इजरायल में संसदीय चुनाव: 73 लाख मतदाता आज करेंगे मतदान, नेतन्याहू बनाम आइजनकोट की कड़ी टक्कर
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है, जिसमें 73 लाख पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इनमें 5 लाख से अधिक युवा पहली बार वोट डालने वाले हैं। यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के बाद शुरू हुए तीन वर्षों के क्षेत्रीय युद्ध की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जिसने इजरायली समाज और राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है।
मुख्य मुकाबला: नेतन्याहू बनाम आइजनकोट
इस चुनाव में सबसे तीखा मुकाबला वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व सेना प्रमुख गाडी आइजनकोट के बीच है। दिलचस्प यह है कि दोनों नेताओं ने युद्ध में अपने प्रियजन खोए हैं। नेतन्याहू के भाई योनातन नेतन्याहू 1976 में युगांडा के एंटेबे में बंधकों को छुड़ाने के ऑपरेशन में शहीद हो गए थे, जबकि आइजनकोट ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों में अपना बेटा खोया। दोनों की यह व्यक्तिगत पीड़ा इस चुनावी लड़ाई को एक असाधारण भावनात्मक आयाम देती है।
ओपिनियन पोल और गठबंधन की स्थिति
मतदान से पहले आए सर्वेक्षणों के अनुसार, छह में से चार ओपिनियन पोल में आइजनकोट गठबंधन को अधिक सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं, नेतन्याहू गठबंधन को एक पोल में बढ़त और दूसरे में संभावित बहुमत मिलता दिखाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब इजरायली नागरिक युद्ध की थकान और आंतरिक राजनीतिक तनाव दोनों से जूझ रहे हैं।
इजरायली चुनाव प्रणाली की विशेषताएँ
इजरायली संसद (नेसेट) में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का बहुमत ज़रूरी है। भारत में इजरायली दूतावास की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा ने बताया कि इजरायल में मतदाता किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि पार्टी को वोट देते हैं। प्रत्येक दल चुनाव से पहले अपने उम्मीदवारों की एक सूची तैयार करता है और देशभर में पार्टी को मिले वोटों के अनुपात में संसदीय सीटें तय होती हैं।
गौरतलब है कि इजरायल के 76 वर्षों के इतिहास में किसी भी एकल राजनीतिक दल ने अपने बूते बहुमत हासिल नहीं किया है, जो गठबंधन राजनीति को यहाँ की स्थायी नियति बनाता है। इसके अलावा, किसी भी दल को संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए कुल वैध मतों का कम से कम 3.25 प्रतिशत हासिल करना अनिवार्य है।
सरकार गठन की प्रक्रिया
मतगणना के बाद राष्ट्रपति तय करेंगे कि किस पार्टी को गठबंधन बनाने का पहला अवसर दिया जाए। चुने गए नेता के पास गठबंधन सहयोगियों को एकजुट करने के लिए 28 दिन का समय होगा। यदि वह सफल नहीं हो पाते, तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को यह मौका मिलेगा। अगर तब भी सरकार नहीं बन पाती, तो 90 दिनों के भीतर पुनर्मतदान होगा।
मतदाताओं के लिए प्रमुख मुद्दे
इस चुनाव में इजरायली नागरिकों के लिए आंतरिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके साथ ही हरेदी (अति-रूढ़िवादी यहूदी) समुदायों को अनिवार्य सैन्य सेवा से मिली विशेष छूट का मुद्दा भी तीखी बहस का विषय रहा है। यह चुनाव तीन साल के युद्ध और उससे उपजी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के बीच इजरायली लोकतंत्र की दिशा तय करेगा। मतगणना के नतीजे यह बताएँगे कि जनता युद्धकालीन नेतृत्व को जारी रखना चाहती है या बदलाव की ओर देख रही है।