महाराष्ट्र जल संकट: मंत्री गुलाबराव पाटिल ने 265+ तालुकाओं के लिए युद्धस्तरीय कार्ययोजना का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के 265 से अधिक तालुकाओं में सूखे जैसी स्थिति गहराने के बीच राज्य के जलापूर्ति एवं स्वच्छता मंत्री गुलाबराव पाटिल ने बुधवार, 30 सितंबर को अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पानी के टैंकरों पर निर्भरता खत्म करने के लिए स्थायी और दीर्घकालिक उपायों को तत्काल प्राथमिकता दी जाए। छत्रपति संभाजीनगर, नासिक और पुणे संभाग में संभावित जल संकट की समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने यह निर्देश दिए।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री पाटिल ने बैठक में कहा, 'जल संकट पैदा होने के बाद कदम उठाने के बजाय संभावित कमी को ध्यान में रखते हुए पहले से योजना बनाना जरूरी है।' उन्होंने सभी जिलों को 15 अक्टूबर तक अपनी जल संकट कार्ययोजना तैयार करने का सख्त निर्देश दिया।
जिला प्रशासन को तीन अलग-अलग अवधियों — अक्टूबर से दिसंबर, जनवरी से मार्च और अप्रैल से जून — के लिए अलग-अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है, जिसके लिए आवश्यक धन, कर्मचारी और उपकरण पहले से सुनिश्चित करने होंगे।
प्रमुख उपाय और निर्देश
मंत्री द्वारा निर्देशित प्रमुख कदमों में उपलब्ध जल भंडार का सख्त प्रबंधन, मौजूदा जल स्रोतों को सुदृढ़ करना, नालों से गाद निकालना, मिट्टी एवं जल संरक्षण परियोजनाओं में तेजी लाना और 75 प्रतिशत या उससे अधिक पूरी हो चुकी जलापूर्ति योजनाओं को तत्काल चालू करना शामिल है।
जल संकट की आशंका वाले क्षेत्रों में नालों को गहरा करने, गाद निकालने, चेक डैम और सोख्ता गड्ढे बनाने, रिचार्ज शाफ्ट तैयार करने, कुओं की मरम्मत एवं उन्हें गहरा करने, नए बोरवेल की खुदाई और जल भंडारण क्षमता बढ़ाने को प्राथमिकता देने का आदेश दिया गया है।
इन कार्यों के वित्त पोषण के लिए जिला योजना समिति (DPC), कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड, जिला खनिज फाउंडेशन (DMF), जल जीवन मिशन, ग्राम पंचायतों और सिंचाई विभाग समेत विभिन्न स्रोतों से धन जुटाने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध जल दोहन पर कड़ी कार्रवाई
नासिक संभाग में प्राकृतिक और कृत्रिम जल स्रोतों से पानी की अनधिकृत निकासी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। जिला कलेक्टरों को मौके पर जांच के लिए विशेष टीमें गठित करने और अवैध कनेक्शन या बिना अनुमति पानी पंप करने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है।
मंत्री पाटिल ने जोर देते हुए कहा, 'पानी की हर बूंद बचानी होगी।' फील्ड अधिकारियों को सीधे गांवों का दौरा करने और स्थानीय समस्याओं की पहचान कर जिला कलेक्टर या जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को तत्काल सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सफल मॉडलों को पूरे राज्य में लागू करने की योजना
छत्रपति संभाजीनगर संभाग के 'शिरपुर पैटर्न' और पुणे संभाग के सतारा जिले की जल संरक्षण पहल जैसे सफल मॉडलों का दस्तावेज तैयार कर उन्हें महाराष्ट्र के अन्य जिलों में लागू करने पर जोर दिया गया है। सांगली में रिचार्ज शाफ्ट और गाद निकालने के प्रोजेक्ट, तथा सोलापुर के संवेदनशील तालुकाओं के लिए चरणबद्ध कार्ययोजना पर भी विशेष चर्चा हुई।
आम जनता पर असर और आगे की राह
मंत्री पाटिल ने स्पष्ट किया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य स्थायी बुनियादी ढांचा तैयार करना है ताकि पानी पहुंचाने के लिए टैंकरों की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो सके। उन्होंने कहा, 'जल संकट के समय नागरिकों को समय पर पानी उपलब्ध कराना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। संकट गंभीर होने से पहले ही सभी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए और उपलब्ध धन का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।'
जिला कलेक्टरों की अध्यक्षता में जलापूर्ति, कृषि, विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (पूर्ववर्ती मनरेगा), जल संरक्षण और जल संसाधन विभाग के बीच नियमित समन्वय बैठकें आयोजित करने का भी निर्देश दिया गया है। यह बहु-विभागीय समन्वय ही इस रणनीति की असली कसौटी होगी।