पाकिस्तान के सिंध में दो नाबालिग हिंदू बहनों के कथित अपहरण और जबरन निकाह पर अधिकार संगठन ने उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टांडो अल्लाहयार जिले से 13 और 14 वर्ष की दो नाबालिग हिंदू बहनों — रोपी और सीता — के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह का मामला सामने आया है, जिसे लेकर अल्पसंख्यक अधिकार संगठन वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी (वीओपीएम) ने 19 सितंबर 2026 को गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन के अनुसार, यह मामला पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के सामने मौजूद उस लगातार और दस्तावेज़ीकृत खतरे को एक बार फिर रेखांकित करता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निकाय पहले ही चिह्नित कर चुके हैं।
मामले का विवरण
वीओपीएम के अनुसार, परिवार ने आरोप लगाया है कि टांडो अल्लाहयार जिले की इब्राहिम कॉलोनी से दोनों बहनों का कथित तौर पर अपहरण किया गया। इसके बाद उनका जबरन इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराया गया और अमजद सोलंगी तथा मंसूर सोलंगी नामक दो पुरुषों से उनका निकाह करा दिया गया।
अधिकारियों ने अपहरण मामले में दोनों बहनों को टांडो अल्लाहयार की एक स्थानीय अदालत में पेश किया। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने उन्हें तत्काल परिवार को सौंपने के बजाय एक सुरक्षित गृह (शेल्टर होम) भेजने का निर्देश दिया।
संगठन ने बताया कि अदालत के बाहर दोनों बहनें काफी व्यथित दिखीं और वहाँ मौजूद लोगों ने उन्हें बार-बार घर लौटने की गुहार लगाते हुए सुना। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में भी दोनों लड़कियाँ अपने माता-पिता के पास लौटने की अपील करती दिखाई दे रही हैं।
अधिकार संगठन की माँगें
वीओपीएम ने मामले की तत्काल, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच की माँग करते हुए कहा, 'रोपी और सीता की घर लौटने की कथित अपील पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनकी सुरक्षा, उम्र, गरिमा और स्वतंत्रता को हर अन्य विचार से ऊपर रखा जाना चाहिए।'
संगठन ने यह भी माँग की कि दोनों लड़कियों का बयान बाल-संवेदनशील माहौल में दर्ज किया जाए और कथित पतियों, धार्मिक हस्तियों, बिचौलियों या किसी भी ऐसे व्यक्ति से उन्हें दूर रखा जाए जो उन पर दबाव डाल सके। इसके अतिरिक्त, लड़कियों को स्वतंत्र कानूनी सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराने की भी माँग की गई।
व्यापक पैटर्न और आँकड़े
यह मामला अकेला नहीं है। वीओपीएम ने सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2021 से 2024 के बीच अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों और महिलाओं के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह के कम से कम 421 मामले दर्ज किए गए। इनमें 282 पीड़ित हिंदू थे और 72 प्रतिशत मामले सिंध से सामने आए।
अकेले 2024 में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा कम से कम 83 मामले दर्ज किए गए, जिनमें हिंदू लड़कियाँ कुल पीड़ितों में 63 प्रतिशत थीं। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने 2026 में चेतावनी दी थी कि 2025 के दौरान पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन के जरिए निकाह के कथित मामलों में लगभग 80 प्रतिशत सिंध में सामने आए थे, जबकि करीब 75 प्रतिशत पीड़ित हिंदू थे।
गौरतलब है कि सिंध पाकिस्तान में सबसे बड़ी हिंदू आबादी वाला प्रांत है। विशेष रूप से ग्रामीण जिलों में अनेक हिंदू परिवार गरीबी, जातिगत भेदभाव और कानूनी सहायता तक सीमित पहुँच जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं, जो उन्हें इस तरह की घटनाओं के प्रति और अधिक असुरक्षित बनाती हैं।
आम जनता और अल्पसंख्यक समुदाय पर असर
संगठन ने कहा कि इस मामले ने सिंध के हिंदू समुदायों में गहरी चिंता और भय उत्पन्न किया है। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार निगरानी के दायरे में है।
कई अधिकार संगठनों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों के कथित अपहरण, धर्म परिवर्तन और निकाह के मामलों का एक लगातार और चिंताजनक पैटर्न दर्ज किया है। रोपी और सीता का मामला इस श्रृंखला की ताज़ा कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
क्या होगा आगे
फिलहाल दोनों बहनें सुरक्षित गृह में हैं। अधिकार संगठन ने पाकिस्तानी न्यायपालिका और सरकार से अपील की है कि बच्चों के सर्वोत्तम हित को सर्वोपरि रखते हुए उन्हें उनके परिवार को सौंपा जाए। यह मामला पाकिस्तान में अल्पसंख्यक संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर गहरे सवाल खड़े करता है।