महाराष्ट्र जल संकट: गुलाबराव पाटिल का 25 अक्टूबर तक गांववार कार्ययोजना जमा करने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटिल ने नागपुर, अमरावती और कोंकण संभागों में आगामी जल संकट से निपटने के लिए प्रशासन को 25 अक्टूबर 2026 तक गांववार कार्ययोजना तैयार कर जमा करने का सख्त निर्देश दिया है। राज्य पहले ही कम बारिश के चलते 304 तालुकाओं में सूखे की घोषणा कर चुका है, और स्थिति को देखते हुए सरकार ने 12 राहत उपाय भी लागू किए हैं।
उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिए गए फैसले
एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री पाटिल ने तीनों संभागों में जलापूर्ति की मौजूदा स्थिति, भूजल स्तर और संभावित जल संकट से निपटने के उपायों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल इन क्षेत्रों में पानी की गंभीर कमी नहीं है, परंतु आने वाले महीनों की चुनौतियों को देखते हुए पूर्व-तैयारी अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'प्रशासन को सक्रिय रहना चाहिए। कार्ययोजनाएं जमीनी निरीक्षण और जनप्रतिनिधियों, सरपंचों, ग्राम पंचायतों तथा स्थानीय अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के आधार पर तैयार की जानी चाहिए।'
जल जीवन मिशन परियोजनाओं को प्राथमिकता
मंत्री ने जल जीवन मिशन के तहत 75 से 99 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने और चालू करने का निर्देश दिया। पाइपलाइन बिछाने, पंप स्थापना, बिजली कनेक्शन और ट्रांसफॉर्मर लगाने जैसे लंबित कार्यों को तत्काल पूरा करने को कहा गया। 75 प्रतिशत से अधिक पूरी हो चुकी योजनाओं के पैकेज विवरण का तत्काल सत्यापन और प्रमाणीकरण करने का भी आदेश दिया गया, ताकि धनराशि जारी करने की प्रक्रिया बाधा-मुक्त हो सके।
भूजल पुनर्भरण और स्थानीय जल स्रोतों को मजबूती
टैंकरों पर निर्भर रहने की आशंका वाले गांवों के लिए स्थानीय जल स्रोतों को मजबूत करने हेतु अलग कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया गया। मंत्री ने कहा कि जिला योजना समिति (डीपीसी) के 2 प्रतिशत फंड का उपयोग मुख्यतः जल स्रोतों की क्षमता बढ़ाने में हो। इसके अलावा जिला योजना, खनन और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के फंड से भूजल पुनर्भरण कार्य — जैसे कुओं का पुनर्भरण, खेत तालाब निर्माण, सीमेंट बांध, सीमेंट प्लग, कंटीन्यूअस कंटूर ट्रेंच (CCT) और पुराने बांधों की मरम्मत — करने के निर्देश दिए गए।
टैंकर अंतिम विकल्प, शिकायत पर तत्काल दौरा अनिवार्य
पाटिल ने दोहराया कि पानी के टैंकरों की तैनाती अंतिम उपाय के रूप में ही होनी चाहिए। इससे पहले उपलब्ध सार्वजनिक कुओं की सफाई और कीटाणुशोधन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि जल संकट से संबंधित कोई भी शिकायत मिलने या मीडिया में खबर आने पर संबंधित गांव का तत्काल दौरा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में हर वर्ष अप्रैल-मई में टैंकर संकट गहराता है और इस बार कम मानसून के चलते स्थिति जल्दी गंभीर होने की आशंका है।
दीर्घकालिक संचालन और जवाबदेही
दीर्घकालिक दृष्टि से मंत्री ने निर्देश दिया कि पूरी हो चुकी और सफलतापूर्वक परीक्षण की गई जलापूर्ति योजनाओं को जिला परिषदों या ग्राम पंचायतों को सौंपने की निश्चित समयसीमा तय की जाए। देरी होने पर राज्य नीति के दिशा-निर्देशों के अनुसार औपचारिक कार्रवाई की जाएगी। ट्रांसफॉर्मर और बिजली कनेक्शन की समस्याओं के लिए स्थानीय अधिकारियों को जिला कलेक्टरों और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) से सीधे समन्वय करने की सलाह दी गई। आने वाले हफ्तों में संभागीय स्तर पर इन निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा होने की संभावना है।