26 अक्टूबर 2026
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मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए महाराष्ट्र सरकार की 25 वर्षीय जल सुरक्षा योजना, 2051 तक का रोडमैप तैयार

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मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए महाराष्ट्र सरकार की 25 वर्षीय जल सुरक्षा योजना, 2051 तक का रोडमैप तैयार

सारांश

मुंबई महानगर क्षेत्र में बढ़ती आबादी और जलवायु जोखिमों के बीच महाराष्ट्र सरकार ने 25 वर्षीय जल सुरक्षा रोडमैप बनाने की शुरुआत की है। BMC, MMRDA, MIDC समेत कई एजेंसियों को जोड़कर बना यह पैनल सिर्फ बाँध नहीं, बल्कि पुनर्चक्रण और जलवायु अनुकूलन पर भी ध्यान देगा।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के लिए 25 वर्षीय जल प्रबंधन योजना तैयार करने हेतु उच्च स्तरीय अध्ययन समूह का गठन किया।
समूह की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त सचिव संजय बेलसारे कर रहे हैं।
पैनल को तीन महीने के भीतर रूपरेखा प्रस्तुत करनी है; माँग का आकलन 2031, 2041 और 2051 की समय-सीमाओं के लिए किया जाएगा।
BMC, MMRDA, MIDC, MJP, MRSAC सहित प्रमुख एजेंसियों के प्रतिनिधि समूह में शामिल हैं।
योजना में बाँध निर्माण के अलावा अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और NRW में कमी पर ज़ोर दिया गया है।
अंतिम रिपोर्ट में एकीकृत जल सुरक्षा योजना 2051 के साथ पूंजीगत व्यय और वित्तपोषण तंत्र का विवरण होगा।

महाराष्ट्र सरकार ने 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) के लिए एक व्यापक 25 वर्षीय जल प्रबंधन योजना का मसौदा तैयार करने हेतु उच्च स्तरीय अध्ययन समूह का गठन किया है। जल संसाधन विभाग द्वारा जारी सरकारी संकल्प (GR) के ज़रिए इस विशेषज्ञ पैनल को तीन महीने के भीतर एक व्यावहारिक रूपरेखा प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब MMR में जनसंख्या वृद्धि, वाणिज्यिक विस्तार और बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के कारण पानी की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।

अध्ययन समूह की संरचना और नेतृत्व

नवगठित अध्ययन समूह की अध्यक्षता जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त सचिव संजय बेलसारे कर रहे हैं। विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों में अंतर-एजेंसी समन्वय सुनिश्चित करने के लिए पैनल में प्रमुख शहरी और क्षेत्रीय प्राधिकरणों के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं।

इस समूह में कोंकण क्षेत्र के मुख्य अभियंता (सदस्य सचिव), बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) के अतिरिक्त आयुक्त, ठाणे, नवी मुंबई और कल्याण-डोम्बिवली के आयुक्त तथा महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC), महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण (MJP) और महाराष्ट्र रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (MRSAC) के प्रतिनिधि शामिल हैं।

कार्यक्षेत्र और माँग का आकलन

अध्ययन समूह घरेलू, औद्योगिक, वाणिज्यिक, संस्थागत और निर्माण क्षेत्रों में एकीकृत ऑडिट करेगा, ताकि 2031, 2041 और 2051 — तीन प्रमुख समय-सीमाओं के लिए सटीक माँग अनुमान स्थापित किए जा सकें। वर्तमान में MMR राज्य के बाँधों और नगर निगमों के जल स्रोतों के मिश्रित नेटवर्क पर निर्भर है; सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह खंडित प्रबंधन अब व्यवहार्य नहीं रहा।

गौरतलब है कि अध्ययन समूह का दायरा बाँध निर्माण के पारंपरिक समाधानों से परे है। पैनल पुनर्चक्रित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जल निकायों के पारिस्थितिक पुनरुद्धार का मूल्यांकन करेगा। साथ ही, गैर-राजस्व जल (NRW) को कम करने, वितरण रिसाव दूर करने और मीटरिंग प्रणालियों के आधुनिकीकरण के लिए सख्त उपायों की सिफारिश भी इसके दायरे में है।

जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों का आकलन

समूह मानसून चक्र में परिवर्तन, अनियमित अत्यधिक वर्षा, लंबे समय तक सूखे और तटीय जलभंडारों पर बढ़ते समुद्री जल के प्रभाव से जुड़ी कमज़ोरियों का भी विस्तृत आकलन करेगा। यह पहलू इस योजना को पिछली जल परियोजनाओं से अलग करता है, जो मुख्यतः आपूर्ति-पक्ष के समाधानों तक सीमित रहती थीं।

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई महानगरों — विशेषतः चेन्नई और बेंगलुरु — में पानी की गंभीर कमी की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं और जलवायु-प्रेरित जल संकट राष्ट्रीय नीति-विमर्श में केंद्र में आ गया है।

अंतिम रिपोर्ट में क्या होगा

पैनल की अंतिम रिपोर्ट में एकीकृत जल सुरक्षा योजना 2051 प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें प्राथमिकता वाली अवसंरचना परियोजनाओं, अनुमानित पूंजीगत व्यय, कार्यान्वयन समयसीमा, वित्तपोषण तंत्र और स्पष्ट अंतर-विभागीय जिम्मेदारियों का विवरण शामिल होगा। पैनल पूर्ण हो चुकी, चल रही और प्रस्तावित जल आपूर्ति परियोजनाओं की समीक्षा कर अनुमानित स्थानीय कमियों के मुकाबले कुल सुनिश्चित उपज की गणना भी करेगा।

जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीली और स्पष्ट जल रणनीति तैयार कर राज्य का लक्ष्य अगले पच्चीस वर्षों तक पूरे MMR में आर्थिक स्थिरता और निर्बाध जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा रिपोर्ट के बाद शुरू होती है — जब सिफारिशें बजट आवंटन और राजनीतिक इच्छाशक्ति से टकराती हैं। चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहरों ने दिखाया है कि दशकों की जल-नीति दस्तावेज़बाज़ी के बावजूद संकट आया। MMR की खंडित बहु-एजेंसी संरचना — जिसमें BMC, MMRDA, MIDC और नगर निगम अलग-अलग काम करते हैं — ही वह असली बाधा है जिसे यह पैनल हल करने का दावा करता है। जब तक अंतर-विभागीय जिम्मेदारियाँ कानूनी बाध्यता के साथ नहीं आतीं, 'एकीकृत योजना' महज़ एक और रिपोर्ट बनकर रह जाने का जोखिम है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार की MMR जल प्रबंधन योजना क्या है?
यह मुंबई महानगर क्षेत्र के लिए 25 वर्षीय जल सुरक्षा रोडमैप है, जिसे तैयार करने हेतु महाराष्ट्र के जल संसाधन विभाग ने एक उच्च स्तरीय अध्ययन समूह गठित किया है। इस योजना का उद्देश्य 2051 तक क्षेत्र की बढ़ती जल माँग को टिकाऊ तरीके से पूरा करना है।
अध्ययन समूह कब तक अपनी रिपोर्ट देगा?
जल संसाधन विभाग के सरकारी संकल्प (GR) के अनुसार पैनल को तीन महीने के भीतर व्यावहारिक रूपरेखा प्रस्तुत करनी है। अंतिम रिपोर्ट में 2031, 2041 और 2051 की समय-सीमाओं के लिए माँग अनुमान और पूंजीगत व्यय का विवरण होगा।
इस अध्ययन समूह में कौन-कौन शामिल है?
समूह की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सचिव संजय बेलसारे कर रहे हैं। इसमें BMC, MMRDA, MIDC, MJP, MRSAC के प्रतिनिधि और ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोम्बिवली के नगर आयुक्त शामिल हैं।
यह योजना पुरानी जल परियोजनाओं से अलग कैसे है?
पुरानी योजनाएँ मुख्यतः बाँध निर्माण पर केंद्रित थीं, जबकि यह रोडमैप अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और गैर-राजस्व जल (NRW) में कमी जैसे टिकाऊ समाधानों पर भी ज़ोर देता है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का आकलन भी इसके दायरे में शामिल है।
मुंबई महानगर क्षेत्र में जल संकट क्यों बढ़ रहा है?
MMR में जनसंख्या वृद्धि, वाणिज्यिक विस्तार और बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के कारण पानी की माँग तेज़ी से बढ़ रही है। सरकार के अनुसार, वर्तमान खंडित बहु-एजेंसी प्रबंधन प्रणाली भविष्य की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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