इजरायल में 26वीं नेसेट चुनाव: नेतन्याहू ने डाला वोट, 73 लाख मतदाताओं ने जताया लोकतंत्र पर भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल में 26वीं नेसेट (संसद) के लिए 27 अक्टूबर 2026 को मतदान संपन्न हुआ, जिसमें देशभर के 73 लाख से अधिक पंजीकृत मतदाताओं ने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा नेतन्याहू के साथ यरुशलम के एक मतदान केंद्र पर वोट डाला और नागरिकों से मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की।
चुनावी तैयारियाँ और मतदान की व्यापकता
इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग के महानिदेशक डीन लिवने के अनुसार, 73 लाख पात्र मतदाताओं के लिए देशभर में 12,018 नियमित मतदान केंद्र स्थापित किए गए थे। इसके अतिरिक्त अस्पतालों, जेलों और सैन्य प्रतिष्ठानों सहित विशेष स्थानों पर 300 अतिरिक्त मतदान केंद्र भी बनाए गए। इस प्रकार देशभर में कुल 12,335 स्थानों पर चुनावी व्यवस्थाएं की गईं।
लिवने ने बताया कि इस चुनाव के लिए 45 करोड़ मतपत्र मुद्रित किए गए और चुनाव का कुल बजट लगभग 70 करोड़ नई इजरायली शेकेल रखा गया, जो 15 करोड़ डॉलर से कुछ कम है।
मतदाताओं की आवाज़ — शांति और मज़बूती का संदेश
यरुशलम में मतदान के दौरान स्थानीय नागरिकों ने खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि वे युद्ध बिल्कुल नहीं चाहते और इजरायल के साथ-साथ पूरी दुनिया में शांति की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने इजरायल को एक लोकतांत्रिक देश बताते हुए कहा कि यहाँ तानाशाही नहीं है।
वोट डालकर लौट रही एक युवती ने देश की ताकत पर भरोसा जताते हुए कहा कि इजरायल बहुत मज़बूत है और उसे किसी की मदद की ज़रूरत नहीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी पसंद के योग्य प्रतिनिधि नेसेट में पहुंचकर देश का भविष्य बेहतर बनाएंगे। एक अन्य मतदाता ने इस चुनाव को इजरायल के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव बताया।
7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद पहला चुनाव
गौरतलब है कि ये चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल में होने वाला पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है। 2022 के चुनावों के बाद से इजरायल के राजनीतिक परिदृश्य और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में उल्लेखनीय बदलाव देखे गए हैं। यह चुनाव ऐसे समय में आया है जब देश युद्ध के दीर्घकालिक प्रभावों, सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक पुनर्गठन के दौर से गुज़र रहा है।
एक स्थानीय निवासी ने 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों से मतदान करने की अपील की और कहा कि चुनाव में अधिकतम भागीदारी लोकतंत्र की नींव को मज़बूत करती है।
चुनाव का महत्व और आगे की राह
26वीं नेसेट का गठन इजरायल की भविष्य की सुरक्षा नीति, गाज़ा युद्धविराम की संभावनाओं और घरेलू राजनीतिक स्थिरता को सीधे प्रभावित करेगा। मतगणना और नतीजों के आधार पर तय होगा कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहते हैं या विपक्षी गठबंधन नई सरकार बनाने में सफल होता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव न केवल इजरायल के लिए बल्कि पश्चिम एशिया के समीकरणों के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।