इजरायल नेसेट चुनाव 2026: 73 लाख मतदाता वोट डाल रहे हैं, नेतन्याहू बनाम विपक्ष में कड़ा मुकाबला
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल में नेसेट (संसद) के लिए मतदान मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को जारी है, जिसमें लगभग 73 लाख पात्र मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। राष्ट्रपति आइज़ैक हर्जोग, उनकी पत्नी मिशाल हर्जोग और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर सहित कई प्रमुख हस्तियों ने मतदान केंद्रों पर पहुँचकर वोट डाला। यह 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल का पहला आम चुनाव है।
मुख्य घटनाक्रम
चुनाव से पहले जारी अंतिम ओपिनियन पोल के अनुसार, मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गुट और इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के पूर्व प्रमुख गादी आइसेनकोट की 'यशार' पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गुटों के बीच कड़ा मुकाबला है। द टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, यदि दोनों पक्ष अपने चुनावी वादों पर कायम रहते हैं, तो किसी भी गुट को संसद में स्पष्ट बहुमत मिलने की संभावना फिलहाल कम दिखती है।
स्थानीय समयानुसार रात 10 बजे मतदान समाप्त होने के बाद एग्जिट पोल आने की उम्मीद है। वोटों की गिनती के बाद आने वाले दिनों में आधिकारिक परिणाम घोषित किए जाएंगे।
आम नागरिकों की प्रतिक्रिया
एक स्थानीय नागरिक ने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा, 'हर किसी को बाहर निकलकर वोट देना चाहिए। 18 साल से ऊपर के सभी को आना चाहिए, अपनी बात रखनी चाहिए और अपना वोट डालना चाहिए।' एक अन्य नागरिक ने इस चुनाव को 'इजरायल के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण चुनाव' करार दिया।
राजनीतिक गतिरोध की आशंका
IDF के पूर्व मेजर एरियल एवरबुच ने आशंका जताई कि परिणाम राजनीतिक गतिरोध में बदल सकता है, जिससे दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। उन्होंने कहा, 'मुझे डर है कि कल मुकाबला टाई हो सकता है, जिससे हमें एक और चुनाव का सामना करना पड़ सकता है। मुझे लगता है कि अंत में दक्षिणपंथी गुट — जिसका नेतृत्व शायद नेतन्याहू करेंगे — जीत जाएगा, लेकिन मुझे चिंता है कि कल मुकाबला टाई हो सकता है।'
एवरबुच ने नेतन्याहू के सुरक्षा रिकॉर्ड की भी तारीफ करते हुए कहा कि हिजबुल्लाह पर पेजर हमले, हमास के खिलाफ कार्रवाई, गाजा पट्टी के 70 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर नियंत्रण, ईरान पर हमला और हूती विद्रोहियों के खिलाफ की गई कार्रवाई में प्रधानमंत्री ने 'बहुत सख्ती और मजबूती से काम किया है।'
ऐतिहासिक संदर्भ
यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के उस हमले के बाद पहला चुनाव है, जिसे एवरबुच ने 'यहूदियों के होलोकॉस्ट के बाद सबसे भयानक आतंकी हमला' बताया। 2022 के चुनावों के बाद से इजरायल के राजनीतिक परिदृश्य और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव आया है। गौरतलब है कि इजरायल में पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता के कारण बार-बार चुनाव हुए हैं।
आगे क्या होगा
यदि कोई भी गुट स्पष्ट बहुमत नहीं पाता, तो गठबंधन वार्ता लंबी खिंच सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस चुनाव के नतीजे न केवल इजरायल की घरेलू नीतियों, बल्कि गाजा और लेबनान में जारी संघर्ष की दिशा पर भी गहरा असर डालेंगे।