12वें BRICS संसदीय फोरम से पहले रूसी स्टेट ड्यूमा अध्यक्ष वोलोदिन ने राजघाट पर गांधी को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
रूस की संसद (स्टेट ड्यूमा) के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने 25 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राजघाट पहुँचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। वोलोदिन इन दिनों भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं और 26-27 अक्टूबर को संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित होने वाले 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम में भाग लेंगे।
राजघाट पर श्रद्धांजलि का क्षण
भारत में रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि वोलोदिन ने राजघाट स्मारक परिसर में गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। यह भारत-रूस राजनयिक संबंधों में सद्भाव और सम्मान के एक प्रतीकात्मक इशारे के रूप में देखा जा रहा है। राजघाट पर श्रद्धांजलि अदा करना विदेशी गणमान्यों के भारत दौरे की एक परंपरागत और सम्मानजनक रीत रही है।
12वाँ ब्रिक्स संसदीय फोरम: मुख्य घटनाक्रम
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को घोषणा की थी कि यह मंच 26-27 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा। उन्होंने इसे भारत की संसदीय कूटनीति के इतिहास में एक नया अध्याय बताया। इस आयोजन में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के संसद अध्यक्ष, संसदीय नेता, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, विभिन्न राज्य विधानसभाओं के अध्यक्ष और अन्य गणमान्य लोग शामिल होंगे।
बिरला के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं से मुलाकात करेंगे। मंच के दौरान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों का भी आयोजन प्रस्तावित है।
चर्चा के विषय और भारत की संसदीय पहल
भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस मंच में जन-केंद्रित विकास और संसदीय सहयोग को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर चर्चा होगी। बिरला ने बताया कि अब तक 18 देशों से सुझाव प्राप्त हुए हैं और उसी आधार पर विमर्श किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि भारत ने एक नई पहल के अंतर्गत 64 देशों के साथ संसदीय मैत्री समूह बनाए हैं, जिसे एक अभूतपूर्व प्रयास बताया जा रहा है।
भारत-रूस संबंधों की व्यापक पृष्ठभूमि
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और रूस के बीच संबंध कूटनीतिक रूप से सक्रिय हैं। 3 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों पर आयोजित एक परामर्श समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए वार्ता और कूटनीति के प्रति भारत के समर्थन को दोहराया था। उस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संपर्क, संस्कृति और लोगों के बीच आपसी संबंधों सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गई।
आगे क्या
वोलोदिन की यह यात्रा ब्रिक्स संसदीय फोरम के आयोजन से ठीक पहले की गई है, जो वैश्विक दक्षिण में संसदीय कूटनीति को नई दिशा देने का प्रयास है। फोरम के परिणामों पर न केवल ब्रिक्स देश, बल्कि साझेदार राष्ट्र भी नज़र रखेंगे। आने वाले दो दिन यह तय करेंगे कि भारत की संसदीय अध्यक्षता किस हद तक ठोस सहयोग रूपरेखाओं में परिणत होती है।