क्या केरल के पूर्व मंत्री एंटनी राजू मादक पदार्थ जब्ती मामले में दोषी करार दिए गए?
सारांश
Key Takeaways
- एंटनी राजू को 1990 के मादक पदार्थ मामले में दोषी ठहराया गया।
- मामले ने केरल की राजनीति में विवाद खड़ा किया।
- केरल हाईकोर्ट ने पहले सेर्वेली को बरी किया था।
- सुप्रीम कोर्ट ने एंटनी राजू के खिलाफ कार्यवाही बहाल की।
- यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रभावित करता है।
तिरुवनंतपुरम, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केरल की तिरुवनंतपुरम अदालत ने पूर्व परिवहन मंत्री एंटनी राजू को 1990 में दर्ज एक मादक पदार्थ जब्ती मामले में सबूतों से छेड़छाड़ का दोषी ठहराया है। यह फैसला उस मामले से संबंधित है, जिसने केरल की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया में काफी हंगामा खड़ा किया था।
यह मामला 1990 का है, जब ऑस्ट्रेलियाई नागरिक एंड्रयू साल्वाटोर सेर्वेली को तिरुवनंतपुरम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप था कि वह जेब में 61.5 ग्राम हशीश छिपाकर भारत ला रहा था। उस समय एंटनी राजू एक जूनियर वकील थे और उन्होंने सेर्वेली के बचाव पक्ष का प्रतिनिधित्व किया था।
सेशन कोर्ट ने पहले सेर्वेली को दोषी ठहराया था, लेकिन बाद में केरल हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि पेश किए गए सबूत विश्वसनीय नहीं हैं, जिससे सबूतों में छेड़छाड़ का संदेह उत्पन्न होता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने मामले की विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे।
विजिलेंस जांच के बाद 1994 में एंटनी राजू और कोर्ट क्लर्क के. जोस के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश और सबूतों से छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया।
यह मामला वर्षों तक कानूनी अड़चनों में उलझा रहा। मार्च 2023 में केरल हाईकोर्ट ने तकनीकी आधार पर कार्यवाही रद्द कर दी थी। हालांकि नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को पलटते हुए एंटनी राजू के खिलाफ आपराधिक मुकदमा बहाल किया और ट्रायल कोर्ट को एक वर्ष के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया।
शनिवार को आया फैसला केरल की राजनीति में बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राजू, वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) के घटक दल जनधिपत्य केरल कांग्रेस के वर्तमान विधायक हैं।
12 वर्ष तक चली लंबी जांच के बाद सहायक पुलिस आयुक्त ने 2006 में तिरुवनंतपुरम के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के समक्ष आरोप पत्र दायर किया, जिसमें राजू पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करने और सुबूतों को गायब करने का आरोप लगाया गया था।