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क्वाड 2026: तीन विदेश मंत्री बैठकों से हिंद-प्रशांत में सहयोग का दायरा बढ़ा, नवंबर में मनीला शिखर सम्मेलन की उम्मीद

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क्वाड 2026: तीन विदेश मंत्री बैठकों से हिंद-प्रशांत में सहयोग का दायरा बढ़ा, नवंबर में मनीला शिखर सम्मेलन की उम्मीद

सारांश

2026 में क्वाड ने तीन विदेश मंत्री बैठकों के ज़रिए हिंद-प्रशांत में अपनी भूमिका को ठोस रूप दिया — आसियान के साथ समग्र रणनीतिक साझेदारी और समुद्री अभ्यासों के साथ। अब नज़रें मनीला शिखर सम्मेलन पर हैं, जो ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद पहला क्वाड नेता सम्मेलन होगा।

मुख्य बातें

क्वाड के विदेश मंत्रियों ने 2026 में तीन बैठकें कीं — मई में नई दिल्ली, जुलाई में मनीला, और पिछले सप्ताह अटलांटा में।
नवंबर के अंत में मनीला में क्वाड नेताओं का शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है; 2025 में नई दिल्ली सम्मेलन आयोजित नहीं हो सका था।
जुलाई 2026 की मनीला बैठक में AOIP को व्यावहारिक रूप से लागू करने के समर्थन की घोषणा हुई — समुद्री सुरक्षा, तकनीक और आपदा प्रतिक्रिया पर जोर।
दूसरा 'क्वाड-एट-सी' शिप ऑब्जर्वर मिशन और दूसरा IPLN TTX अभ्यास सितंबर 2026 में सम्पन्न हुए।
यह सम्मेलन राष्ट्रपति ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद पहला क्वाड नेता सम्मेलन होगा।

क्वाड समूह ने 2026 में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका को पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और ठोस रूप में स्थापित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली, मनीला और अटलांटा में आयोजित विदेश मंत्रियों की तीन अलग-अलग बैठकों के माध्यम से समूह ने साझा प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया, पूर्व की घोषणाओं को ज़मीन पर उतारा और आपसी सहयोग के नए क्षेत्र जोड़े। इसी महीने के अंत में मनीला में प्रस्तावित नेताओं का शिखर सम्मेलन इस क्रम में अगला अहम पड़ाव माना जा रहा है।

2026 में बैठकों का क्रम

क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने इस वर्ष तीन बार औपचारिक रूप से मुलाकात की। पहली बैठक मई 2026 में नई दिल्ली में हुई, दूसरी जुलाई 2026 में मनीला में, और तीसरी पिछले सप्ताह अटलांटा में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान आयोजित की गई।

ऑनलाइन पत्रिका 'द डिप्लोमैट' की रिपोर्ट के अनुसार, इन नियमित बैठकों के बावजूद सबसे अधिक ध्यान अभी भी नेताओं के शिखर सम्मेलन पर केंद्रित है, जो इसी महीने के आखिर में मनीला में होने की उम्मीद है।

शिखर सम्मेलन क्यों महत्वपूर्ण

इस शिखर सम्मेलन को कई कारणों से विशेष महत्व दिया जा रहा है। गौरतलब है कि 2025 में नई दिल्ली में प्रस्तावित क्वाड नेताओं का सम्मेलन आयोजित नहीं हो सका था। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद यह पहला क्वाड नेताओं का सम्मेलन होगा।

रिपोर्टों के अनुसार, यह सम्मेलन क्वाड के भविष्य को लेकर चल रही अटकलों को भी काफी हद तक शांत कर सकता है। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा एवं तकनीकी आपूर्ति-श्रृंखलाओं की चुनौतियों और चीन, रूस तथा अमेरिका के संभावित प्रभाव क्षेत्रों को लेकर जारी बहस के बीच क्वाड की प्रासंगिकता पर सवाल उठते रहे हैं।

आसियान के साथ साझेदारी और नई प्राथमिकताएँ

जुलाई 2026 की मनीला बैठक में क्वाड देशों ने आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक (AOIP) को व्यावहारिक रूप से लागू करने के समर्थन की घोषणा की। इसमें समुद्री सुरक्षा, सीमा-पार सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि, महत्वपूर्ण एवं उभरती तकनीकें, और मानवीय सहायता तथा आपदा प्रतिक्रिया जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

यह कदम इसलिए भी उल्लेखनीय माना जा रहा है क्योंकि क्वाड देशों ने खुद को 'आसियान के समग्र रणनीतिक साझेदार' के रूप में परिभाषित किया — जो आर्थिक दबाव के विरुद्ध एक स्पष्ट सामूहिक स्थिति का संकेत है।

