इजरायल चुनाव 2026: नेतन्याहू को पूर्व आईडीएफ प्रमुख आइसेनकोट समेत पाँच प्रबल चुनौतियाँ
सारांश
मुख्य बातें
यरूशलेम में मंगलवार, 26 अक्टूबर 2026 को होने वाले इजरायल के संसदीय चुनाव से पहले मौजूदा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कई मज़बूत विपक्षी नेताओं की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इनमें इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइसेनकोट, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट, यायर लापिड, एविग्डोर लिबरमैन और यायर गोलान प्रमुख हैं। यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए नरसंहार के बाद देश का पहला आम चुनाव है।
मुख्य घटनाक्रम
नेतन्याहू और उनकी पार्टी लिकुड हमास, हिजबुल्लाह और ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में मिली सफलताओं को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। वे खुद को इजरायल की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कुशलता से सँभालने में सक्षम एकमात्र नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। हालाँकि आलोचकों का कहना है कि 7 अक्टूबर 2023 के हमले ने उनकी सरकार के दौरान हुई गंभीर सुरक्षा चूक को उजागर किया था।
गौरतलब है कि यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब देश में हमले की जिम्मेदारी तय करने, सैन्य सेवा के बोझ के न्यायसंगत वितरण, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और न्यायपालिका की स्वायत्तता जैसे मुद्दों पर गहरी राजनीतिक बहस जारी है।
प्रमुख विपक्षी दावेदार
आईडीएफ के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ गादी आइसेनकोट अपनी नई पार्टी याशार के ज़रिये नेतन्याहू के सबसे मज़बूत प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं। उनकी पार्टी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ-साथ सार्वजनिक विश्वास को बहाल करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने का वादा करती है।
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड ने मिलकर बेयाखाद पार्टी के नाम से गठबंधन बनाया है, जो दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रहा है। इनके एजेंडे में राष्ट्रीय सुरक्षा को मज़बूत करना, अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के पुरुषों को सेना और कार्यबल में शामिल करना, रिज़र्व सैनिकों का समर्थन और संवैधानिक ढाँचे में सुधार शामिल हैं।
एविग्डोर लिबरमैन की यिसराइल बेइतेनु पार्टी कड़ी सुरक्षा नीतियों और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का समर्थन करती है। पहले यह पार्टी मुख्यतः पूर्व सोवियत संघ से आए प्रवासियों में लोकप्रिय थी, लेकिन अब वह उन मतदाताओं तक पहुँचने की कोशिश कर रही है जो सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा और सार्वजनिक जीवन में धर्म के कम हस्तक्षेप की माँग करते हैं।
यायर गोलान की डेमोक्रेटिक पार्टी फिलिस्तीनी भूमि के कब्जे (एनेक्सेशन) का विरोध करती है और इजरायल-फिलिस्तीन विवाद का कूटनीतिक समाधान तलाशने के साथ क्षेत्रीय मध्यमार्गी साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की वकालत करती है।
सर्वेक्षण और गठबंधन की संभावनाएँ
'द यरूशलेम पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश सर्वेक्षणों में नेतन्याहू विरोधी खेमे को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है, लेकिन बदलाव चाहने वाले ज़ियोनिस्ट दल अपने मौजूदा समझौतों के आधार पर सरकार बनाने के लिए ज़रूरी बहुमत से अभी पीछे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी खेमे में अल्पमत सरकार बनाने की संभावना पर चर्चा है, हालाँकि लिबरमैन और बेनेट इस विचार के विरोध में हैं। इसके अतिरिक्त, कई दलों के बीच मौजूदा संसद अध्यक्ष अमीर ओहाना को हटाने को लेकर सहमति बनती दिख रही है।
आम जनता पर असर और ऐतिहासिक संदर्भ
यह चुनाव इजरायल के इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमले के लगभग तीन वर्ष बाद हो रहा है। मतदाता न केवल नेतन्याहू और उनके प्रतिद्वंद्वियों का राजनीतिक भविष्य तय करेंगे, बल्कि इजरायल की आंतरिक नीति, क्षेत्रीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा भी निर्धारित करेंगे।
कई विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के परिणाम मध्य-पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं। चुनाव परिणाम अगले कुछ घंटों में स्पष्ट होने की उम्मीद है।