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पीयूष गोयल ने लंदन में साझा किया जीवन का सबक: लचीलापन और सीखने की भावना ही भारत की विकास शक्ति

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पीयूष गोयल ने लंदन में साझा किया जीवन का सबक: लचीलापन और सीखने की भावना ही भारत की विकास शक्ति

सारांश

लंदन के मंच से पीयूष गोयल ने सिर्फ भाषण नहीं दिया — उन्होंने अपनी सबसे बड़ी व्यक्तिगत असफलता का किस्सा सुनाया। CA परीक्षा में कम अंक और के.जी. सोमानी की सलाह ने उनकी सोच बदली। उनका संदेश: रैंक नहीं, सीखने की भावना ही भारत और व्यक्ति दोनों की असली ताकत है।

मुख्य बातें

पीयूष गोयल ने 25 जून 2026 को लंदन में यूके-इंडिया वीक 2026 के दौरान भारत की विकास यात्रा पर विचार साझा किए।
उन्होंने बताया कि बॉम्बे यूनिवर्सिटी में कानून में दूसरा स्थान पाने के बावजूद CA परीक्षा में कम अंक आने पर वह निराश हुए थे।
इंस्टीट्यूट के पूर्व अध्यक्ष के.जी.
सोमानी ने उन्हें सिखाया कि रैंक नहीं, प्रयास और सीखने की क्षमता ही भविष्य तय करती है।
गोयल ने कहा कि भारत की विकास गाथा लचीलेपन, निरंतर सीखने और असफलताओं से उबरने की संस्कृति पर आधारित है।
उन्होंने लंदन और बेंगलुरु के ट्रैफिक का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन की अनिश्चितताओं को स्वीकारना ही परिपक्वता है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 25 जून 2026 को लंदन में आयोजित इंडिया ग्लोबल फोरम की यूके-इंडिया वीक 2026 में कहा कि भारत की विकास गाथा की असली ताकत लचीलापन, निरंतर सीखने की प्रवृत्ति और असफलताओं से उबरकर आगे बढ़ने का दृढ़ संकल्प है। उन्होंने इस अवसर पर अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए युवाओं को प्रेरणादायक संदेश दिया।

मंच का महत्व और भारत-ब्रिटेन साझेदारी

गोयल ने कहा कि इंडिया ग्लोबल फोरम जैसे मंच लोगों को परस्पर सीखने और साझेदारी को सुदृढ़ करने का बेहतरीन अवसर देते हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विभिन्न पृष्ठभूमियों और अनुभवों वाले लोगों के साथ संवाद व्यक्तिगत और राष्ट्रीय विकास दोनों के लिए अनिवार्य है।

व्यक्तिगत असफलता से मिली जीवन की सबसे बड़ी सीख

मंत्री ने अपने शैक्षणिक जीवन का एक महत्वपूर्ण प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि बॉम्बे यूनिवर्सिटी में कानून विषय में दूसरा स्थान प्राप्त करने के बावजूद चार्टर्ड अकाउंटेंसी परीक्षा में उसी विषय में अपेक्षा से काफी कम अंक आने पर वह बेहद निराश हो गए थे। परिणाम से असंतुष्ट होकर वह उत्तर पुस्तिका और अंकों की समीक्षा के लिए दिल्ली तक गए।

गोयल ने बताया कि उस दौरान उन्होंने इंस्टीट्यूट के पूर्व अध्यक्ष के.जी. सोमानी के साथ पूरा दिन बिताया। सोमानी ने उन्हें समझाया कि किसी परीक्षा में मिले अंक या रैंक किसी व्यक्ति का भविष्य तय नहीं करते। उनकी यह सलाह थी कि जीवन में सफलता पहला या दूसरा स्थान पाने से नहीं, बल्कि प्रयासों, सीखने की क्षमता और आगे बढ़ने की सोच से निर्धारित होती है।

