बीड सूखा संकट: सुनेत्रा पवार ने की समीक्षा, 225 टैंकरों से जलापूर्ति; राहत कार्य युद्धस्तर पर
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री एवं बीड जिले की पालक मंत्री सुनेत्रा पवार ने शनिवार, 17 अक्टूबर को बीड जिलाधिकारी कार्यालय में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिले में लंबे समय से जारी वर्षा-विराम के कारण उत्पन्न सूखे की गंभीर स्थिति की व्यापक समीक्षा की। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों को राहत कार्यों में तत्काल तेज़ी लाने और जल संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में विधायक प्रकाश सोलुंके, विधायक धनंजय मुंडे, जिलाधिकारी विवेक जॉन्सन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जितिन रहमान, पुलिस अधीक्षक नवनीत कावत तथा उपजिलाधिकारी शिवकुमार स्वामी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
सूखे की स्थिति और आम जनता पर असर
बारिश की लंबी अनुपस्थिति के कारण बीड जिले में किसानों की खड़ी फसलें सूख गई हैं। पेयजल की गंभीर किल्लत के साथ-साथ पशुओं के चारे का संकट भी गहरा गया है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में सूखे की पुनरावृत्ति एक दशक से अधिक समय से किसानों की आजीविका को प्रभावित करती रही है। फिलहाल जिले में 225 टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है।
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पेयजल का उपयोग किसी भी परिस्थिति में निर्माण कार्यों के लिए नहीं किया जाए। उन्होंने टैंकरों की आवाजाही और जल-वितरण की निगरानी के लिए जीपीएस प्रणाली लागू करने का आदेश दिया, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
फसल नुकसान और बीमा प्रक्रिया पर निर्देश
बैठक में फसल क्षति के पंचनामे शीघ्रातिशीघ्र पूरे करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों के अनुसार अधिकांश पंचनामे पूरे होने की स्थिति में हैं और रिपोर्ट प्राप्त होते ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई में तेज़ी लाई जाएगी। कृषि एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों को फसल बीमा प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और सटीकता बनाए रखने के निर्देश दिए गए।
जल संरक्षण और पशु चारे की योजना
जल संकट की दीर्घकालिक रोकथाम के लिए जलस्रोतों के पुनर्भरण, नदियों-नालों की गहराई बढ़ाने, गाद निकालने और कुओं की मरम्मत जैसे संरक्षण कार्य तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए गए। पशुओं के चारे की समस्या से निपटने हेतु प्रशासन को अग्रिम योजना तैयार करने को कहा गया। किसानों को साइलेज (संरक्षित हरा चारा), हाइड्रोपोनिक्स तकनीक और अजोला चारा उत्पादन का प्रशिक्षण देने पर भी ज़ोर दिया गया।
इसके अतिरिक्त वीबी-जी रामजी योजना के तहत रोज़गार गारंटी कार्यों को जल संरक्षण परियोजनाओं से जोड़कर लागू करने के निर्देश दिए गए, जिससे ग्रामीण किसानों और मज़दूरों को स्थानीय स्तर पर रोज़गार मिले और पलायन रोका जा सके।
सरकार का संदेश और आगे की राह
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने नागरिकों से अपील की कि वे शादी-विवाह और जन्मदिन जैसे आयोजनों पर अनावश्यक खर्च से बचें और सामूहिक विवाह समारोहों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस प्राकृतिक संकट में नागरिकों के साथ मज़बूती से खड़े हैं और सभी आवश्यक उपाय युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं। सभी विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने मुख्यालय में उपस्थित रहने और ज़रूरतमंद नागरिकों की हरसंभव सहायता करने के निर्देश दिए गए। आगे किसानों से संवाद बढ़ाने और उन्हें मानसिक संबल देने पर भी विशेष बल दिया गया।