27 अक्टूबर 2026
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इजरायल में संसदीय चुनाव: 73 लाख मतदाता आज करेंगे मतदान, नेतन्याहू बनाम आइजनकोट की कड़ी टक्कर

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इजरायल में संसदीय चुनाव: 73 लाख मतदाता आज करेंगे मतदान, नेतन्याहू बनाम आइजनकोट की कड़ी टक्कर

सारांश

युद्ध की छाया में इजरायल आज इतिहास का एक और नाज़ुक मोड़ तय करेगा। 73 लाख मतदाता तय करेंगे कि नेतन्याहू की कमान जारी रहेगी या पूर्व सेना प्रमुख आइजनकोट को सत्ता सौंपी जाएगी — दोनों ने जंग में अपने प्रियजन खोए हैं, और दोनों 120 सीटों की नेसेट में 61 का जादुई आँकड़ा पाने की दौड़ में हैं।

मुख्य बातें

इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय (नेसेट) चुनाव के लिए मतदान शुरू; 73 लाख पंजीकृत मतदाता।
5 लाख से अधिक युवा पहली बार अपना वोट डालेंगे।
मुख्य मुकाबला: प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू बनाम पूर्व सेना प्रमुख गाडी आइजनकोट ।
छह में से चार ओपिनियन पोल में आइजनकोट गठबंधन को बढ़त।
नेसेट में कुल 120 सीटें ; बहुमत के लिए 61 सीटें ज़रूरी; 3.25% थ्रेशोल्ड अनिवार्य।
सरकार गठन के लिए राष्ट्रपति द्वारा चुने नेता को 28 दिन ; विफलता पर 90 दिनों में पुनर्मतदान।

इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू हो गया है, जिसमें 73 लाख पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इनमें 5 लाख से अधिक युवा पहली बार वोट डालने वाले हैं। यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के बाद शुरू हुए तीन वर्षों के क्षेत्रीय युद्ध की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जिसने इजरायली समाज और राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है।

मुख्य मुकाबला: नेतन्याहू बनाम आइजनकोट

इस चुनाव में सबसे तीखा मुकाबला वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व सेना प्रमुख गाडी आइजनकोट के बीच है। दिलचस्प यह है कि दोनों नेताओं ने युद्ध में अपने प्रियजन खोए हैं। नेतन्याहू के भाई योनातन नेतन्याहू 1976 में युगांडा के एंटेबे में बंधकों को छुड़ाने के ऑपरेशन में शहीद हो गए थे, जबकि आइजनकोट ने 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमलों में अपना बेटा खोया। दोनों की यह व्यक्तिगत पीड़ा इस चुनावी लड़ाई को एक असाधारण भावनात्मक आयाम देती है।

ओपिनियन पोल और गठबंधन की स्थिति

मतदान से पहले आए सर्वेक्षणों के अनुसार, छह में से चार ओपिनियन पोल में आइजनकोट गठबंधन को अधिक सीटें मिलती दिख रही हैं। वहीं, नेतन्याहू गठबंधन को एक पोल में बढ़त और दूसरे में संभावित बहुमत मिलता दिखाया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब इजरायली नागरिक युद्ध की थकान और आंतरिक राजनीतिक तनाव दोनों से जूझ रहे हैं।

इजरायली चुनाव प्रणाली की विशेषताएँ

इजरायली संसद (नेसेट) में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का बहुमत ज़रूरी है। भारत में इजरायली दूतावास की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा ने बताया कि इजरायल में मतदाता किसी व्यक्ति को नहीं, बल्कि पार्टी को वोट देते हैं। प्रत्येक दल चुनाव से पहले अपने उम्मीदवारों की एक सूची तैयार करता है और देशभर में पार्टी को मिले वोटों के अनुपात में संसदीय सीटें तय होती हैं।

