15 अक्टूबर 2026
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इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने नई दिल्ली में डाला वोट, 27 अक्टूबर को नेसेट चुनाव

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इजरायली राजदूत रूवेन अजार ने नई दिल्ली में डाला वोट, 27 अक्टूबर को नेसेट चुनाव

सारांश

इजरायल के 27 अक्टूबर के नेसेट चुनावों से पहले राजदूत रूवेन अजार ने नई दिल्ली और मुंबई के राजनयिकों ने भारतीय मिशनों में अपना वोट डाला। सर्वे बताते हैं कांटे की टक्कर — नेतन्याहू और आइसेनकोट दोनों के गुट करीब 52-52 सीटों पर अटके, बहुमत का जादुई आंकड़ा 61 दूर।

मुख्य बातें

राजदूत रूवेन अजार ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में नेसेट चुनाव के लिए अग्रिम मतदान किया।
मुंबई महावाणिज्य दूतावास के राजनयिकों ने भी उसी दिन मत डाले — इजरायली कानून के तहत विदेशी मिशनों में पूर्व-मतदान की व्यवस्था है।
इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय (नेसेट) चुनाव होने हैं; बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी हैं।
सर्वे में गादी आइसेनकोट की 'यशार' पार्टी तीनों पोल में आगे; 'चैनल 13' सर्वे में 'यशार' और ' लिकुड ' दोनों को 20-20 सीटें ।
पोलिंग औसत में नेतन्याहू गुट को 55 और आइसेनकोट गुट को 50 सीटें मिलने का अनुमान; अरब पार्टियों को 15 सीटें ।
चुनावी थ्रेशोल्ड के करीब रहने वाली छोटी पार्टियों का प्रदर्शन सरकार-गठन में निर्णायक हो सकता है।

भारत में तैनात इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित दूतावास में अपना वोट डाला। 27 अक्टूबर को इजरायल में होने वाले संसदीय (नेसेट) चुनावों से पहले विदेशों में तैनात इजरायली राजनयिकों के लिए पूर्व-मतदान की व्यवस्था के तहत यह मतदान हुआ। भारत को 'दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र' बताते हुए दूतावास ने इस प्रक्रिया को प्रतीकात्मक रूप से विशेष करार दिया।

दिल्ली और मुंबई दोनों मिशनों में हुआ मतदान

नई दिल्ली में राजदूत अजार के मतदान के साथ-साथ मुंबई स्थित इजरायल के महावाणिज्य दूतावास में भी राजनयिकों ने नेसेट चुनावों के लिए अपने मत डाले। महावाणिज्य दूतावास ने एक्स पोस्ट में कहा, 'वे देश का भविष्य तय करने में दुनिया भर के अन्य इजरायली नागरिकों के साथ शामिल हुए। हर वोट मायने रखता है, चाहे वह यरुशलम में डाला गया हो या मुंबई में।' इजरायली कानून के अनुसार, विदेशों में कार्यरत इजरायली नागरिक पहले मतदान करते हैं ताकि उनके वोट समय पर स्वदेश पहुँच सकें।

कांटे की टक्कर: सर्वे में कोई गुट बहुमत से दूर

इजरायली मीडिया संस्थानों — 'मारिव', 'चैनल 13' और 'कान न्यूज़' — द्वारा जारी ओपिनियन पोल के अनुसार, मुकाबला कांटे का और नतीजा अनिश्चित बना हुआ है। 'द यरूशलम पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार गादी आइसेनकोट की 'यशार' पार्टी तीनों सर्वे में आगे चल रही है। हालांकि, आँकड़ों के अनुसार कोई भी राजनीतिक गुट नेसेट में बहुमत के लिए आवश्यक 61 सीटें हासिल कर पाने की स्थिति में नहीं दिखता।

नेतन्याहू बनाम आइसेनकोट: सीटों का अनुमान

पोलिंग औसत के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की 'लिकुड' पार्टी के गुट — जिसमें ओफर विंटर की 'पीपल ऑफ इजरायल' पार्टी भी शामिल है — और आइसेनकोट के नेतृत्व वाले ज़ायोनी विपक्षी गुट, दोनों को लगभग 52-52 सीटें मिलने का अनुमान है। 'चैनल 13' के सर्वे के मुताबिक, 'यशार' और 'लिकुड' दोनों को 20-20 सीटें मिल सकती हैं। अनुमान है कि नेतन्याहू का समग्र गुट 55 सीटें और आइसेनकोट का गुट 50 सीटें जीत सकता है, जबकि दोनों गुटों से बाहर की अरब पार्टियों को मिलाकर 15 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है।

