से दो मुद्दों पर टिकी है — शराब के प्रसार का विरोध और खनिज रेत खनन के खिलाफ अभियान। इन्हीं दो मुद्दों पर उन्होंने अब अपनी ही पार्टी की सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

सुधीरन ने गुरुवार को कहा कि बजट में यह प्रस्ताव शामिल करने से पहले कांग्रेस और यूडीएफ के भीतर विधिवत चर्चा होनी चाहिए थी। उनके अनुसार, यदि उचित परामर्श के बाद नीतिगत निर्णय लिया जाता, तो मौजूदा विवाद से बचा जा सकता था।

मुख्यमंत्री को पहले ही दी थी चेतावनी

सुधीरन ने दावा किया कि उन्होंने अपनी आपत्तियाँ मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री को पहले ही लिखित रूप में जता दी थीं, लेकिन जनता के मन में इस प्रस्ताव को लेकर जो शंकाएँ हैं, उनका अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा, 'सरकार को ऐसे फैसले नहीं लेने चाहिए, जिनसे उसकी विश्वसनीयता प्रभावित हो। मामलों को पारदर्शी ढंग से संभाला जाना चाहिए और अनावश्यक विवाद पैदा किए बिना जनता के सामने स्पष्ट रूप से रखा जाना चाहिए।'

शराब नीति पर ऐतिहासिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब केरल में शराब कारोबार का परिदृश्य पिछले एक दशक में नाटकीय रूप से बदल चुका है। 2016 में यूडीएफ सरकार के सत्ता से बाहर होने तक राज्य में तीन दर्जन से भी कम बार संचालित हो रहे थे। इसके विपरीत, पिनराई विजयन के नेतृत्व में लगातार दो एलडीएफ सरकारों के कार्यकाल में बारों की संख्या बढ़कर लगभग 900 तक पहुँच गई।

गौरतलब है कि 2011 से 2016 के बीच ओमन चांडी सरकार के दौरान शराब नीति को लेकर कांग्रेस के भीतर तीखी खींचतान हुई थी, जिसमें सुधीरन की केंद्रीय भूमिका रही थी और उसी दौर में राज्यभर में सैकड़ों बार बंद किए गए थे।

खनन नीति पर भी उठाए सवाल

सुधीरन की आलोचना केवल शराब तक सीमित नहीं रही। उन्होंने सरकार की खनिज रेत खनन नीति पर भी अस्पष्टता का आरोप लगाया और माँग की कि सरकार स्पष्ट रूप से घोषणा करे कि खनन गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी। साथ ही, उन्होंने यूडीएफ नेतृत्व को याद दिलाया कि तत्कालीन विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने पिछली एलडीएफ सरकार की आलोचना करते समय जो रुख अपनाया था, उसके प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखना ज़रूरी है।

यूडीएफ सरकार के लिए आगे की चुनौती

पार्टी के एक वरिष्ठ और सिद्धांतवादी नेता द्वारा नीतिगत फैसलों पर इस तरह की सार्वजनिक असहमति यूडीएफ सरकार के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा करती है। आलोचकों का कहना है कि यदि सत्तारूढ़ गठबंधन अपने ही नेताओं की आपत्तियों का समय रहते समाधान नहीं करता, तो विधानसभा में वित्त विधेयक पर बहस और जटिल हो सकती है। वित्त विधेयक पर विधानसभा में होने वाली चर्चा यह तय करेगी कि क्या सरकार इस प्रस्ताव को वापस लेती है या फिर अपने सहयोगियों को मनाने में सफल होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि केरल कांग्रेस की उस पुरानी आंतरिक दरार का नया अध्याय है जो शराब नीति पर दशकों से बनी हुई है। विडंबना यह है कि जिन मुद्दों पर सतीशन ने विपक्ष में रहते हुए एलडीएफ को घेरा था, सत्ता में आने के बाद उन्हीं पर उनके अपने वरिष्ठ नेता सवाल उठा रहे हैं। यूडीएफ के लिए असली परीक्षा यह है कि क्या वह 'विपक्षी वादों' और 'सत्ता की व्यावहारिकता' के बीच की खाई को पाट सकती है — या फिर 2011-16 की तरह शराब नीति एक बार फिर उसकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर भारी पड़ेगी।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वी.एम. सुधीरन ने केरल बजट के किस प्रस्ताव का विरोध किया है?
सुधीरन ने राज्य बजट में कम अल्कोहल वाले पेय पदार्थों पर प्रस्तावित कर ढाँचे का विरोध किया है और माँग की है कि वित्त विधेयक विधानसभा में पेश होने से पहले इस प्रावधान को वापस लिया जाए। उनका कहना है कि इस पर पार्टी और गठबंधन के भीतर पहले चर्चा होनी चाहिए थी।
सुधीरन का शराब नीति पर विरोध नया नहीं है — इसकी पृष्ठभूमि क्या है?
2011 से 2016 के बीच ओमन चांडी सरकार के दौरान भी सुधीरन शराब नीति को लेकर कांग्रेस के भीतर मुखर विरोध में थे, जिसके चलते राज्यभर में सैकड़ों बार बंद किए गए थे। यह उनकी दशकों पुरानी राजनीतिक पहचान का हिस्सा है।
केरल में बारों की संख्या अभी कितनी है और यह पहले कितनी थी?
2016 में यूडीएफ के सत्ता से बाहर होने तक केरल में तीन दर्जन से भी कम बार संचालित हो रहे थे। पिनराई विजयन के नेतृत्व में लगातार दो एलडीएफ सरकारों के कार्यकाल में यह संख्या बढ़कर लगभग 900 तक पहुँच गई।
सुधीरन ने खनन नीति पर क्या कहा?
सुधीरन ने आरोप लगाया कि खनिज रेत खनन नीति को लेकर अभी भी अस्पष्टता बनी हुई है और सरकार को स्पष्ट रूप से घोषणा करनी चाहिए कि खनन गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यूडीएफ सरकार के लिए इस विवाद के क्या राजनीतिक निहितार्थ हैं?
पार्टी के एक वरिष्ठ और सिद्धांतवादी नेता द्वारा सार्वजनिक असहमति से यूडीएफ सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं, खासकर तब जब विधानसभा में वित्त विधेयक पर बहस होनी है। सुधीरन ने यह भी याद दिलाया कि सतीशन ने विपक्ष में रहते हुए जो रुख अपनाया था, सत्ता में उसके प्रति प्रतिबद्धता ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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