12वें ब्रिक्स संसदीय मंच पर राघव चड्ढा की प्योत्र टॉलस्टॉय से मुलाकात, बोले — 'महान विचारों की कोई सीमा नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान विश्वविख्यात रूसी साहित्यकार लियो टॉलस्टॉय के प्रपौत्र प्योत्र टॉलस्टॉय से मुलाकात की। इस ऐतिहासिक भेंट का अनुभव उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए इसे भारत और रूस के बीच के गहरे बौद्धिक जुड़ाव का प्रतीक बताया।
मुलाकात का विवरण
चड्ढा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि 'वॉर एंड पीस' और 'अन्ना कारेनिना' जैसी कालजयी कृतियों के रचयिता लियो टॉलस्टॉय केवल एक महान लेखक और दार्शनिक ही नहीं थे, बल्कि एक असाधारण मानवीय व्यक्तित्व के स्वामी भी थे। उन्होंने रेखांकित किया कि कुलीन परिवार में जन्म लेने के बावजूद टॉलस्टॉय ने सामाजिक विशेषाधिकारों और असमानता पर सवाल उठाए तथा युद्ध की विभीषिका को प्रत्यक्ष देखने के बाद वे शांति, अहिंसा, करुणा और सत्य के प्रबल समर्थक बन गए।
प्योत्र टॉलस्टॉय स्वयं रूस में एक प्रतिष्ठित सांसद हैं और इस ब्रिक्स संसदीय मंच में रूसी प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में उपस्थित थे।
टॉलस्टॉय-गांधी बौद्धिक संबंध
चड्ढा ने इस मुलाकात को भारतीय दृष्टिकोण से विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1909 में लियो टॉलस्टॉय और महात्मा गांधी के बीच सत्य, प्रेम और अहिंसा के विषयों पर पत्र-व्यवहार प्रारंभ हुआ था। टॉलस्टॉय के विचारों ने गांधीजी की वैचारिक दृष्टि को गहराई से प्रभावित किया, जो आगे चलकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा बनी।
गौरतलब है कि गांधीजी ने टॉलस्टॉय के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए दक्षिण अफ्रीका में अपने आश्रम का नाम 'टॉलस्टॉय फार्म' रखा था। यह जुड़ाव दो सभ्यताओं के बीच वैचारिक आदान-प्रदान का एक दुर्लभ उदाहरण है।
चड्ढा का संदेश
राघव चड्ढा ने इस भेंट को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि एक सदी से भी अधिक समय बाद भारत की संसद में उस महान विभूति के वंशज से मिलना एक अत्यंत विशेष क्षण था। उनके अनुसार, 'टॉलस्टॉय के रूस' और भारत के बीच यह बौद्धिक कड़ी दोनों राष्ट्रों की दीर्घकालिक मित्रता का एक जीवंत अध्याय है।
यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स मंच पर भारत और रूस के बीच संसदीय और कूटनीतिक संवाद को नई ऊर्जा मिल रही है।
ब्रिक्स संसदीय मंच का महत्व
12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के संसदीय प्रतिनिधि एकत्रित हुए। यह मंच बहुपक्षीय सांसदीय कूटनीति का एक अहम मंच है जहाँ कानून-निर्माण, वैश्विक शासन और सहयोग के मुद्दों पर विचार-विमर्श होता है। चड्ढा और प्योत्र टॉलस्टॉय की यह मुलाकात इस आयोजन के सांस्कृतिक और बौद्धिक आयाम को रेखांकित करती है।