20 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पाकिस्तान के सिंध में दो नाबालिग हिंदू बहनों के कथित अपहरण और जबरन निकाह पर अधिकार संगठन ने उठाए सवाल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पाकिस्तान के सिंध में दो नाबालिग हिंदू बहनों के कथित अपहरण और जबरन निकाह पर अधिकार संगठन ने उठाए सवाल

सारांश

पाकिस्तान के सिंध से एक और दिल दहला देने वाला मामला — दो नाबालिग हिंदू बहनों का कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह। आँकड़े बताते हैं कि 2021 से 2024 के बीच ऐसे 421 दर्ज मामलों में 72% सिंध से थे। यह सिर्फ एक मामला नहीं, एक पैटर्न है जिसे संयुक्त राष्ट्र भी चिह्नित कर चुका है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टांडो अल्लाहयार से 13 और 14 वर्षीय हिंदू बहनों रोपी और सीता के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह का मामला सामने आया।
कथित निकाह अमजद सोलंगी और मंसूर सोलंगी से कराया गया; अदालत ने दोनों को परिवार के बजाय सुरक्षित गृह भेजा।
वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने तत्काल, स्वतंत्र जाँच और लड़कियों को बाल-संवेदनशील माहौल में बयान देने की सुविधा देने की माँग की।
सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के अनुसार 2021–2024 के बीच ऐसे 421 मामले दर्ज; 282 पीड़ित हिंदू , 72% मामले सिंध से।
अकेले 2024 में 83 दर्ज मामले ; पीड़ितों में 63% हिंदू लड़कियाँ।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने 2026 में चेतावनी दी थी कि 2025 के कथित मामलों में 80% सिंध से और 75% पीड़ित हिंदू थे।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टांडो अल्लाहयार जिले से 13 और 14 वर्ष की दो नाबालिग हिंदू बहनों — रोपी और सीता — के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह का मामला सामने आया है, जिसे लेकर अल्पसंख्यक अधिकार संगठन वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने 19 सितंबर 2026 को गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार, यह मामला पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के सामने मौजूद उस लगातार और दस्तावेज़ीकृत खतरे को एक बार फिर रेखांकित करता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकाय पहले ही चिह्नित कर चुके हैं।

मामले का विवरण

वीओपीएम के अनुसार, परिवार ने आरोप लगाया है कि टांडो अल्लाहयार जिले की इब्राहिम कॉलोनी से दोनों बहनों का कथित तौर पर अपहरण किया गया। इसके बाद उनका जबरन इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराया गया और अमजद सोलंगी तथा मंसूर सोलंगी नामक दो पुरुषों से उनका निकाह करा दिया गया।

अधिकारियों ने अपहरण मामले में दोनों बहनों को टांडो अल्लाहयार की एक स्थानीय अदालत में पेश किया। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने उन्हें तत्काल परिवार को सौंपने के बजाय एक सुरक्षित गृह (शेल्टर होम) भेजने का निर्देश दिया।

संगठन ने बताया कि अदालत के बाहर दोनों बहनें काफी व्यथित दिखीं और वहाँ मौजूद लोगों ने उन्हें बार-बार घर लौटने की गुहार लगाते हुए सुना। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में भी दोनों लड़कियाँ अपने माता-पिता के पास लौटने की अपील करती दिखाई दे रही हैं।

अधिकार संगठन की माँगें

वीओपीएम ने मामले की तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच की माँग करते हुए कहा, 'रोपी और सीता की घर लौटने की कथित अपील पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनकी सुरक्षा, उम्र, गरिमा और स्वतंत्रता को हर अन्य विचार से ऊपर रखा जाना चाहिए।'

संगठन ने यह भी माँग की कि दोनों लड़कियों का बयान बाल-संवेदनशील माहौल में दर्ज किया जाए और कथित पतियों, धार्मिक हस्तियों, बिचौलियों या किसी भी ऐसे व्यक्ति से उन्हें दूर रखा जाए जो उन पर दबाव डाल सके। इसके अतिरिक्त, लड़कियों को स्वतंत्र कानूनी सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी माँग की गई।

व्यापक पैटर्न और आँकड़े

यह मामला अकेला नहीं है। वीओपीएम ने सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2021 से 2024 के बीच अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों और महिलाओं के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह के कम से कम 421 मामले दर्ज किए गए। इनमें 282 पीड़ित हिंदू थे और 72 प्रतिशत मामले सिंध से सामने आए।

