भारत-इजरायल द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत होंगे: विदेश मंत्रालय की पुष्टि, 26वीं नेसेट चुनाव में नेतन्याहू गठबंधन आगे
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित द्विसाप्ताहिक प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि भारत और इजरायल के बीच संबंध पहले से मज़बूत हैं और आने वाले दिनों में इन्हें और प्रगाढ़ किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय आया जब इजरायल में 26वीं नेसेट के सदस्यों के लिए मतदान हो रहा था और आंशिक परिणाम सामने आने लगे थे।
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, 'हाँ, इजरायल में चुनाव हो रहे हैं। इजरायल के साथ हमारे अच्छे संबंध हैं। आने वाले दिनों में हम इन संबंधों को और मज़बूत करेंगे।' यह बयान इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली, तेल अवीव में सत्ता परिवर्तन की परवाह किए बिना, द्विपक्षीय सहयोग की निरंतरता बनाए रखने के पक्ष में है।
इजरायली चुनाव: मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को हुए ये चुनाव अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद इजरायल में पहला चुनावी मुकाबला हैं। 2022 के चुनावों के बाद से देश के राजनीतिक परिदृश्य और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में उल्लेखनीय बदलाव आए हैं।
बुधवार दोपहर तक उपलब्ध आंशिक नतीजों के अनुसार, 84.5 प्रतिशत मतपेटियों की गिनती हो चुकी थी। केंद्रीय चुनाव समिति के आँकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले लिकुड गठबंधन को 54 सीटें मिलने का अनुमान था, जबकि गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 49 सीटें मिलने की संभावना थी।
'टाइम्स ऑफ इजरायल' की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य रूप से अरब समुदाय से जुड़े ज्वाइंट लिस्ट और राम गुटों की संयुक्त सीटें घटकर 17 रह गईं। यह मुकाबला अत्यंत करीबी बना हुआ था।
ज़मीनी आवाज़ें: इजरायली नागरिकों की राय
चुनाव के बीच कुछ इजरायली नागरिकों ने अपनी प्राथमिकताएँ साझा कीं। एक नागरिक ने देश में शांति और एकता की उम्मीद जताते हुए कहा, 'मुझे पता है कि भारत के लोग बीबी (नेतन्याहू) को पसंद करते हैं और क्योंकि वह पीएम मोदी के मित्र हैं, इसलिए मैं उनका सम्मान करता हूँ। मैं पीएम मोदी से बहुत प्यार करता हूँ। बेंजामिन नेतन्याहू पुराने दौर की राजनीति करते हैं और हमें पुराना तरीका पसंद नहीं है। हम इजरायल में कुछ नया, नई सोच और नई ऊर्जा चाहते हैं।'
वहीं, एक अन्य नागरिक ने नेतन्याहू की सत्ता में वापसी का समर्थन करते हुए तर्क दिया कि देश को ऐसे नेतृत्व की ज़रूरत है जो सुरक्षा खतरों को गहराई से समझे। उन्होंने कहा, 'हम यहाँ नोवा स्थल पर हैं, जहाँ 378 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। वे जीवन का जश्न मनाने के लिए आए थे। हमें ऐसे नेता की ज़रूरत है जो यह समझे कि हमारा दुश्मन कौन है।' उन्होंने आरोप लगाया कि इजरायल के विरोधियों को बचपन से ही हिंसा के लिए तैयार किया जाता है।
भारत-इजरायल संबंधों का संदर्भ
गौरतलब है कि भारत और इजरायल के बीच राजनयिक संबंध 1992 में औपचारिक रूप से स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, कृषि और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग लगातार विस्तारित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2017 में इजरायल यात्रा ऐतिहासिक मानी जाती है, क्योंकि वे ऐसे पहले भारतीय प्रधानमंत्री थे जिन्होंने इजरायल का दौरा किया।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। नई दिल्ली की इजरायल के साथ संबंध मज़बूत करने की प्रतिबद्धता वहाँ के चुनावी नतीजों से इतर, रणनीतिक साझेदारी को दीर्घकालिक आधार पर आगे बढ़ाने के इरादे को दर्शाती है।
आगे क्या
अंतिम चुनावी नतीजों के बाद इजरायल में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। भारतीय विदेश मंत्रालय के संकेतों के अनुसार, नई सरकार के साथ भी द्विपक्षीय सहयोग जारी रहेगा। विश्लेषकों का मानना है कि रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग दोनों देशों की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ बने रहेंगे।