17 अक्टूबर 2026
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बीड सूखा संकट: सुनेत्रा पवार ने की समीक्षा, 225 टैंकरों से जलापूर्ति; राहत कार्य युद्धस्तर पर

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बीड सूखा संकट: सुनेत्रा पवार ने की समीक्षा, 225 टैंकरों से जलापूर्ति; राहत कार्य युद्धस्तर पर

सारांश

बीड जिले में सूखे का संकट गहराया हुआ है — फसलें सूख चुकी हैं, पेयजल के लिए 225 टैंकर तैनात हैं। उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने युद्धस्तर पर राहत, जीपीएस से टैंकर निगरानी और जल संरक्षण कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने 17 अक्टूबर को बीड जिलाधिकारी कार्यालय में सूखे की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
जिले में फिलहाल 225 टैंकरों के ज़रिए पेयजल की आपूर्ति हो रही है; जीपीएस निगरानी के निर्देश दिए गए।
फसल क्षति के पंचनामे शीघ्र पूरे करने और फसल बीमा में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के आदेश।
किसानों को साइलेज, हाइड्रोपोनिक्स और अजोला चारा उत्पादन का प्रशिक्षण देने पर बल।
वीबी-जी रामजी रोज़गार गारंटी योजना को जल संरक्षण कार्यों से जोड़कर ग्रामीण पलायन रोकने का लक्ष्य।
पेयजल का निर्माण कार्यों में उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित ; नागरिकों से सामूहिक विवाह समारोहों को प्राथमिकता देने की अपील।

महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री एवं बीड जिले की पालक मंत्री सुनेत्रा पवार ने शनिवार, 17 अक्टूबर को बीड जिलाधिकारी कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिले में लंबे समय से जारी वर्षा-विराम के कारण उत्पन्न सूखे की गंभीर स्थिति की व्यापक समीक्षा की। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों को राहत कार्यों में तत्काल तेज़ी लाने और जल संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।

बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में विधायक प्रकाश सोलुंके, विधायक धनंजय मुंडे, जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान, पुलिस अधीक्षक नवनीत कावत तथा उपजिलाधिकारी शिवकुमार स्वामी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।

सूखे की स्थिति और आम जनता पर असर

बारिश की लंबी अनुपस्थिति के कारण बीड जिले में किसानों की खड़ी फसलें सूख गई हैं। पेयजल की गंभीर किल्लत के साथ-साथ पशुओं के चारे का संकट भी गहरा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे की पुनरावृत्ति एक दशक से अधिक समय से किसानों की आजीविका को प्रभावित करती रही है। फिलहाल जिले में 225 टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पेयजल का उपयोग किसी भी परिस्थिति में निर्माण कार्यों के लिए नहीं किया जाए। उन्होंने टैंकरों की आवाजाही और जल-वितरण की निगरानी के लिए जीपीएस प्रणाली लागू करने का आदेश दिया, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

फसल नुकसान और बीमा प्रक्रिया पर निर्देश

बैठक में फसल क्षति के पंचनामे शीघ्रातिशीघ्र पूरे करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों के अनुसार अधिकांश पंचनामे पूरे होने की स्थिति में हैं और रिपोर्ट प्राप्त होते ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई में तेज़ी लाई जाएगी। कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को फसल बीमा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

जल संरक्षण और पशु चारे की योजना

जल संकट की दीर्घकालिक रोकथाम के लिए जलस्रोतों के पुनर्भरण, नदियों-नालों की गहराई बढ़ाने, गाद निकालने और कुओं की मरम्मत जैसे संरक्षण कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए। पशुओं के चारे की समस्या से निपटने हेतु प्रशासन को अग्रिम योजना तैयार करने को कहा गया। किसानों को साइलेज (संरक्षित हरा चारा), हाइड्रोपोनिक्स तकनीक और अजोला चारा उत्पादन का प्रशिक्षण देने पर भी ज़ोर दिया गया।

इसके अतिरिक्त वीबी-जी रामजी योजना के तहत रोज़गार गारंटी कार्यों को जल संरक्षण परियोजनाओं से जोड़कर लागू करने के निर्देश दिए गए, जिससे ग्रामीण किसानों और मज़दूरों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार मिले और पलायन रोका जा सके।

सरकार का संदेश और आगे की राह

उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने नागरिकों से अपील की कि वे शादी-विवाह और जन्मदिन जैसे आयोजनों पर अनावश्यक खर्च से बचें और सामूहिक विवाह समारोहों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस प्राकृतिक संकट में नागरिकों के साथ मज़बूती से खड़े हैं और सभी आवश्यक उपाय युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने मुख्यालय में उपस्थित रहने और ज़रूरतमंद नागरिकों की हरसंभव सहायता करने के निर्देश दिए गए। आगे किसानों से संवाद बढ़ाने और उन्हें मानसिक संबल देने पर भी विशेष बल दिया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बैठकें होती हैं, निर्देश जारी होते हैं, फिर अगले मौसम तक सब ठंडा पड़ जाता है। जीपीएस से टैंकर निगरानी और पंचनामों में तेज़ी जैसे कदम सही दिशा में हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि फसल बीमा का पैसा किसान के खाते तक कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता से पहुँचता है। वीबी-जी रामजी योजना को जल संरक्षण से जोड़ने का विचार नया नहीं है — क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति ही असल कसौटी है। तब तक, 225 टैंकर एक बड़े ढाँचागत जल-संकट का अस्थायी मलहम भर हैं।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीड जिले में सूखे की स्थिति कितनी गंभीर है?
बारिश के लंबे अंतराल के कारण बीड जिले में किसानों की फसलें सूख गई हैं और पेयजल तथा पशु चारे का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। जिले में अभी 225 टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
सुनेत्रा पवार ने बीड सूखे पर क्या निर्देश दिए?
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने 17 अक्टूबर को बीड में समीक्षा बैठक कर फसल क्षति के पंचनामे शीघ्र पूरे करने, टैंकरों की जीपीएस निगरानी, जल संरक्षण कार्य तत्काल शुरू करने और पेयजल का निर्माण कार्यों में उपयोग न करने के निर्देश दिए। उन्होंने नागरिकों से अनावश्यक खर्च कम करने और सामूहिक विवाह समारोहों को प्राथमिकता देने की भी अपील की।
बीड में किसानों को फसल बीमा कब मिलेगा?
अधिकारियों के अनुसार अधिकांश फसल क्षति के पंचनामे पूरे होने की स्थिति में हैं। रिपोर्ट प्राप्त होते ही नियमानुसार फसल बीमा प्रक्रिया में तेज़ी लाई जाएगी। कृषि एवं राजस्व विभाग को पूरी पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पशुओं के चारे की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
प्रशासन को पशु चारे के लिए अग्रिम योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को साइलेज (संरक्षित हरा चारा), हाइड्रोपोनिक्स तकनीक और अजोला चारा उत्पादन का प्रशिक्षण देने पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
वीबी-जी रामजी रोज़गार गारंटी योजना का सूखे से क्या संबंध है?
इस योजना के तहत रोज़गार गारंटी कार्यों को जल संरक्षण परियोजनाओं से जोड़कर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण किसानों और मज़दूरों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार उपलब्ध कराना है, ताकि सूखे के दौरान पलायन रोका जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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