क्वाड बैठक के बाद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर नई दिल्ली लौटे, राष्ट्रपति ट्रंप को दी मनीला की पूरी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित आसियान और क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक (एफएमएम) में भाग लेने के बाद 24 जुलाई को नई दिल्ली लौट आए। वापसी के तुरंत बाद उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन पर मनीला में हुई क्वाड बैठक की विस्तृत जानकारी दी।
राजदूत गोर का एक्स पर बयान
राजदूत गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'फिलीपींस में विदेश सचिव रुबियो से मिलने के बाद अभी-अभी नई दिल्ली लौटा हूं। हमारी क्वाड बैठकों ने हिंद-प्रशांत में हमारे साझेदारों के साथ कई जरूरी कामों में नई तेजी लाई है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मनीला में हुई बातचीत का ब्यौरा उन्होंने सीधे राष्ट्रपति ट्रंप को फोन पर साझा किया।
मनीला में क्वाड एफएमएम का मुख्य घटनाक्रम
मनीला में आयोजित क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग (क्वाड) विदेश मंत्रियों की बैठक में चार देशों के शीर्ष राजनयिक एकत्र हुए — भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी। यह बैठक आसियान सम्मेलन के इतर आयोजित हुई।
अमेरिकी विदेश सचिव रुबियो ने बैठक के बाद कहा कि अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत का दृष्टिकोण साझा करते हैं, जो 'कानून के राज, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर आधारित हो।' उन्होंने यह भी कहा, 'क्वाड अभी भी प्राथमिकता है और हम इस साल के आखिर में फिर मिलेंगे।'
जयशंकर-रुबियो द्विपक्षीय वार्ता
क्वाड बैठक के अलावा, बुधवार को मनीला में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और विदेश सचिव मार्को रुबियो के बीच अलग से द्विपक्षीय मुलाकात हुई। इस वार्ता में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख क्षेत्रों — व्यापार और टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस — पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'यहां मनीला में अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो से मिलकर खुशी हुई। हमारी बैठक उन क्षेत्रों पर केंद्रित थी जो भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के लिए प्राथमिकता हैं, जिनमें व्यापार और टैरिफ, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, जरूरी मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शामिल हैं।'
वहीं रुबियो ने भी एक्स पर लिखा, 'आसियान की बैठक में अपने दोस्त व भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से मिलकर हमेशा अच्छा लगता है। हमने क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों, क्वाड, व्यापार और रक्षा समझौते पर बात की। भारत के साथ हमारा संबंध बहुत जरूरी है।'
हिंद-प्रशांत रणनीति में क्वाड की अहमियत
गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता को लेकर चारों देशों की चिंताएँ साझा हैं। क्वाड एफएमएम का पुनः आयोजन इस बात का संकेत है कि चारों देश इस बहुपक्षीय ढाँचे को और मजबूत करने के इच्छुक हैं। रुबियो का यह बयान कि 'इस साल के आखिर में फिर मिलेंगे', आने वाले महीनों में क्वाड की और बैठकों की संभावना को रेखांकित करता है।
आगे क्या होगा
राजदूत गोर की नई दिल्ली वापसी और राष्ट्रपति ट्रंप को दी गई ब्रीफिंग यह दर्शाती है कि अमेरिका भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को उच्च प्राथमिकता दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापार, टैरिफ और रक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर हुई चर्चा आने वाले महीनों में ठोस समझौतों का आधार बन सकती है।