7 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा और जबरन धर्म परिवर्तन, वीओपीएम ने उठाए गंभीर सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर बढ़ती हिंसा और जबरन धर्म परिवर्तन, वीओपीएम ने उठाए गंभीर सवाल

सारांश

पाकिस्तान में नाबालिग लड़कियों के अपहरण, कथित जबरन धर्म परिवर्तन और ईशनिंदा कानून के दुरुपयोग के मामले एक बार फिर सामने आए हैं। वीओपीएम की रिपोर्ट यह सवाल उठाती है कि जब संस्थाएँ ही अत्याचार रोकने में विफल हों, तो कानून बनाने भर से क्या हासिल होगा।

मुख्य बातें

वीओपीएम ने 6 नवंबर 2026 को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर बढ़ते उत्पीड़न की रिपोर्ट जारी की।
2026 की पहली छमाही में ईशनिंदा के आरोपों, लक्षित हिंसा और कथित जबरन धर्म परिवर्तन के कई मामले दर्ज किए गए।
मारिया (12 वर्ष) , नेहा और सोनिया (15 वर्ष) — तीन नाबालिग ईसाई लड़कियों के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले रिपोर्ट में शामिल हैं।
ईसाई नर्सों नविश अरूज और मरयम लाल को अप्रैल 2021 में गिरफ्तार किया गया था; फरवरी 2026 में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी किया।
सांसद फाल्बूस क्रिस्टोफर के प्रस्तावित जबरन धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को सकारात्मक बताते हुए वीओपीएम ने प्रभावी क्रियान्वयन की माँग की।
संगठन ने कहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी है, न कि कोई एहसान।

मानवाधिकार संगठन 'वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी' (वीओपीएम) ने 6 नवंबर 2026 को इस्लामाबाद में जारी एक रिपोर्ट में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न पर गहरी चिंता व्यक्त की। संगठन ने 2026 की पहली छमाही के दौरान ईशनिंदा (ब्लासफेमी) के आरोपों, लक्षित हिंसा और कथित जबरन धर्म परिवर्तन के कई मामलों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा कानूनी ढाँचा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में नाकाफी साबित हो रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

वीओपीएम ने अपनी रिपोर्ट में तीन नाबालिग लड़कियों के अपहरण, कथित जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह के मामलों का विस्तार से उल्लेख किया। रिपोर्ट के अनुसार, मारिया नामक एक 12 वर्षीया ईसाई लड़की का अपहरण किया गया, और एक अदालत ने उस विवाह को वैध घोषित कर दिया जिसमें आरोपित पक्ष की उम्र 30 वर्ष बताई गई थी। संगठन ने इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा और न्याय की दृष्टि से गंभीर रूप से चिंताजनक बताया।

नेहा के परिवार ने आरोप लगाया कि उसे एक सिलाई केंद्र से अगवा किया गया और जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया। परिवार का यह भी कहना है कि पुलिस ने शुरुआत में कार्रवाई करने में देरी की। इसी प्रकार सोनिया के परिवार ने भी अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप दर्ज कराया, जहाँ दस्तावेज़ों में उसकी उम्र 15 वर्ष दर्शाई गई, जबकि कथित अपहरणकर्ताओं ने दावा किया कि वह 20 वर्ष की है।

ईशनिंदा कानून के शिकार: नर्सों का मामला

रिपोर्ट में ईसाई नर्सों नविश अरूज और मरयम लाल के मामले का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2021 में एक सहकर्मी की शिकायत पर उन पर इस्लामी धार्मिक लेख वाले एक स्टिकर का अपमान करने का आरोप लगाया गया और दोनों को गिरफ्तार किया गया। दोनों महिलाओं ने पाँच महीने हिरासत में बिताए और रिहाई के बाद भी उन्हें छिपकर जीवन गुज़ारना पड़ा।

फरवरी 2026 में अदालत ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास और पर्याप्त विश्वसनीय साक्ष्यों की कमी के आधार पर दोनों को बरी कर दिया। वीओपीएम का कहना है कि यह फैसला भले ही महत्वपूर्ण था, लेकिन यह उन वर्षों की असुरक्षा, मानसिक पीड़ा और सामाजिक बहिष्कार की भरपाई नहीं कर सकता।

सरकारी जवाबदेही पर सवाल

वीओपीएम ने कहा कि 'यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम' (यूएससीआईआरएफ) द्वारा दर्ज किए गए मामले स्पष्ट करते हैं कि भेदभावपूर्ण कानूनों, कमज़ोर जवाबदेही व्यवस्था और पर्याप्त सरकारी सुरक्षा की अनुपस्थिति का अल्पसंख्यक परिवारों पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है। संगठन के अनुसार, महज सरकारी आश्वासनों से इन पीड़ितों की समस्याओं का हल नहीं निकलेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक अधिकारों को लेकर बढ़ते दबाव का सामना है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी संगठन ने पाकिस्तान में ईसाई, हिंदू और अहमदी समुदायों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया हो।

