इजरायल चुनाव 27 अक्टूबर: 73 लाख मतदाता चुनेंगे 120 सदस्यीय कनेसेट के प्रतिनिधि
सारांश
मुख्य बातें
इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव आयोजित हो रहे हैं, जिसमें लगभग 73 लाख योग्य मतदाता देश की 120 सदस्यीय संसद (कनेसेट) के प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। तीन वर्षों के सशस्त्र संघर्ष की पृष्ठभूमि में हो रहे इस चुनाव को इजरायल के हालिया इतिहास के सबसे निर्णायक चुनावों में से एक माना जा रहा है।
चुनाव प्रक्रिया और मतदान प्रणाली
भारत में इजरायल दूतावास की प्रवक्ता मिशेल सिरोटा ने बताया कि इजरायल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू है — जिस पार्टी को जितने वोट मिलते हैं, उसी अनुपात में उसे कनेसेट में सीटें मिलती हैं। उन्होंने कहा, 'आप सबसे बड़ी पार्टी को वोट दे सकते हैं या किसी भी अन्य पार्टी को। किसी पार्टी को जितनी सीटें मिलती हैं, उसी के आधार पर वह उतने प्रतिनिधि संसद में भेज सकती है, चाहे वे सत्तारूढ़ गठबंधन में हों या विपक्ष में।'
सिरोटा ने इस चुनाव को इजरायल के 'जीवंत लोकतंत्र' का प्रमाण बताया और कहा कि मतदाता अगले चार वर्षों के लिए देश की दिशा तय करेंगे।
सरकार गठन की प्रक्रिया
मतगणना के बाद इजरायल के राष्ट्रपति तय करेंगे कि किस पार्टी को पहले सरकार बनाने का अवसर दिया जाएगा। उस पार्टी के पास गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन का समय होगा। यदि वह इस अवधि में सफल नहीं होती, तो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी को यह मौका मिलेगा। मिशेल सिरोटा के अनुसार, यदि दूसरा प्रयास भी विफल रहा, तो 90 दिनों के भीतर नए सिरे से चुनाव कराए जा सकते हैं।
सर्वेक्षण: त्रिशंकु नतीजों की आशंका
वरिष्ठ इजरायली पत्रकार यारोन डेसेल के अनुसार, मौजूदा जनमत सर्वेक्षणों में किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा। उन्होंने तीन संभावित परिदृश्य गिनाए — पहला, दोबारा चुनाव; दूसरा, बड़े दलों की राष्ट्रीय एकता सरकार; और तीसरा, नेतन्याहू विरोधी दलों की अल्पमत सरकार। डेसेल ने कहा, 'विपक्ष किसी तरह मौजूदा सरकार को बदलना चाहता है।'
यह ऐसे समय में आया है जब इजरायल तीन साल के युद्ध के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता की तलाश में है। गौरतलब है कि इजरायल में बार-बार होने वाले चुनाव कोई नई बात नहीं — पिछले कुछ वर्षों में देश में कई दफा संसदीय चुनाव हो चुके हैं, क्योंकि स्थायी गठबंधन बनाना चुनौतीपूर्ण रहा है।
आम नागरिकों की प्रमुख चिंताएँ
इजरायली नागरिकों ने संकेत दिया कि इस चुनाव में राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। एक नागरिक ने कहा, 'तीन साल के युद्ध के बाद अब हम सभी शांति चाहते हैं।' एक अन्य नागरिक ने कहा, 'नतीजे कुछ भी हों, हमें एक साथ रहना होगा। कौन-सी सरकार आती है, उससे ज़्यादा ज़रूरी है कि देश एकजुट रहे।'
क्या होगा आगे
चुनाव परिणाम आने के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, त्रिशंकु नतीजों की स्थिति में गठबंधन वार्ता लंबी खिंच सकती है। राष्ट्रीय सुरक्षा, युद्ध के बाद की नीतियाँ और राजनीतिक स्थिरता — ये तीन मुद्दे अगली सरकार की प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर होंगे।