21 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रोहित पवार का एकनाथ शिंदे पर हमला: किसानों को मेला नहीं, प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख सहायता दें

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रोहित पवार का एकनाथ शिंदे पर हमला: किसानों को मेला नहीं, प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख सहायता दें

सारांश

दशहरे का मेला किसानों को समर्पित करने पर रोहित पवार ने पलटवार किया — माँग है कि प्रतीकात्मक इशारों की जगह प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख की ठोस मदद मिले। सूखे से 40% ग्रामीण पलायन की आशंका और पशुओं के दाम आधे होने की चेतावनी ने मराठवाड़ा संकट को राजनीतिक केंद्र में ला दिया है।

मुख्य बातें

रोहित पवार ने 21 अक्टूबर 2026 को परभणी में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के दशहरा मेला-समर्पण बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
माँग: सूखाग्रस्त किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख और खेतिहर मज़दूरों को ₹25,000 की आर्थिक सहायता।
सूखे के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से 40 प्रतिशत लोगों के शहरों की ओर पलायन की आशंका जताई।
पशुओं की कीमत ₹80,000–₹1 लाख से घटकर ₹40,000 पर आने का उल्लेख।
महिला बचत समूहों और विद्यार्थियों के कर्ज़ माफी तथा 40 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पानी की भी माँग।
रोहित पवार मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव प्रचार के सिलसिले में परभणी पहुँचे थे।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने 21 अक्टूबर 2026 को परभणी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा निशाना साधा। शिंदे ने दशहरे पर शिवसेना (शिंदे गुट) द्वारा आयोजित मेले को किसानों को समर्पित करने की बात कही थी, जिस पर रोहित पवार ने कहा कि सरकार को मेले समर्पित करने के बजाय ठोस आर्थिक सहायता देनी चाहिए।

रोहित पवार की प्रमुख माँगें

रोहित पवार ने माँग की कि सूखे से पीड़ित किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख की आर्थिक सहायता तत्काल प्रदान की जाए। इसके साथ ही खेतिहर मज़दूरों को ₹25,000 की राहत राशि दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि सूखे के कारण महिला बचत समूहों और विद्यार्थियों द्वारा लिए गए कर्ज़ माफ किए जाएँ और विद्यार्थियों की फीस भी माफ की जाए।

रोहित पवार ने जल संकट की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि जहाँ नागरिकों को प्रतिदिन केवल 20 लीटर पानी मिल रहा है, वहाँ इसे बढ़ाकर प्रति व्यक्ति 40 लीटर किया जाना चाहिए। पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था और डीबीटी के ज़रिए चारे की आर्थिक सहायता भी जरूरी बताई।

सूखे से पलायन की चेतावनी

रोहित पवार ने गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि सूखे की वजह से ग्रामीण इलाकों के 40 प्रतिशत लोग शहरों की ओर पलायन कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिन पशुओं की कीमत पहले ₹80,000 से ₹1 लाख तक थी, उनकी कीमत अब घटकर मात्र ₹40,000 रह गई है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गहरे संकट का संकेत है।

गौरतलब है कि मराठवाड़ा क्षेत्र पहले से ही जल संकट और कृषि संकट का सामना करता रहा है। रोहित पवार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव प्रचार की सरगर्मी चल रही है और वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार के समर्थन में परभणी पहुँचे थे।

कानून-व्यवस्था पर भी उठाए सवाल

रोहित पवार ने केंद्र और राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब लोग तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करते हैं, तो उन्हें जेल भेज दिया जाता है और बड़ी संख्या में पुलिस व पैरामिलिट्री तैनात की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में आम नागरिकों, कलाकारों और राजनीतिक नेताओं पर गोलियाँ चलाई जाती हैं।

रोहित पवार ने सवाल किया कि क्या इन कथित गुंडों को केंद्र और राज्य के गृह मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने संजय राउत के बयान का भी समर्थन किया।

राजनीतिक संदर्भ

यह बयानबाजी महाराष्ट्र की राजनीति में विपक्ष और सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाती है। महाविकास अघाड़ी के घटक दल सरकार पर किसानों की अनदेखी का लगातार आरोप लगाते रहे हैं। रोहित पवार का यह हमला सत्तारूढ़ गठबंधन के उस आख्यान को चुनौती देता है, जिसमें दशहरे के आयोजनों को जनकल्याण से जोड़कर पेश किया जा रहा था।

आने वाले दिनों में मराठवाड़ा स्नातक चुनाव के नतीजे इस क्षेत्र में किसान समर्थन के राजनीतिक समीकरणों की स्पष्ट तस्वीर सामने रखेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि मराठवाड़ा में सूखे की मार कितनी गहरी है — और क्या किसी भी दल ने पिछले वादों को ज़मीन पर उतारा है। प्रतीकात्मक आयोजनों को जनकल्याण बताने की परंपरा महाराष्ट्र में नई नहीं है, और विपक्ष का यह हमला चुनावी मौसम में स्वाभाविक है। लेकिन 40% पलायन की चेतावनी और पशु-मूल्यों में भारी गिरावट के आँकड़े महज राजनीतिक बयानबाजी नहीं — ये ग्रामीण संकट की असली गहराई दिखाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है, वह यह है कि मराठवाड़ा में हर चुनावी चक्र में किसान-राहत के वादे होते हैं, पर संरचनात्मक समाधान — सिंचाई, कर्ज़-पुनर्गठन, फसल-बीमा — लगातार पिछड़ते रहते हैं।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहित पवार ने एकनाथ शिंदे की किस बात की आलोचना की?
रोहित पवार ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उस बयान की आलोचना की जिसमें शिंदे ने दशहरे पर आयोजित मेला किसानों को समर्पित करने की बात कही थी। रोहित पवार का कहना है कि प्रतीकात्मक समर्पण के बजाय किसानों को ठोस आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए।
रोहित पवार ने किसानों के लिए क्या माँगें रखीं?
रोहित पवार ने माँग की कि सूखाग्रस्त किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹1 लाख और खेतिहर मज़दूरों को ₹25,000 की आर्थिक सहायता दी जाए। इसके अलावा महिला बचत समूहों और विद्यार्थियों के कर्ज़ माफ किए जाएँ, फीस माफ हो और पेयजल आपूर्ति 20 लीटर से बढ़ाकर 40 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की जाए।
मराठवाड़ा में सूखे से पलायन का संकट कितना गंभीर है?
रोहित पवार के अनुसार सूखे की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों के 40 प्रतिशत लोग शहरों की ओर पलायन कर सकते हैं। पशुओं की कीमत ₹80,000–₹1 लाख से घटकर ₹40,000 पर आ गई है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के गहरे संकट का संकेत है।
रोहित पवार परभणी क्यों पहुँचे थे?
रोहित पवार मराठवाड़ा स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव प्रचार के सिलसिले में परभणी पहुँचे थे, जहाँ वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में एकनाथ शिंदे पर निशाना साधा।
रोहित पवार ने कानून-व्यवस्था पर क्या आरोप लगाए?
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों को जेल भेजा जाता है, जबकि महाराष्ट्र में आम नागरिकों, कलाकारों और राजनीतिक नेताओं पर कथित तौर पर गोलियाँ चलाई जाती हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इन कथित गुंडों को केंद्र और राज्य के गृह मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले