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फरक्का बीडीओ कार्यालय पर हुई हिंसा के बाद क्या सियासी घमासान शुरू हो गया?

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फरक्का बीडीओ कार्यालय पर हुई हिंसा के बाद क्या सियासी घमासान शुरू हो गया?

सारांश

कोलकाता, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के फरक्का में बीडीओ कार्यालय पर हुई हिंसा ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। भाजपा ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की है। जानें इस गंभीर मुद्दे का पूरा विवरण।

मुख्य बातें

फरक्का में बीडीओ कार्यालय पर हिंसा हुई।
भाजपा ने केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की।
हिंसा ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया।
पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
राजनीतिक नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया दी है।

कोलकाता, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का में बीडीओ कार्यालय पर हुई तोड़फोड़ और हिंसा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए राज्य में चल रहे एसआईआर को पूरा करने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और चुनावी प्रक्रिया को डर और हिंसा के जरिए प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।

यह प्रतिक्रिया उस घटना के एक दिन बाद आई है, जब कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक मोनिरुल इस्लाम के नेतृत्व में एक उग्र भीड़ ने फरक्का बीडीओ कार्यालय पर धावा बोल दिया। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय में तोड़फोड़ की और इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) के कक्ष को भी नुकसान पहुंचाया।

भीड़ का आरोप था कि एसआईआर सुनवाई के नाम पर आम लोगों को छोटी-छोटी गलतियों के लिए परेशान किया जा रहा है। इस हिंसा के कारण बीडीओ कार्यालय में चल रही मतदाता सूची की एसआईआर सुनवाई को रोकना पड़ा।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस घटना को बेहद गंभीर बताया।

उन्होंने 'एक्स' पोस्ट में लिखा कि फरक्का विधानसभा क्षेत्र में बीडीओ कार्यालय, ईआरओ, एईआरओ और माइक्रो ऑब्जर्वर्स पर किया गया हमला अत्यंत चिंताजनक है।

मालवीय ने आरोप लगाया कि यह हिंसा कथित तौर पर तृणमूल नेताओं के इशारे पर कराई गई। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है और इसकी पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आती है।

मालवीय ने चुनाव आयोग से इस मामले का संज्ञान लेने और सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को इस घटना पर तुरंत कदम उठाना चाहिए और डीजीपी से लेकर संबंधित एसपी तक जवाबदेही तय की जानी चाहिए। हिंसा और डर के जरिए चुनावी प्रक्रिया को कमजोर नहीं होने दिया जा सकता।

इस बीच, पुलिस ने बीडीओ की शिकायत के आधार पर फरक्का थाने में मामला दर्ज किया है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है। अब तक इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

घटना के बाद स्थिति और गंभीर तब हो गई जब लगभग 55 माइक्रो ऑब्जर्वर्स ने सुरक्षा में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा और एसआईआर ड्यूटी से खुद को अलग कर लिया।

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी राज्य प्रशासन पर तीखा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि फरक्का में माइक्रो ऑब्जर्वर्स पर हुआ हमला बेहद शर्मनाक और लोकतंत्र पर सीधा हमला है। अधिकारी ने आरोप लगाया कि ड्यूटी के दौरान अधिकारियों को बेरहमी से पीटा गया, दो अधिकारियों को गंभीर चोटें आईं, और मौके पर कोई पुलिस सुरक्षा मौजूद नहीं थी।

सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि तृणमूल सरकार एसआईआर प्रक्रिया को कमजोर कर मतदाता सूची में हेरफेर करना चाहती है। उन्होंने अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग से अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करने, केंद्रीय बलों की तैनाती करने और बिना किसी डर या पक्षपात के एसआईआर पूरी कराने की मांग की।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को अराजकता से बचाने के लिए अब कड़े कदम उठाने जरूरी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है। सभी राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे इसे गंभीरता से लें और कानून-व्यवस्था की स्थिति को बहाल करें।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फरक्का में क्या हुआ?
फरक्का में बीडीओ कार्यालय पर तोड़फोड़ और हिंसा की गई जिससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है।
भाजपा ने क्या मांग की है?
भाजपा ने केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की है ताकि कानून-व्यवस्था को बहाल किया जा सके।
क्या तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगे हैं?
हां, भाजपा ने आरोप लगाया है कि यह हिंसा तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के इशारे पर की गई।
राष्ट्र प्रेस
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