28 अक्टूबर 2026
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भारत-इजरायल द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत होंगे: विदेश मंत्रालय की पुष्टि, 26वीं नेसेट चुनाव में नेतन्याहू गठबंधन आगे

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भारत-इजरायल द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत होंगे: विदेश मंत्रालय की पुष्टि, 26वीं नेसेट चुनाव में नेतन्याहू गठबंधन आगे

सारांश

इजरायल में 26वीं नेसेट के चुनाव के बीच भारत ने द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। आंशिक नतीजों में नेतन्याहू के लिकुड गठबंधन को 54 सीटों की बढ़त, लेकिन मुकाबला करीबी बना हुआ है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत-इजरायल संबंधों को आने वाले दिनों में और मज़बूत किया जाएगा।
इजरायल में 26वीं नेसेट के लिए मतदान हुआ — यह अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद पहला चुनाव है।
आंशिक नतीजों में 84.5% मतगणना तक नेतन्याहू के लिकुड गठबंधन को 54 सीटें , विपक्षी गठबंधन को 49 सीटें मिलने का अनुमान।
अरब समुदाय से जुड़े ज्वाइंट लिस्ट और राम गुटों की संयुक्त सीटें घटकर 17 रह गईं।
नोवा स्थल पर 378 लोगों की हत्या का हवाला देते हुए एक इजरायली नागरिक ने सुरक्षा को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बताया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित द्विसाप्ताहिक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि भारत और इजरायल के बीच संबंध पहले से मज़बूत हैं और आने वाले दिनों में इन्हें और प्रगाढ़ किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया जब इजरायल में 26वीं नेसेट के सदस्यों के लिए मतदान हो रहा था और आंशिक परिणाम सामने आने लगे थे।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान

जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, 'हाँ, इजरायल में चुनाव हो रहे हैं। इजरायल के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं। आने वाले दिनों में हम इन संबंधों को और मज़बूत करेंगे।' यह बयान इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली, तेल अवीव में सत्ता परिवर्तन की परवाह किए बिना, द्विपक्षीय सहयोग की निरंतरता बनाए रखने के पक्ष में है।

इजरायली चुनाव: मुख्य घटनाक्रम

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को हुए ये चुनाव अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद इजरायल में पहला चुनावी मुकाबला हैं। 2022 के चुनावों के बाद से देश के राजनीतिक परिदृश्य और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में उल्लेखनीय बदलाव आए हैं।

बुधवार दोपहर तक उपलब्ध आंशिक नतीजों के अनुसार, 84.5 प्रतिशत मतपेटियों की गिनती हो चुकी थी। केंद्रीय चुनाव समिति के आँकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले लिकुड गठबंधन को 54 सीटें मिलने का अनुमान था, जबकि गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 49 सीटें मिलने की संभावना थी।

'टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य रूप से अरब समुदाय से जुड़े ज्वाइंट लिस्ट और राम गुटों की संयुक्त सीटें घटकर 17 रह गईं। यह मुकाबला अत्यंत करीबी बना हुआ था।

ज़मीनी आवाज़ें: इजरायली नागरिकों की राय

चुनाव के बीच कुछ इजरायली नागरिकों ने अपनी प्राथमिकताएँ साझा कीं। एक नागरिक ने देश में शांति और एकता की उम्मीद जताते हुए कहा, 'मुझे पता है कि भारत के लोग बीबी (नेतन्याहू) को पसंद करते हैं और क्योंकि वह पीएम मोदी के मित्र हैं, इसलिए मैं उनका सम्मान करता हूँ। मैं पीएम मोदी से बहुत प्यार करता हूँ। बेंजामिन नेतन्याहू पुराने दौर की राजनीति करते हैं और हमें पुराना तरीका पसंद नहीं है। हम इजरायल में कुछ नया, नई सोच और नई ऊर्जा चाहते हैं।'

