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क्वाड विदेश मंत्री बैठक: रुबियो फिलीपींस रवाना, हिंद-प्रशांत में साझेदारी मज़बूत करने का संकल्प

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क्वाड विदेश मंत्री बैठक: रुबियो फिलीपींस रवाना, हिंद-प्रशांत में साझेदारी मज़बूत करने का संकल्प

सारांश

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो फिलीपींस में क्वाड की दूसरी मंत्रीस्तरीय बैठक और आसियान सम्मेलनों में शामिल होंगे। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर हिंद-प्रशांत के प्रति अमेरिकी प्रतिबद्धता दोहराई। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच यह बैठक क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज़ से अहम मानी जा रही है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 20 जुलाई 2026 को फिलीपींस के लिए रवाना हुए, जहाँ वे क्वाड और आसियान बैठकों में हिस्सा लेंगे।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर पोस्ट कर हिंद-प्रशांत साझेदारी को 'ज़रूरी' बताया।
क्वाड में भारत , ऑस्ट्रेलिया , जापान और अमेरिका शामिल हैं; यह इस वर्ष की दूसरी मंत्रीस्तरीय बैठक है।
मई 2026 की क्वाड बैठक के संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में एकतरफा कार्रवाइयों का कड़ा विरोध किया गया था।
अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी पिगॉट के अनुसार, रुबियो फिलीपींस के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करेंगे।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 20 जुलाई 2026 को फिलीपींस के लिए रवाना हुए, जहाँ वे क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों की इस वर्ष की दूसरी मंत्रीस्तरीय बैठक और आसियान की कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में तनाव को लेकर क्वाड देशों की चिंताएँ गहरी हुई हैं।

राजदूत का संदेश और क्वाड की प्रतिबद्धता

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'इस हफ्ते फिलीपींस में मार्को रुबियो के साथ हमारी साल की दूसरी मंत्रीस्तरीय क्वाड मीटिंग में शामिल होने का इंतजार कर रहा हूं। अमेरिका एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए प्रतिबद्ध है, हमारे क्वाड साझेदार ज़रूरी हैं।' गोर ने इस बैठक को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए निर्णायक बताया।

क्वाड में भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका शामिल हैं। इन चारों देशों की साझा प्रतिबद्धता एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने की है।

रुबियो की यात्रा का एजेंडा

अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी पिगॉट ने बताया कि रुबियो आसियान पोस्ट-मिनिस्ट्रियल कॉन्फ्रेंस, ईस्ट एशिया समिट विदेश मंत्रियों की बैठक और आसियान रीजनल फोरम विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। उन्होंने कहा, 'विदेश मंत्री की यह यात्रा अमेरिका की एक स्पष्ट प्राथमिकता को आगे बढ़ाती है, जिसका उद्देश्य एक स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना है, जो पूरे क्षेत्र और अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि लेकर आए।'

पिगॉट के अनुसार, रुबियो इस दौरे में फिलीपींस के साथ अमेरिका की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करेंगे तथा हिंद-प्रशांत देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।

मई की बैठक और संयुक्त बयान

इससे पहले मई 2026 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था। उस बैठक में चारों देशों ने स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और क्षेत्रीय सहयोग को और मज़बूत करने पर सहमति जताई।

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया, 'हम पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। हम ऐसे किसी भी एकतरफा या अस्थिरता पैदा करने वाले कदम का कड़ा विरोध दोहराते हैं, जिसमें बल या दबाव का इस्तेमाल शामिल हो।'

समुद्री सुरक्षा पर गहरी चिंता

संयुक्त बयान में क्वाड देशों ने दक्षिण चीन सागर में बढ़ते सैन्यीकरण और समुद्री मार्गों पर बाधाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। बयान में अपतटीय संसाधनों के विकास में हस्तक्षेप, नौवहन और हवाई आवाजाही की स्वतंत्रता में बार-बार बाधा डालने, तटरक्षक जहाजों और समुद्री मिलिशिया के खतरनाक संचालन तथा वॉटर कैनन और फ्लेयर के असुरक्षित इस्तेमाल का विशेष उल्लेख किया गया।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब फिलीपींस और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर में तनाव लगातार बढ़ रहा है। क्वाड की फिलीपींस में बैठक इस संदर्भ में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आने वाले हफ्तों में क्वाड देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग की नई पहलों की घोषणा संभव है, जो हिंद-प्रशांत में शक्ति संतुलन की दिशा तय करेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अपने आप में एक स्पष्ट संदेश है। हालाँकि क्वाड के संयुक्त बयान मज़बूत भाषा में आते हैं, आलोचकों का कहना है कि इनके पीछे कोई बाध्यकारी तंत्र नहीं है। असली परीक्षा यह है कि क्या क्वाड देश समुद्री सुरक्षा में ठोस और समन्वित कदम उठा पाते हैं, या यह मंच केवल बयानबाज़ी तक सीमित रहता है। भारत के लिए यह बैठक विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि वह एक तरफ क्वाड साझेदारी निभाता है और दूसरी तरफ चीन के साथ सीमा-स्थिरता बनाए रखने की कोशिश भी करता है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्वाड क्या है और इसमें कौन-से देश शामिल हैं?
क्वाड एक चतुर्पक्षीय सुरक्षा संवाद है जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका शामिल हैं। इसका उद्देश्य एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखना और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
मार्को रुबियो फिलीपींस में किन बैठकों में हिस्सा लेंगे?
रुबियो फिलीपींस में क्वाड विदेश मंत्रियों की मंत्रीस्तरीय बैठक, आसियान पोस्ट-मिनिस्ट्रियल कॉन्फ्रेंस, ईस्ट एशिया समिट विदेश मंत्रियों की बैठक और आसियान रीजनल फोरम विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने क्या कहा?
राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वे फिलीपींस में इस साल की दूसरी क्वाड मंत्रीस्तरीय बैठक का इंतजार कर रहे हैं और अमेरिका एक स्वतंत्र व खुले हिंद-प्रशांत के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने क्वाड साझेदारों को इस लक्ष्य के लिए 'ज़रूरी' बताया।
दक्षिण चीन सागर पर क्वाड का रुख क्या है?
मई 2026 की क्वाड बैठक के संयुक्त बयान में चारों देशों ने दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में एकतरफा या अस्थिरता पैदा करने वाले कदमों का कड़ा विरोध किया। बयान में वॉटर कैनन के असुरक्षित इस्तेमाल, जहाजों को टक्कर मारने और समुद्री मार्गों में बाधा जैसी कार्रवाइयों पर गहरी चिंता जताई गई।
इस वर्ष क्वाड की पहली मंत्रीस्तरीय बैठक कब हुई थी?
इस वर्ष की पहली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक मई 2026 में हुई थी, जिसमें भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, ऑस्ट्रेलिया की पेनी वोंग, अमेरिका के मार्को रुबियो और जापान के तोशिमित्सु मोतेगी ने भाग लिया था।
राष्ट्र प्रेस
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