प्रस्तावित कानून और इसकी सीमाएँ

वीओपीएम ने पाकिस्तान के ईसाई सांसद फाल्बूस क्रिस्टोफर द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन के विरुद्ध प्रस्तावित कानून को एक सकारात्मक कदम बताया। हालाँकि, संगठन ने स्पष्ट किया कि केवल कानून बना देना तब तक पर्याप्त नहीं होगा जब तक पुलिस, अदालतें और सरकारी अधिकारी उसे निष्पक्षता के साथ लागू न करें।

संगठन की माँगें और आगे की राह

वीओपीएम ने ऐसे मामलों में तत्काल और निष्पक्ष जाँच, उम्र से जुड़े दस्तावेज़ों का स्वतंत्र मूल्यांकन और पीड़ित लड़कियों की बात बिना किसी दबाव के सुने जाने की माँग की है। संगठन ने अपने बयान में कहा, 'पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को लंबी पीड़ा के बाद मिलने वाली बरी होने की राहत या किसी हमले के बाद किए गए वादों से ज्यादा की जरूरत है। उन्हें ऐसे संस्थानों की जरूरत है जो अत्याचार को रोकें, तुरंत कार्रवाई करें और न्याय दिलाएं। उनकी सुरक्षा कोई एहसान नहीं, बल्कि राज्य की जिम्मेदारी है।' अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें अब इस बात पर टिकी होंगी कि पाकिस्तान सरकार इन माँगों पर कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी बदलाव दुर्लभ ही रहता है। नाबालिग लड़कियों के मामलों में अदालतों का रवैया और पुलिस की निष्क्रियता यह संकेत देते हैं कि समस्या केवल कानून की कमी की नहीं, बल्कि संस्थागत इच्छाशक्ति की भी है। सांसद क्रिस्टोफर का प्रस्तावित कानून स्वागतयोग्य है, लेकिन पाकिस्तान में ऐसे कानूनों के क्रियान्वयन का इतिहास उत्साहजनक नहीं रहा। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह कानून उन्हीं संस्थाओं द्वारा लागू किया जाएगा जो अब तक पीड़ितों की रक्षा करने में बार-बार विफल रही हैं।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीओपीएम की रिपोर्ट में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति बताई गई है?
वीओपीएम की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ ईशनिंदा के आरोपों, लक्षित हिंसा और कथित जबरन धर्म परिवर्तन के कई मामले सामने आए। संगठन का कहना है कि भेदभावपूर्ण कानूनों और कमज़ोर जवाबदेही व्यवस्था के कारण पीड़ितों को न्याय मिलना अत्यंत कठिन है।
नाबालिग लड़कियों मारिया, नेहा और सोनिया के मामले क्या हैं?
रिपोर्ट के अनुसार, 12 वर्षीया ईसाई लड़की मारिया का अपहरण हुआ और एक अदालत ने उसके विवाह को वैध माना, जबकि आरोपित की उम्र 30 वर्ष बताई गई। नेहा को कथित तौर पर सिलाई केंद्र से अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया, वहीं सोनिया के मामले में उम्र से जुड़े दस्तावेज़ों में विरोधाभास पाया गया — जन्म प्रमाण पत्र में 15 वर्ष, आरोपितों का दावा 20 वर्ष।
नर्सों नविश अरूज और मरयम लाल का मामला क्या है?
अप्रैल 2021 में एक सहकर्मी की शिकायत पर दोनों ईसाई नर्सों को ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने पाँच महीने हिरासत में बिताए और रिहाई के बाद भी छिपकर रहना पड़ा; फरवरी 2026 में अदालत ने साक्ष्यों की कमी के कारण दोनों को बरी कर दिया।
पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
पाकिस्तानी ईसाई सांसद फाल्बूस क्रिस्टोफर ने जबरन धर्म परिवर्तन के विरुद्ध एक कानून प्रस्तावित किया है, जिसे वीओपीएम ने सकारात्मक कदम बताया है। हालाँकि, संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक पुलिस, अदालतें और सरकारी अधिकारी इसे निष्पक्षता से लागू नहीं करते, तब तक केवल कानून बनाने से कुछ नहीं बदलेगा।
यूएससीआईआरएफ का पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के मामलों से क्या संबंध है?
यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ उत्पीड़न के कई मामले दर्ज किए हैं। वीओपीएम ने इन मामलों का हवाला देते हुए कहा कि ये आँकड़े भेदभावपूर्ण कानूनों और कमज़ोर सरकारी सुरक्षा का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले