महाराष्ट्र के 265 सूखाग्रस्त तालुकों में स्वास्थ्य समितियाँ और CMRF प्रकोष्ठ बनाने का सरकारी आदेश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र राज्य राहत एवं पुनर्वास विभाग ने 6 नवंबर 2026 को एक सरकारी संकल्प (GR) जारी कर 265 सूखाग्रस्त तालुकों में जिला और तालुका स्तर पर स्वास्थ्य समितियाँ तथा मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) प्रकोष्ठ स्थापित करने का निर्देश दिया है। 2026 खरीफ सीजन में ट्रिगर-1 सक्रिय होने के बाद इन तालुकों में आधिकारिक रूप से सूखा घोषित किया गया था, जिसके बाद प्रभावित नागरिकों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए यह संरचनागत व्यवस्था की जा रही है।
CMRF प्रकोष्ठों की भूमिका और कार्यप्रणाली
GR के अनुसार, प्रत्येक प्रभावित तालुके के पंचायत समिति कार्यालय में एक CMRF प्रकोष्ठ स्थापित किया जाएगा। ये प्रकोष्ठ सर्वप्रथम मरीजों को आयुष्मान भारत, महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना, श्रम विभाग की स्वास्थ्य कल्याण योजनाओं और धर्मार्थ अस्पताल लाभों से जोड़ेंगे, ताकि बिना देरी के सहायता मिल सके।
जो मरीज इन सरकारी योजनाओं के लिए पात्र नहीं हैं, उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता हेतु संबद्ध अस्पतालों में ऑनलाइन आवेदन जमा करने में मार्गदर्शन दिया जाएगा। प्रत्येक प्रकोष्ठ का नेतृत्व जिला कलेक्टर द्वारा नियुक्त एक समर्पित चिकित्सा अधिकारी करेंगे, जिनकी सहायता के लिए ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) द्वारा नियुक्त लिपिकीय और डेटा-एंट्री स्टाफ उपलब्ध रहेगा।
दो स्तरीय स्वास्थ्य समितियों की संरचना
स्वास्थ्य उपायों की निगरानी के लिए राज्य ने तालुका स्तरीय और जिला स्तरीय — दो स्तरों पर समितियाँ गठित करने का निर्णय लिया है।
तालुका स्तरीय स्वास्थ्य समिति की अध्यक्षता संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के विधायक (MLA) करेंगे। उप-विभागीय अधिकारी (राजस्व) सह-अध्यक्ष तथा तालुका CMRF प्रकोष्ठ प्रमुख सदस्य सचिव होंगे। समिति में तहसीलदार, BDO, मुख्य अधिकारी (नगर परिषद/नगर पंचायत), तालुका स्वास्थ्य अधिकारी (THO), चिकित्सा अधीक्षक, 2 गैर-सरकारी सामाजिक कार्यकर्ता और भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) तथा महाराष्ट्र राज्य रसायनज्ञ एवं औषधि संघ के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
जिला स्तरीय स्वास्थ्य समिति की अध्यक्षता जिले के पालक मंत्री करेंगे, जिला कलेक्टर सह-अध्यक्ष तथा जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) सदस्य सचिव होंगे। इसमें मुख्य कार्यकारी अधिकारी (जिला परिषद), नगर आयुक्त, सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय के डीन, जिला सिविल सर्जन, सहायक आयुक्त (FDA), जन आरोग्य योजना और MUHS के जिला समन्वयक, IMA और ड्रगिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधि तथा 2 सामाजिक कार्यकर्ता सदस्य होंगे। दोनों समितियों को माह में कम से कम दो बार समीक्षा बैठक करना अनिवार्य होगा।
समितियों को सौंपे गए कार्य
GR में समितियों को चिकित्सा जाँच शिविर आयोजित करने, मोबाइल चिकित्सा इकाइयाँ तैनात करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सूखे की परिस्थितियों से उपजे गर्मी व जलजनित रोगों के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है। आदेश में महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और मधुमेह व उच्च रक्तचाप जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित रोगियों तक प्राथमिकता के आधार पर पहुँचने पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
आम जनता पर असर
यह व्यवस्था ऐसे समय में आई है जब 265 तालुकों में सूखे की स्थिति के चलते ग्रामीण आबादी, विशेष रूप से कमज़ोर वर्ग, स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहा है। गौरतलब है कि सूखे के दौरान जलजनित बीमारियाँ और कुपोषण जैसी समस्याएँ तीव्र हो जाती हैं। पंचायत स्तर पर CMRF प्रकोष्ठ स्थापित होने से दूरदराज के गाँवों के मरीजों को सरकारी सहायता के लिए जिला मुख्यालय तक नहीं जाना पड़ेगा — एक ऐसा बदलाव जो प्रशासनिक पहुँच की पुरानी खाई को पाटने का प्रयास करता है।
आगे की राह
विभाग ने समितियों के गठन की समयसीमा तत्काल निर्धारित की है। जिला कलेक्टरों से अपेक्षा है कि वे शीघ्र चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति कर प्रकोष्ठों को सक्रिय करें। यह पहल आगामी महीनों में तालुका स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे की प्रभावशीलता की एक महत्वपूर्ण परीक्षा होगी।