चुनावी थ्रेशोल्ड होगा निर्णायक

विशेषज्ञों का कहना है कि सर्वे के नतीजों में अंतर और चुनावी थ्रेशोल्ड (न्यूनतम आवश्यक वोट प्रतिशत) के करीब रहने वाली पार्टियों का प्रदर्शन यह तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है कि अगली सरकार कौन बनाएगा। गौरतलब है कि इजरायली कानून के तहत संसद के लिए आम चुनाव हर चार साल में होने चाहिए। नेतन्याहू फिलहाल एक ऐसे गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं जिसमें धुर-दक्षिणपंथी और कट्टर धार्मिक गुट शामिल हैं।

आगे क्या

चुनाव में अभी लगभग दो सप्ताह का समय बाकी है और प्रचार तेज़ होने के साथ सर्वे संख्याएँ बदल सकती हैं। यदि कोई भी गुट 61 सीटें नहीं जुटा पाता, तो त्रिशंकु नेसेट की स्थिति में गठबंधन वार्ता निर्णायक होगी — और यह प्रक्रिया इजरायल के राजनीतिक इतिहास में एक और जटिल सरकार-गठन की ओर ले जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कहानी नेसेट की अनिश्चितता में है। नेतन्याहू का गठबंधन — जो धुर-दक्षिणपंथी और कट्टर धार्मिक गुटों पर टिका है — वर्षों से इजरायल की राजनीति को अस्थिर बनाए हुए है, और सर्वे संकेत देते हैं कि यह चुनाव भी त्रिशंकु नेसेट की ओर जा सकता है। आइसेनकोट की 'यशार' की बढ़त वास्तविक है, पर 61 सीटों की दहलीज़ तक पहुँचना दोनों खेमों के लिए चुनौतीपूर्ण दिख रहा है। यदि गठबंधन वार्ता लंबी खिंची तो इजरायल की घरेलू और विदेश नीति — जिसमें गाज़ा संघर्ष और क्षेत्रीय कूटनीति शामिल हैं — पर सीधा असर पड़ सकता है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इजरायली राजनयिकों ने भारत में मतदान क्यों किया?
इजरायली कानून के तहत विदेशों में तैनात राजनयिक और नागरिक अपने देश के चुनाव से पहले ही मिशन परिसर में वोट डाल सकते हैं, ताकि उनके मत समय पर इजरायल पहुँच सकें। 15 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली और मुंबई में यही प्रक्रिया अपनाई गई।
इजरायल के नेसेट चुनाव 2026 कब हैं और बहुमत के लिए कितनी सीटें चाहिए?
इजरायल में नेसेट (संसद) चुनाव 27 अक्टूबर 2026 को होने हैं। सरकार बनाने के लिए किसी भी गुट को 120 सदस्यीय नेसेट में कम-से-कम 61 सीटें जीतनी होंगी।
इजरायल चुनाव 2026 में कौन आगे है — नेतन्याहू या आइसेनकोट?
'द यरूशलम पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, गादी आइसेनकोट की 'यशार' पार्टी तीन प्रमुख सर्वे में आगे है। हालांकि, पोलिंग औसत में नेतन्याहू के गुट को 55 और आइसेनकोट के गुट को 50 सीटें मिलने का अनुमान है, और कोई भी गुट 61 के बहुमत के करीब नहीं दिखता।
इजरायल चुनाव में अरब पार्टियों की क्या भूमिका होगी?
सर्वे के अनुसार इजरायल में दोनों मुख्य गुटों से बाहर की अरब पार्टियों को मिलाकर लगभग 15 सीटें मिलने की संभावना है। यदि कोई भी गुट बहुमत हासिल नहीं कर पाया तो ये पार्टियाँ गठबंधन वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इजरायल में चुनावी थ्रेशोल्ड का क्या महत्व है?
इजरायल में चुनावी थ्रेशोल्ड वह न्यूनतम वोट प्रतिशत है जो किसी पार्टी को नेसेट में प्रवेश के लिए प्राप्त करना आवश्यक है। इस सीमा के करीब रहने वाली छोटी पार्टियाँ यदि थ्रेशोल्ड पार कर लें या न कर सकें, तो सीटों का समीकरण बड़े पैमाने पर बदल सकता है और सरकार-गठन पर सीधा असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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