वहीं, एक अन्य नागरिक ने नेतन्याहू की सत्ता में वापसी का समर्थन करते हुए तर्क दिया कि देश को ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत है जो सुरक्षा खतरों को गहराई से समझे। उन्होंने कहा, 'हम यहाँ नोवा स्थल पर हैं, जहाँ 378 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। वे जीवन का जश्न मनाने के लिए आए थे। हमें ऐसे नेता की ज़रूरत है जो यह समझे कि हमारा दुश्मन कौन है।' उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल के विरोधियों को बचपन से ही हिंसा के लिए तैयार किया जाता है।

भारत-इजरायल संबंधों का संदर्भ

गौरतलब है कि भारत और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध 1992 में औपचारिक रूप से स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग लगातार विस्तारित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2017 में इजरायल यात्रा ऐतिहासिक मानी जाती है, क्योंकि वे ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे जिन्होंने इजरायल का दौरा किया।

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। नई दिल्ली की इजरायल के साथ संबंध मज़बूत करने की प्रतिबद्धता वहाँ के चुनावी नतीजों से इतर, रणनीतिक साझेदारी को दीर्घकालिक आधार पर आगे बढ़ाने के इरादे को दर्शाती है।

आगे क्या

अंतिम चुनावी नतीजों के बाद इजरायल में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। भारतीय विदेश मंत्रालय के संकेतों के अनुसार, नई सरकार के साथ भी द्विपक्षीय सहयोग जारी रहेगा। विश्लेषकों का मानना है कि रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग दोनों देशों की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बने रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और मानवीय संकट के बीच भारत की इस 'व्यापारिक-सामान्यता' की नीति पर सवाल उठते रहे हैं। नेतन्याहू गठबंधन की संभावित वापसी भारत-इजरायल रक्षा और प्रौद्योगिकी साझेदारी के लिए अनुकूल मानी जाती है, लेकिन नई दिल्ली को यह भी ध्यान रखना होगा कि अरब और मुस्लिम बहुल देशों के साथ उसके संबंध भी रणनीतिक महत्व रखते हैं — एक संतुलन जो तेजी से कठिन होता जा रहा है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने इजरायल के साथ संबंध मज़बूत करने की बात कब और क्यों कही?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में द्विसाप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान यह बयान दिया। यह बयान ऐसे समय आया जब इजरायल में 26वीं नेसेट के लिए मतदान जारी था और भारत ने स्पष्ट किया कि चुनावी नतीजों से परे द्विपक्षीय संबंधों की निरंतरता बनी रहेगी।
इजरायल में 26वीं नेसेट के चुनाव में क्या हुआ?
27 अक्टूबर 2026 को हुए इस चुनाव में आंशिक नतीजों (84.5% मतगणना) के अनुसार नेतन्याहू के लिकुड गठबंधन को 54 सीटें और विपक्षी गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को 49 सीटें मिलने का अनुमान था। यह चुनाव अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद इजरायल में पहला चुनावी मुकाबला है।
भारत और इजरायल के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग है?
दोनों देशों के बीच 1992 से औपचारिक राजनयिक संबंध हैं। रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि, साइबर सुरक्षा और व्यापार प्रमुख सहयोग क्षेत्र हैं। 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के बाद द्विपक्षीय संबंध और अधिक व्यापक हुए।
इजरायल के इस चुनाव में मुख्य मुद्दा क्या रहा?
इजरायली नागरिकों के अनुसार इस चुनाव में सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा रहा। अक्टूबर 2023 के हमास हमले और नोवा स्थल पर 378 लोगों की हत्या जैसी घटनाओं की पृष्ठभूमि में मतदाताओं ने सुरक्षा नेतृत्व को प्राथमिकता दी।
इजरायल चुनाव में अरब समुदाय की क्या भूमिका रही?
आंशिक नतीजों के अनुसार, मुख्य रूप से अरब समुदाय से जुड़े ज्वाइंट लिस्ट और राम गुटों की संयुक्त सीटें घटकर 17 रह गईं। एक इजरायली नागरिक ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि अरब समुदाय इतनी बड़ी संख्या में मतदान करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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