27 अक्टूबर 2026
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12वें ब्रिक्स संसदीय मंच पर राघव चड्ढा की प्योत्र टॉलस्टॉय से मुलाकात, बोले — 'महान विचारों की कोई सीमा नहीं'

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12वें ब्रिक्स संसदीय मंच पर राघव चड्ढा की प्योत्र टॉलस्टॉय से मुलाकात, बोले — 'महान विचारों की कोई सीमा नहीं'

सारांश

संसद भवन में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान राघव चड्ढा की प्योत्र टॉलस्टॉय से मुलाकात ने 1909 के टॉलस्टॉय-गांधी पत्र-व्यवहार की यादें ताज़ा कर दीं — एक ऐसा बौद्धिक सेतु जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को दिशा दी थी।

मुख्य बातें

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 27 अक्टूबर 2026 को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान संसद भवन, नई दिल्ली में प्योत्र टॉलस्टॉय से मुलाकात की।
प्योत्र टॉलस्टॉय , महान रूसी साहित्यकार लियो टॉलस्टॉय के प्रपौत्र हैं और स्वयं एक प्रतिष्ठित रूसी सांसद हैं।
वर्ष 1909 में लियो टॉलस्टॉय और महात्मा गांधी के बीच अहिंसा व सत्य पर ऐतिहासिक पत्र-व्यवहार हुआ था।
गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में अपने आश्रम का नाम 'टॉलस्टॉय फार्म' रखकर इस जुड़ाव को सम्मान दिया था।
चड्ढा ने एक्स पर पोस्ट किया — 'महान विचारों की कोई सीमा नहीं' ।

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान विश्वविख्यात रूसी साहित्यकार लियो टॉलस्टॉय के प्रपौत्र प्योत्र टॉलस्टॉय से मुलाकात की। इस ऐतिहासिक भेंट का अनुभव उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए इसे भारत और रूस के बीच के गहरे बौद्धिक जुड़ाव का प्रतीक बताया।

मुलाकात का विवरण

चड्ढा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि 'वॉर एंड पीस' और 'अन्ना कारेनिना' जैसी कालजयी कृतियों के रचयिता लियो टॉलस्टॉय केवल एक महान लेखक और दार्शनिक ही नहीं थे, बल्कि एक असाधारण मानवीय व्यक्तित्व के स्वामी भी थे। उन्होंने रेखांकित किया कि कुलीन परिवार में जन्म लेने के बावजूद टॉलस्टॉय ने सामाजिक विशेषाधिकारों और असमानता पर सवाल उठाए तथा युद्ध की विभीषिका को प्रत्यक्ष देखने के बाद वे शांति, अहिंसा, करुणा और सत्य के प्रबल समर्थक बन गए।

प्योत्र टॉलस्टॉय स्वयं रूस में एक प्रतिष्ठित सांसद हैं और इस ब्रिक्स संसदीय मंच में रूसी प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में उपस्थित थे।

टॉलस्टॉय-गांधी बौद्धिक संबंध

चड्ढा ने इस मुलाकात को भारतीय दृष्टिकोण से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1909 में लियो टॉलस्टॉय और महात्मा गांधी के बीच सत्य, प्रेम और अहिंसा के विषयों पर पत्र-व्यवहार प्रारंभ हुआ था। टॉलस्टॉय के विचारों ने गांधीजी की वैचारिक दृष्टि को गहराई से प्रभावित किया, जो आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बनी।

गौरतलब है कि गांधीजी ने टॉलस्टॉय के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए दक्षिण अफ्रीका में अपने आश्रम का नाम 'टॉलस्टॉय फार्म' रखा था। यह जुड़ाव दो सभ्यताओं के बीच वैचारिक आदान-प्रदान का एक दुर्लभ उदाहरण है।

चड्ढा का संदेश

राघव चड्ढा ने इस भेंट को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि एक सदी से भी अधिक समय बाद भारत की संसद में उस महान विभूति के वंशज से मिलना एक अत्यंत विशेष क्षण था। उनके अनुसार, 'टॉलस्टॉय के रूस' और भारत के बीच यह बौद्धिक कड़ी दोनों राष्ट्रों की दीर्घकालिक मित्रता का एक जीवंत अध्याय है।

यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स मंच पर भारत और रूस के बीच संसदीय और कूटनीतिक संवाद को नई ऊर्जा मिल रही है।

ब्रिक्स संसदीय मंच का महत्व

12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधि एकत्रित हुए। यह मंच बहुपक्षीय सांसदीय कूटनीति का एक अहम मंच है जहाँ कानून-निर्माण, वैश्विक शासन और सहयोग के मुद्दों पर विचार-विमर्श होता है। चड्ढा और प्योत्र टॉलस्टॉय की यह मुलाकात इस आयोजन के सांस्कृतिक और बौद्धिक आयाम को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच पर राघव चड्ढा की किससे मुलाकात हुई?
राघव चड्ढा ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान महान रूसी लेखक लियो टॉलस्टॉय के प्रपौत्र प्योत्र टॉलस्टॉय से मुलाकात की। प्योत्र टॉलस्टॉय स्वयं एक प्रतिष्ठित रूसी सांसद हैं।
लियो टॉलस्टॉय और महात्मा गांधी के बीच क्या संबंध था?
वर्ष 1909 में लियो टॉलस्टॉय और महात्मा गांधी के बीच सत्य, प्रेम और अहिंसा के विषयों पर पत्र-व्यवहार प्रारंभ हुआ था। टॉलस्टॉय के विचारों ने गांधीजी की वैचारिक दृष्टि को गहराई से प्रभावित किया, जो आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बनी। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका में अपने आश्रम का नाम 'टॉलस्टॉय फार्म' रखा था।
प्योत्र टॉलस्टॉय कौन हैं?
प्योत्र टॉलस्टॉय रूसी साहित्य के महानतम लेखकों में शुमार लियो टॉलस्टॉय के प्रपौत्र हैं। वे स्वयं रूस में एक प्रतिष्ठित सांसद हैं और ब्रिक्स संसदीय मंच में रूसी प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में नई दिल्ली आए थे।
राघव चड्ढा ने इस मुलाकात के बारे में क्या कहा?
राघव चड्ढा ने एक्स पर लिखा कि एक सदी से भी अधिक समय बाद भारत की संसद में उस महान विभूति के वंशज से मिलना एक अत्यंत विशेष क्षण था। उन्होंने कहा कि 'महान विचारों की कोई सीमा नहीं' और यह भेंट भारत-रूस की गहरी बौद्धिक मित्रता का प्रतीक है।
12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच कहाँ और कब आयोजित हुआ?
12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित हुआ। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधि बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक शासन के मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एकत्रित हुए।
राष्ट्र प्रेस
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