अटलांटा में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक: जयशंकर, रूबियो, मोतेगी और वोंग हिंद-प्रशांत एजेंडे पर होंगे एकजुट
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर शनिवार, 1 नवंबर 2026 को अटलांटा में क्वाड (चतुर्भुज सुरक्षा संवाद) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे, जहाँ भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष राजनयिक हिंद-प्रशांत सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आर्थिक मज़बूती पर विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार यह बैठक अगले महीने मनीला में प्रस्तावित क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की ज़मीन तैयार करने के लिहाज़ से अहम हो सकती है।
बैठक का ढाँचा और भागीदार
यह बैठक जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के समानांतर सुबह 9 बजे स्थानीय समय पर आयोजित होगी। इसकी मेज़बानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो कर रहे हैं। जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग भी जी-20 बैठक के लिए अटलांटा में पहले से मौजूद हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को जयशंकर की यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा, 'विदेश मंत्री जी-20 बैठक से इतर क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे और अपने समकक्षों के साथ कई द्विपक्षीय मुलाकातें करेंगे।'
एजेंडे में क्या है
ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री वोंग ने यात्रा से पूर्व जारी बयान में कहा, 'चारों देश क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक मज़बूती के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाएंगे, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध बनाया जा सके।' समुद्री सुरक्षा का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है — जयशंकर ने शुक्रवार को जी-20 की पूर्ण बैठक में संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (यूएनसीएलओएस) के तहत नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने और नागरिक जहाज़ों पर हमलों को रोकने की तत्काल ज़रूरत पर ज़ोर दिया।
जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'नागरिक जहाज़ों और नाविकों पर हमलों के परिणामों का बोझ ग्लोबल साउथ के देशों को असमान रूप से उठाना पड़ रहा है।'
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में दक्षिण एशिया पहल की निदेशक फरवा आमेर के अनुसार, 'यह बैठक मनीला में होने वाले क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन की जमीन तैयार कर सकती है, जो लंबे समय से लंबित है।' उन्होंने आगाह किया कि बैठक का स्वरूप प्रतीकात्मक अधिक रह सकता है, क्योंकि 'क्रिटिकल मिनरल्स से लेकर ऊर्जा तक क्वाड के कई एजेंडे पर सदस्य देश आपस में द्विपक्षीय स्तर पर काम कर रहे हैं।'
ऑस्ट्रेलियन स्ट्रेटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की वरिष्ठ निदेशक एम्मा चैनलेट-एवरी ने कहा कि बैठक टोक्यो, कैनबरा और नई दिल्ली के लिए 'स्वागत योग्य' है। हालाँकि, उन्होंने यह भी चिंता जताई कि बैठक के अगले दिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित त्रिपक्षीय शिखर बैठक की चर्चा क्वाड के प्रयासों पर हावी हो सकती है।
समानांतर राजनयिक गतिविधियाँ
अटलांटा में कई महत्वपूर्ण समानांतर कूटनीतिक घटनाक्रम भी हुए। रूबियो, मोतेगी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने शुक्रवार शाम 'त्रिपक्षीय आर्कटिक-पैसिफिक साझेदारी' स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। वोंग ने यह भी बताया कि ऑस्ट्रेलिया यूरोपीय संघ की अगुवाई वाली 'नो फीस/नो टोल्स' पहल में शामिल हो गया है, जिसका उद्देश्य नौवहन की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले गैरकानूनी शुल्क का विरोध करना है।
जयशंकर ने शुक्रवार को जी-20 के मौके पर अर्जेंटीना, कनाडा, मेक्सिको, ब्राजील और जर्मनी के विदेश मंत्रियों से भी द्विपक्षीय मुलाकातें कीं। उल्लेखनीय है कि रूबियो ने अटलांटा बैठक से महज एक सप्ताह पहले ही भारत का दौरा किया था।
आगे का कार्यक्रम
अटलांटा के बाद जयशंकर 1 से 4 नवंबर 2026 तक एंटीगुआ और बारबुडा में होने वाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (CHOGM) में भाग लेंगे। यह ऐसे समय में है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव के बीच क्वाड की प्रासंगिकता और एकजुटता को लेकर अंतरराष्ट्रीय नज़रें टिकी हुई हैं।