कूचबिहार में सीपीआई(एम) कार्यालय पर तोड़फोड़ का आरोप, भाजपा ने नकारा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई(एम) — ने रविवार, 5 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के माथाभांगा नंबर-1 ब्लॉक के जोरपाटकी इलाके में स्थित उसके पार्टी कार्यालय पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं ने हमला कर तोड़फोड़ की। पार्टी के अनुसार यह घटना शनिवार रात उस विरोध मार्च के कुछ घंटों बाद हुई, जो गोलकगंज बाजार इलाके में निकाला गया था।
मार्च और मांगें
सीपीआई(एम) की जोरपाटकी एरिया कमेटी ने पुलिस की अनुमति से गोलकगंज बाजार में एक विरोध जुलूस निकाला था। इस मार्च में कई मांगें उठाई गईं — मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने और उन्हें 'सज़ा' देने की माँग, वैध मतदाताओं के नाम तत्काल मतदाता सूची में शामिल करना, अन्नपूर्णा योजना में अभी तक नहीं जुड़े लोगों को लाभ देना, महिलाओं को प्रति माह ₹3,000 देने की योजना, और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सीईसी के विरुद्ध विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन तेज़ हुए हैं और मतदाता सूची की विश्वसनीयता एक राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है।
तोड़फोड़ का आरोप और पुलिस का रुख
सीपीआई(एम) के जिला सदस्य मोकसेदुल इस्लाम ने बताया कि जुलूस समाप्त होने के बाद कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय में करीब एक घंटे तक बैठे, चर्चा की, और फिर कार्यालय में ताला लगाकर चले गए। उनके अनुसार, कुछ घंटे बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यालय पर हमला किया और अंदर रखे सामान को नुकसान पहुँचाया। इस्लाम ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में कानून का राज स्थापित करने के बजाय वे शासक का राज स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। अगर उन्हें लगता है कि कार्यकर्ताओं पर हमला करके, पार्टी कार्यालय पर हमला और तोड़फोड़ करके लाल झंडे को झुका दिया जाएगा, तो वे बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं।'
पुलिस ने स्पष्ट किया कि अब तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। अधिकारियों के अनुसार शिकायत मिलने के बाद ही जाँच की कार्रवाई शुरू की जाएगी। सीपीआई(एम) ने कहा है कि शीघ्र ही औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाएगी।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा जिला समिति के सदस्य और पार्टी के मंडल नंबर-2 के पूर्व अध्यक्ष राजीब सरकार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'मैंने सुना है कि सीपीआई(एम) के पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ हुई है। हालाँकि, इस घटना में भाजपा का कोई व्यक्ति शामिल नहीं है।' सरकार ने तर्क दिया कि यदि भाजपा ऐसा करना चाहती, तो सरकार बनने के पाँच महीने बाद इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं थी। उन्होंने इन आरोपों को 'बेबुनियाद' बताया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विभिन्न राजनीतिक दलों के पार्टी कार्यालयों पर हमले और राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ नई नहीं हैं। वाम दल और भाजपा दोनों एक-दूसरे पर ऐसे आरोप लगाते रहे हैं। कूचबिहार उत्तर बंगाल का वह जिला है जहाँ हाल के वर्षों में राजनीतिक संघर्ष की कई घटनाएँ सामने आई हैं।
फिलहाल पुलिस की लिखित शिकायत का इंतज़ार है, जिसके बाद यह मामला कानूनी आकार लेगा।