गौरतलब है कि इजरायल के 76 वर्षों के इतिहास में किसी भी एकल राजनीतिक दल ने अपने बूते बहुमत हासिल नहीं किया है, जो गठबंधन राजनीति को यहाँ की स्थायी नियति बनाता है। इसके अलावा, किसी भी दल को संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए कुल वैध मतों का कम से कम 3.25 प्रतिशत हासिल करना अनिवार्य है।

सरकार गठन की प्रक्रिया

मतगणना के बाद राष्ट्रपति तय करेंगे कि किस पार्टी को गठबंधन बनाने का पहला अवसर दिया जाए। चुने गए नेता के पास गठबंधन सहयोगियों को एकजुट करने के लिए 28 दिन का समय होगा। यदि वह सफल नहीं हो पाते, तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को यह मौका मिलेगा। अगर तब भी सरकार नहीं बन पाती, तो 90 दिनों के भीतर पुनर्मतदान होगा।

मतदाताओं के लिए प्रमुख मुद्दे

इस चुनाव में इजरायली नागरिकों के लिए आंतरिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके साथ ही हरेदी (अति-रूढ़िवादी यहूदी) समुदायों को अनिवार्य सैन्य सेवा से मिली विशेष छूट का मुद्दा भी तीखी बहस का विषय रहा है। यह चुनाव तीन साल के युद्ध और उससे उपजी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के बीच इजरायली लोकतंत्र की दिशा तय करेगा। मतगणना के नतीजे यह बताएँगे कि जनता युद्धकालीन नेतृत्व को जारी रखना चाहती है या बदलाव की ओर देख रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नया चेहरा' में विश्वास खोज रहे हैं — लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि इजरायल के 76 वर्षों में गठबंधन राजनीति ने हर बड़े जनादेश को कमज़ोर किया है। जो भी जीते, असली परीक्षा युद्धविराम की दिशा, बंधकों की वापसी और हरेदी समुदाय के सैन्य-छूट विवाद से निपटने में होगी।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इजरायल में आज के संसदीय चुनाव में मुख्य मुकाबला किनके बीच है?
मुख्य मुकाबला वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व सेना प्रमुख गाडी आइजनकोट के बीच है। छह में से चार ओपिनियन पोल में आइजनकोट गठबंधन को अधिक सीटें मिलती दिख रही हैं।
इजरायल की नेसेट में सरकार बनाने के लिए कितनी सीटें चाहिए?
इजरायली संसद (नेसेट) में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का बहुमत आवश्यक है। इजरायल के 76 वर्षों के इतिहास में किसी एकल दल ने अपने दम पर बहुमत नहीं पाया है।
इजरायल में चुनाव के बाद सरकार कैसे बनती है?
मतगणना के बाद राष्ट्रपति तय करते हैं कि किस पार्टी को गठबंधन बनाने का पहला मौका मिले। उस नेता के पास 28 दिन होते हैं; विफल होने पर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को अवसर मिलता है, और फिर भी सरकार न बनने पर 90 दिनों के भीतर पुनर्मतदान होता है।
इजरायल में किसी पार्टी को संसद में सीट पाने के लिए कितने वोट चाहिए?
इजरायल में किसी भी दल को नेसेट में प्रतिनिधित्व पाने के लिए कुल वैध मतों का कम से कम 3.25 प्रतिशत हासिल करना अनिवार्य है। इससे कम वोट पर दल को एक भी सीट नहीं मिलती।
इजरायल के इस चुनाव में मतदाताओं के लिए प्रमुख मुद्दे कौन से हैं?
7 अक्टूबर 2023 के बाद शुरू हुए तीन साल के क्षेत्रीय युद्ध की पृष्ठभूमि में आंतरिक सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। इसके अलावा हरेदी (अति-रूढ़िवादी यहूदी) समुदायों को अनिवार्य सैन्य सेवा से मिली विशेष छूट का विवाद भी मतदाताओं के लिए अहम है।
राष्ट्र प्रेस
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