युवाओं के लिए संदेश: रैंकिंग से परे सोचें

गोयल ने कहा कि युवावस्था में लोग अक्सर रैंकिंग और उपलब्धियों को आवश्यकता से अधिक महत्व देते हैं। उन्होंने लंदन और बेंगलुरु जैसे शहरों में ट्रैफिक की अनिश्चितता का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में भी कई परिस्थितियाँ हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं — और यही वास्तविकता हमें लचीला बनाती है। उन्होंने जोर दिया कि मित्रों, सहकर्मियों और विभिन्न कार्यक्रमों में मिलने वाले लोगों के अनुभव नई सीख और प्रेरणा का निरंतर स्रोत बनते हैं।

भारत की विकास यात्रा और सीखने की संस्कृति

मंत्री ने व्यक्तिगत अनुभव को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि भारत की विकास यात्रा भी इसी सोच पर टिकी है — चुनौतियों को अवसर में बदलना और हर अनुभव से सीखकर आगे बढ़ना। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति और देश निरंतर सीखते रहते हैं, वही नई ऊँचाइयाँ हासिल करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंचों पर अपनी आर्थिक और कूटनीतिक उपस्थिति लगातार मजबूत कर रहा है।

आगे की राह

गोयल की यह टिप्पणियाँ यूके-इंडिया वीक 2026 के व्यापक संदर्भ में आई हैं, जो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने का एक प्रमुख मंच है। उनके विचार भारत की उस नीतिगत सोच को भी प्रतिबिंबित करते हैं जिसमें मानव पूँजी के विकास को आर्थिक प्रगति का आधार माना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक वरिष्ठ मंत्री के रूप में इसे केवल प्रेरक आख्यान तक सीमित रखना एक चूक भी है। यूके-इंडिया वीक जैसे नीतिगत मंच पर 'लचीलेपन' की बात तब अधिक विश्वसनीय होती जब वह ठोस व्यापार नीति या द्विपक्षीय समझौतों से जुड़ी होती। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत वर्षों से लंबित है — उस पर कोई ठोस अपडेट न देना और व्यक्तिगत किस्से सुनाना, मुख्यधारा की कवरेज में अनदेखा रह जाता है। असली सवाल यह है कि 'सीखने की संस्कृति' का यह दर्शन नीतिगत क्रियान्वयन में कब और कैसे परिलक्षित होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीयूष गोयल ने लंदन में यूके-इंडिया वीक 2026 में क्या कहा?
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 25 जून 2026 को लंदन में कहा कि भारत की विकास गाथा लचीलेपन, निरंतर सीखने और असफलताओं से उबरने की भावना पर आधारित है। उन्होंने इंडिया ग्लोबल फोरम के मंच पर अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए।
पीयूष गोयल ने के.जी. सोमानी का जिक्र क्यों किया?
गोयल ने बताया कि CA परीक्षा में कम अंक आने पर वह निराश होकर दिल्ली गए और इंस्टीट्यूट के पूर्व अध्यक्ष के.जी. सोमानी से मिले। सोमानी ने उन्हें समझाया कि जीवन में सफलता रैंक से नहीं, बल्कि प्रयास और सीखने की क्षमता से तय होती है — यह सीख गोयल के जीवन का転换बिंदु बनी।
इंडिया ग्लोबल फोरम की यूके-इंडिया वीक 2026 क्या है?
यूके-इंडिया वीक 2026 लंदन में आयोजित एक प्रमुख द्विपक्षीय मंच है जो भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार, निवेश और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता है। इस वर्ष इसमें पीयूष गोयल सहित कई प्रमुख भारतीय नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं ने भाग लिया।
गोयल के अनुसार भारत की विकास यात्रा की ताकत क्या है?
पीयूष गोयल के अनुसार, भारत की विकास यात्रा चुनौतियों को अवसर में बदलने और हर अनुभव से सीखने की संस्कृति पर आधारित है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति और देश निरंतर सीखते रहते हैं, वही नई ऊँचाइयाँ हासिल करते हैं।
गोयल ने लंदन और बेंगलुरु के ट्रैफिक का उदाहरण क्यों दिया?
उन्होंने यह उदाहरण यह समझाने के लिए दिया कि जीवन में कई परिस्थितियाँ हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं — जैसे इन शहरों में ट्रैफिक का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है। उनका संदेश था कि अनिश्चितता को स्वीकारना और उससे सीखना ही परिपक्वता और सफलता की कुंजी है।
राष्ट्र प्रेस
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