महाराष्ट्र में 16 अक्टूबर से 10% पानी की अनिवार्य कटौती, अल नीनो की वजह से 265 तालुकों में सूखे जैसे हालात
सारांश
मुख्य बातें
अल नीनो के कारण हुई बारिश की भारी कमी के मद्देनज़र महाराष्ट्र सरकार ने 5 अक्टूबर 2026 को राज्य के सभी शहरी स्थानीय निकायों में 16 अक्टूबर 2026 से 10 प्रतिशत पानी की अनिवार्य कटौती लागू करने का निर्देश जारी किया। जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने यह आदेश तब दिया जब जल संसाधन विभाग ने जलाशय स्तरों का विश्लेषण करके यह निर्धारित किया कि उपलब्ध जल भंडार को 31 अगस्त 2027 तक सुरक्षित रखना ज़रूरी है।
मुख्य घटनाक्रम
खरीफ सीजन में 'ट्रिगर-1' लागू होने के बाद राज्य के 265 तालुकों में पहले ही सूखे जैसे हालात घोषित किए जा चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में मानसून की अनियमितता चर्चा का विषय बनी हुई है। अल नीनो के प्रभाव से कई जलाशयों में जल-भराव औसत से काफी नीचे रहा, जिसने प्रशासन को अग्रिम कदम उठाने पर मजबूर किया।
मंत्री महाजन ने स्पष्ट किया कि पानी के आवंटन की गणना में वाष्पीकरण, गाद जमाव और अनधिकृत जल दोहन जैसे कारकों को ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि पीने का पानी सर्वोच्च प्राथमिकता है और मानव व पशुधन की ज़रूरतें पूरी होने के बाद ही कृषि के लिए जल आपूर्ति की जाएगी।
निकायों को दिए गए निर्देश
सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और ग्राम पंचायतों को 16 अक्टूबर से पानी की खपत में 10 प्रतिशत की कटौती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही स्थानीय निकायों को लीकेज रोकने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को पूर्ण क्षमता पर संचालित करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है। उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग केवल बागवानी, निर्माण और धुलाई जैसे कार्यों तक सीमित रखने का आदेश दिया गया है।
गौरतलब है कि प्रत्येक बाँध में 10 प्रतिशत आपातकालीन बफर रिज़र्व बनाए रखना अनिवार्य किया गया है। अत्यधिक आवश्यकता पड़ने पर डेड स्टोरेज रिज़र्व का तकनीकी मूल्यांकन कर उसके उपयोग पर विचार किया जाएगा।
कृषि क्षेत्र पर असर
सिंचाई के लिए जल आपूर्ति में रबी (सर्दियों के अनाज) और चारे की फसलों को सर्वप्रथम प्राथमिकता दी जाएगी, उसके बाद अन्य रबी फसलों को। बारहमासी फसलों को जल-आपूर्ति की अनुमति केवल तब मिलेगी जब अतिरिक्त जल भंडार उपलब्ध हों। माइक्रो-इरिगेशन और जल-संरक्षण तकनीकों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिए जाने की भी घोषणा की गई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
जल प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि अग्रिम कटौती का निर्णय सही दिशा में उठाया गया कदम है, क्योंकि अक्टूबर-नवंबर से जलाशयों में भराव रुक जाता है और अगले मानसून तक नई आपूर्ति का कोई स्रोत नहीं होता। आलोचकों का कहना है कि शहरी वितरण व्यवस्था में 30-40 प्रतिशत तक पानी रिसाव के कारण बर्बाद होता है — यदि लीकेज पर नियंत्रण हो, तो कटौती की नौबत ही न आए।
क्या होगा आगे
सरकार की नज़र अगले कुछ हफ्तों में जलाशय स्तरों की निगरानी पर होगी। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो कटौती का प्रतिशत बढ़ाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राज्य के लिए असली परीक्षा यह होगी कि स्थानीय निकाय इस आदेश का पालन कितनी सक्रियता से करते हैं।