महाराष्ट्र जल संकट: मंत्री गिरीश महाजन ने किया 10% बफर स्टॉक का ऐलान, बोले — 'आठ महीने निकालने हैं'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में इस वर्ष कम वर्षा के कारण गहराए जल संकट के बीच राज्य के मंत्री गिरीश महाजन ने 6 अक्टूबर 2026 को पानी के सख्त प्रबंधन, पुनः उपयोग और बफर स्टॉक सुरक्षित रखने की घोषणाएँ कीं। उन्होंने राज्यवासियों से न्यूनतम आवश्यकता के अनुसार पानी का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि 'परिस्थिति बहुत कठिन है' और अगले आठ महीनों तक इस संकट से निपटना होगा।
जल संकट की स्थिति और सरकारी आकलन
मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि इस साल राज्य में बारिश सामान्य से कम रही, जिससे नदियों, तालाबों और बाँधों में जलस्तर काफी नीचे आ गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने सूक्ष्म नियोजन (माइक्रो प्लानिंग) किया है, ताकि आने वाले महीनों में पेयजल और पशुओं के लिए पानी की आपूर्ति बाधित न हो। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई जिलों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति हो रही है और तापमान में और वृद्धि की आशंका है।
10 प्रतिशत बफर स्टॉक की नीति
महाजन ने कहा कि जहाँ भी पानी उपलब्ध है — चाहे वह नदी हो, तालाब हो या बाँध — वहाँ के कुल जल भंडार का 10 प्रतिशत अनिवार्य रूप से बफर स्टॉक के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा, 'अभी पानी को लेकर इमरजेंसी जैसी बहुत कठिन परिस्थिति है।' यह निर्देश पहले ही जारी किया जा चुका है, और प्राथमिकता पेयजल तथा पशुओं के लिए पानी सुनिश्चित करना है।
जल पुनर्चक्रण और औद्योगिक उपयोग पर सख्ती
मंत्री ने बताया कि शहरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल का लगभग 30 प्रतिशत अभी उपयोग में नहीं आ रहा और नदियों में बहकर व्यर्थ हो जाता है। सरकार ने आदेश दिया है कि इस जल को रीसाइकिल कर बगीचों और निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया जाए। इसी प्रकार, सभी उद्योगों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने प्रयुक्त जल को पुनः संसाधित करें। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब महाराष्ट्र में जल पुनर्चक्रण के आदेश जारी हुए हों, लेकिन इस बार इसे आपातकालीन उपाय के रूप में लागू किया जा रहा है।
जल चोरी रोकने के लिए त्रिस्तरीय दल
टैंकों और नहरों से अवैध रूप से पानी उठाए जाने की शिकायतों को देखते हुए सरकार ने राजस्व विभाग, पुलिस और जल संसाधन विभाग की एक संयुक्त निगरानी टीम गठित की है। बिना अनुमति के चलाए जा रहे पंपों को जब्त करने का आदेश दिया गया है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि संकट के समय अवैध जल दोहन सबसे कमज़ोर तबके — विशेषकर ग्रामीण व आदिवासी समुदायों — को सबसे अधिक प्रभावित करता है।
आदिवासी छात्र आंदोलन पर मंत्री का रुख
महाजन ने आदिवासी छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि छात्रों की 12 माँगें पहले ही स्वीकार कर ली गई हैं। मंत्री पद से इस्तीफे की माँग को उन्होंने सिरे से नकार दिया और आरोप लगाया कि यह आंदोलन 'स्पॉन्सर्ड' है। उन्होंने इंडिया ब्लॉक से आग्रह किया कि वे सामूहिक विरोध के बजाय बातचीत के लिए एक प्रतिनिधिमंडल (डेलीगेशन) भेजें। हालाँकि, विपक्षी नेताओं ने इन दावों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
महाराष्ट्र में जल संकट से निपटने की इस बहुआयामी रणनीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर इन आदेशों का कितनी कड़ाई से पालन होता है — खासकर तब जब गर्मियों में तापमान और चढ़ने का अनुमान है।