ज़मीनी स्तर पर क्या हुआ

अटलांटा बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में मई 2026 की नई दिल्ली बैठक में चर्चा किए गए कई कार्यक्रमों की प्रगति का विवरण भी शामिल किया गया। इनमें दूसरा 'क्वाड-एट-सी' शिप ऑब्जर्वर मिशन प्रमुख है, जो सितंबर 2026 में आयोजित हुआ। इसके साथ ही दूसरा इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (IPLN) टेबलटॉप एक्सरसाइज (TTX) भी सितंबर 2026 में जापान के रक्षा मंत्रालय की मेजबानी में आयोजित किया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत में समुद्री सुरक्षा को लेकर क्षेत्रीय देशों की चिंताएँ लगातार बढ़ रही हैं और बहुपक्षीय ढाँचों की माँग तेज़ हो रही है।

क्या होगा आगे

नवंबर के अंत में प्रस्तावित मनीला शिखर सम्मेलन क्वाड के लिए एक निर्णायक परीक्षा होगी। इस सम्मेलन में नेताओं से यह अपेक्षा है कि वे विदेश मंत्री स्तर पर तय की गई प्राथमिकताओं को राजनीतिक अनुमोदन देंगे और समूह की दीर्घकालिक रणनीतिक दिशा को स्पष्ट करेंगे। 'द डिप्लोमैट' की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 पहले से ही क्वाड के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ है — और मनीला सम्मेलन इसे और मज़बूती दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी नेताओं के शिखर सम्मेलन की है — जो 2025 में टल चुका था। ट्रंप प्रशासन की वापसी के बाद अमेरिका की बहुपक्षीय प्रतिबद्धताओं पर सवाल बने हुए हैं, और मनीला सम्मेलन यह तय करेगा कि क्वाड महज़ परामर्श मंच है या एक ठोस सुरक्षा ढाँचा। आसियान के साथ 'समग्र रणनीतिक साझेदार' की भाषा महत्वाकांक्षी है, पर इसे ज़मीन पर साबित करने के लिए बाध्यकारी प्रतिबद्धताएँ, न कि केवल संयुक्त बयान, ज़रूरी हैं।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में क्वाड की कितनी बैठकें हुईं और कहाँ?
2026 में क्वाड विदेश मंत्रियों की तीन बैठकें हुईं — मई में नई दिल्ली, जुलाई में मनीला और पिछले सप्ताह अटलांटा में जी-20 के दौरान। इन बैठकों में साझा प्राथमिकताओं को अंतिम रूप दिया गया और कई पहलों को लागू किया गया।
मनीला में क्वाड शिखर सम्मेलन क्यों महत्वपूर्ण है?
मनीला शिखर सम्मेलन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2025 में नई दिल्ली में प्रस्तावित नेताओं की बैठक आयोजित नहीं हो सकी थी। साथ ही, यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद पहला क्वाड नेता सम्मेलन होगा, जो समूह की दिशा के बारे में चल रही अटकलों को कम कर सकता है।
क्वाड और आसियान के बीच नई साझेदारी क्या है?
जुलाई 2026 की मनीला बैठक में क्वाड देशों ने आसियान आउटलुक ऑन द इंडो-पैसिफिक (AOIP) को व्यावहारिक रूप से लागू करने के समर्थन की घोषणा की। इसमें समुद्री सुरक्षा, उभरती तकनीकें, आर्थिक समृद्धि और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।
2026 में क्वाड के तहत कौन-से व्यावहारिक अभ्यास हुए?
सितंबर 2026 में दो प्रमुख अभ्यास हुए — दूसरा 'क्वाड-एट-सी' शिप ऑब्जर्वर मिशन और दूसरा इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (IPLN) टेबलटॉप एक्सरसाइज (TTX), जिसकी मेजबानी जापान के रक्षा मंत्रालय ने की। ये अभ्यास अटलांटा बैठक के संयुक्त बयान में रेखांकित किए गए।
क्वाड की प्रासंगिकता पर सवाल क्यों उठते रहे हैं?
बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा और तकनीकी आपूर्ति-श्रृंखलाओं की चुनौतियों तथा चीन, रूस और अमेरिका के प्रभाव क्षेत्रों को लेकर जारी बहस के बीच क्वाड की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। 2025 में नेता सम्मेलन न होने से भी इन अटकलों को बल मिला था।
राष्ट्र प्रेस
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