नेतन्याहू की कड़ी चेतावनी: 'दुश्मन आजमाएँ तो पहले से भी भीषण प्रहार होगा', इजरायली वायुसेना का दौरा किया
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को अपने विरोधियों को एक तीखी चेतावनी दी — यदि किसी ने इजरायल को 'आज़माने' की कोशिश की, तो उन्हें पहले से कहीं अधिक कड़ा जवाब मिलेगा। नेतन्याहू ने यह बयान इजरायली वायुसेना के एक अज्ञात एयरबेस के दौरे के दौरान दिया, जहाँ उन्होंने सैन्य तैयारियों का जायज़ा लिया।
वायुसेना बेस पर क्या बोले नेतन्याहू
एयरबेस के दौरे के दौरान नेतन्याहू ने कहा, 'मैंने एयरबेस के कमांडर से बातचीत की और जरूरत पड़ने पर दुश्मनों पर हमला करने के लिए वायुसेना की तैयारियों, दृढ़ संकल्प और क्षमता का जायज़ा लिया।' उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए सीधे चेतावनी दी: 'हमें मत आज़माओ। तुम्हें अब तक झेले गए हमलों से भी अधिक कड़े प्रहार सहने पड़ेंगे।'
नेतन्याहू ने इजरायल की सैन्य उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और इजरायल रक्षा बलों (IDF) के पायलटों, वायुसेना कर्मियों तथा ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की प्रशंसा की। उन्होंने दोहराया कि इजरायल अपनी रक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
ईरान पर क्या है नेतन्याहू का रुख
हाल ही में फॉक्स न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में नेतन्याहू ने कहा कि ईरान तेज़ी से अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों का विकास कर रहा है। उनके अनुसार ईरान का असली निशाना इजरायल नहीं, बल्कि अमेरिका है। नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान अमेरिकी शहरों पर हमले के उद्देश्य से परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश में है।
गौरतलब है कि इजरायल और ईरान के बीच तनाव पिछले कई महीनों से चरम पर है, और नेतन्याहू का यह बयान उसी पृष्ठभूमि में आया है।
चुनावी पृष्ठभूमि में आया बयान
यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इजरायल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनावों के लिए मतदान होना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नेतन्याहू की इस तरह की सख्त भाषा को चुनावी रणनीति के रूप में भी देखा जा सकता है, हालाँकि यह देखना होगा कि मतदाताओं पर इसका क्या असर पड़ता है।
इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के समर्थन में ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में उन्हें 'मज़बूत, बहादुर और शानदार' नेता बताया और कहा कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में नेतन्याहू अमेरिका के मज़बूत साझेदार रहे हैं।
क्षेत्रीय तनाव और व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव अपने उच्चतम स्तर पर बना हुआ है। नेतन्याहू के इस बयान को मध्य-पूर्व में इजरायल की आक्रामक रक्षा-नीति के एक और संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
आने वाले दिनों में संसदीय चुनावों के नतीजे यह तय करेंगे कि नेतन्याहू और उनकी नीतियाँ इजरायल की राजनीति में अपनी पकड़ बनाए रख पाते हैं या नहीं।