अकेले 2024 में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा कम से कम 83 मामले दर्ज किए गए, जिनमें हिंदू लड़कियाँ कुल पीड़ितों में 63 प्रतिशत थीं। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने 2026 में चेतावनी दी थी कि 2025 के दौरान पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन के जरिए निकाह के कथित मामलों में लगभग 80 प्रतिशत सिंध में सामने आए थे, जबकि करीब 75 प्रतिशत पीड़ित हिंदू थे।

गौरतलब है कि सिंध पाकिस्तान में सबसे बड़ी हिंदू आबादी वाला प्रांत है। विशेष रूप से ग्रामीण जिलों में अनेक हिंदू परिवार गरीबी, जातिगत भेदभाव और कानूनी सहायता तक सीमित पहुँच जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, जो उन्हें इस तरह की घटनाओं के प्रति और अधिक असुरक्षित बनाती हैं।

आम जनता और अल्पसंख्यक समुदाय पर असर

संगठन ने कहा कि इस मामले ने सिंध के हिंदू समुदायों में गहरी चिंता और भय उत्पन्न किया है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निगरानी के दायरे में है।

कई अधिकार संगठनों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के कथित अपहरण, धर्म परिवर्तन और निकाह के मामलों का एक लगातार और चिंताजनक पैटर्न दर्ज किया है। रोपी और सीता का मामला इस श्रृंखला की ताज़ा कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

क्या होगा आगे

फिलहाल दोनों बहनें सुरक्षित गृह में हैं। अधिकार संगठन ने पाकिस्तानी न्यायपालिका और सरकार से अपील की है कि बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोपरि रखते हुए उन्हें उनके परिवार को सौंपा जाए। यह मामला पाकिस्तान में अल्पसंख्यक संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर गहरे सवाल खड़े करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुस्थापित और दस्तावेज़ीकृत पैटर्न की अगली कड़ी की तरह सामने आया है — जिसे अब संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों तक ने आधिकारिक रूप से चिह्नित किया है। चार वर्षों में 421 दर्ज मामले और 72 प्रतिशत मामलों का एक ही प्रांत से होना यह बताता है कि समस्या संरचनात्मक है, आकस्मिक नहीं। असली सवाल यह है कि पाकिस्तानी न्यायपालिका ने दोनों लड़कियों को परिवार को सौंपने के बजाय सुरक्षित गृह क्यों भेजा — और इस निर्णय की समीक्षा कब होगी। बिना जवाबदेही तंत्र के, ये आँकड़े हर वर्ष बढ़ते रहेंगे।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में रोपी और सीता का मामला क्या है?
रोपी और सीता पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टांडो अल्लाहयार जिले की 13 और 14 वर्षीय हिंदू बहनें हैं, जिनके परिवार ने आरोप लगाया है कि उनका अपहरण किया गया, जबरन इस्लाम कबूल कराया गया और दो पुरुषों से निकाह करा दिया गया। अदालत ने उन्हें परिवार को सौंपने की जगह सुरक्षित गृह भेज दिया।
वीओपीएम ने इस मामले में क्या माँगें रखी हैं?
वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच की माँग की है। संगठन चाहता है कि दोनों लड़कियों का बयान बाल-संवेदनशील माहौल में दर्ज हो, उन्हें स्वतंत्र कानूनी सहायता मिले और कथित पतियों या बिचौलियों से दूर रखा जाए।
पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन के कितने मामले दर्ज हुए हैं?
सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के आँकड़ों के अनुसार 2021 से 2024 के बीच ऐसे कम से कम 421 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 282 पीड़ित हिंदू थे और 72 प्रतिशत मामले सिंध प्रांत से थे। अकेले 2024 में 83 दर्ज मामलों में 63 प्रतिशत पीड़ित हिंदू लड़कियाँ थीं।
संयुक्त राष्ट्र ने इस मुद्दे पर क्या कहा है?
वीओपीएम के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने 2026 में चेतावनी दी थी कि 2025 के दौरान पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन के कथित मामलों में लगभग 80 प्रतिशत सिंध में सामने आए थे और करीब 75 प्रतिशत पीड़ित हिंदू थे।
सिंध में हिंदू समुदाय की स्थिति क्यों विशेष रूप से कमज़ोर है?
सिंध पाकिस्तान में सबसे बड़ी हिंदू आबादी वाला प्रांत है, लेकिन यहाँ के ग्रामीण जिलों में कई हिंदू परिवार गरीबी, जातिगत भेदभाव और कानूनी सहायता तक सीमित पहुँच की समस्याओं से जूझते हैं। ये कारक उन्हें अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन जैसी घटनाओं के प्रति और अधिक असुरक्षित बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले