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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का AAP सरकार को आदेश: 15 दिन में ₹14,191 करोड़ का डीए बकाया चुकाएं

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का AAP सरकार को आदेश: 15 दिन में ₹14,191 करोड़ का डीए बकाया चुकाएं

सारांश

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने AAP सरकार को 15 दिन में ₹14,191 करोड़ का डीए बकाया चुकाने का आदेश दिया है — और भुगतान होने तक सरकारी विज्ञापन अभियानों पर भी रोक लगा दी है। यह फैसला उन हज़ारों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत है जो लंबे समय से अपने वैधानिक हक का इंतज़ार कर रहे थे।

मुख्य बातें

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को AAP सरकार को 15 दिनों में डीए बकाया जारी करने का आदेश दिया।
कुल बकाया राशि लगभग ₹14,191 करोड़ है, जिसमें वेतन, पेंशन, फैमिली पेंशन और लीव एनकैशमेंट शामिल हैं।
भुगतान होने तक सरकार प्रिंट व सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने के विज्ञापन अभियान नहीं चला सकती।
समय पर भुगतान न होने पर बकाये पर सालाना 6% साधारण ब्याज लागू होगा।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति रोहित कपूर की बेंच ने कहा — वित्तीय तंगी सेवा लाभ रोकने का आधार नहीं।
सरकार को अगस्त 2026 के अंत तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि वह राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता (डीए) बकाया 15 दिनों के भीतर जारी करे। अनुमानित ₹14,191 करोड़ की इस देनदारी के भुगतान तक कोर्ट ने सरकार के बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों पर भी रोक लगा दी है।

मुख्य न्यायिक आदेश

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को उनके सेवा-संबंधी लाभों से वंचित करने के लिए वित्तीय तंगी को आधार नहीं बनाया जा सकता। बेंच ने कहा, "जब तक ऐसे सभी बकाये का भुगतान नहीं हो जाता, पंजाब राज्य प्रिंट या सोशल मीडिया में बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान जैसे किसी भी गैर-ज़रूरी खर्च का सहारा नहीं लेगा, क्योंकि इन खर्चों के आधार पर राज्य कर्मचारियों के देय बकाये के भुगतान से इनकार को सही नहीं ठहराया जा सकता।"

कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि यदि दो हफ्तों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो बकाया राशि पर सालाना 6 प्रतिशत की साधारण ब्याज दर लागू होगी। इस महीने के अंत तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला उस समय से चला आ रहा है जब सिंगल जज ने 8 अप्रैल को पंजाब सरकार की 18 फरवरी 2025 की उस 'लिक्विडेशन योजना' को रद्द कर दिया था, जिसमें उम्र के आधार पर पेंशन बकाया का किस्तों में भुगतान किया जाना था। सिंगल जज ने इस योजना को मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया था।

सिंगल जज ने राज्य और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) को निर्देश दिया था कि वे सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को डीए की लंबित किस्तें उसी दर पर जारी करें जिस दर पर ऑल इंडिया सर्विसेज के सदस्यों को भुगतान किया गया है। राज्य और PSPCL ने इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी, जिस पर 22 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा गया था।

सरकार और कर्मचारियों का पक्ष

राज्य के वकील मनिंदरजीत सिंह बेदी ने दलील दी थी कि डीए जारी करने का सिंगल जज का निर्देश अधिकार क्षेत्र से बाहर था। वहीं, कर्मचारी समूहों का कहना है कि सरकार ने केंद्र सरकार की तर्ज पर डीए भुगतान को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया था, लेकिन वित्तीय तंगी का हवाला देकर भुगतान में देरी की जा रही थी।

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में स्वीकार किया कि संशोधित वेतन, पेंशन, फैमिली पेंशन और लीव एनकैशमेंट के बकाये के भुगतान पर कुल खर्च लगभग ₹14,191 करोड़ होगा।

आम जनता और कर्मचारियों पर असर

यह आदेश पंजाब के हज़ारों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत है, जो लंबे समय से अपने वैधानिक हक का इंतज़ार कर रहे थे। गौरतलब है कि महंगाई भत्ता केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप दिया जाना एक स्थापित परंपरा है, और राज्य द्वारा इसमें देरी को कोर्ट ने संवैधानिक अधिकारों का हनन माना।

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब सरकार पर पहले से ही वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार के सामने चुनौती है कि वह विज्ञापन खर्चों पर रोक के बीच इस बड़ी देनदारी का प्रबंध कैसे करे।

आगे क्या होगा

कोर्ट के आदेश के अनुसार, पंजाब सरकार को अगस्त 2026 के अंत तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो 6% वार्षिक ब्याज की अतिरिक्त देनदारी राज्य के खज़ाने पर और बोझ डालेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर अन्य राज्यों में भी पड़ सकता है जहाँ डीए बकाया के मामले लंबित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि AAP सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर सीधा सवाल है — जो सरकार विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च करती रही, वह अपने कर्मचारियों का वैधानिक हक देने में 'तंगी' का हवाला देती रही। ₹14,191 करोड़ की यह देनदारी राातोंरात नहीं बनी; यह वर्षों की टालमटोल का नतीजा है जिसे कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना। विज्ञापन पर रोक का आदेश प्रतीकात्मक रूप से तीखा है — यह संदेश देता है कि जनता के पैसे से पहले जनसेवकों का हक पूरा हो, फिर सरकार की छवि चमकाई जाए। असली परीक्षा अब यह है कि क्या सरकार 15 दिन में यह राशि जुटा पाती है, या 6% ब्याज की अतिरिक्त मार झेलती है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब सरकार पर डीए बकाया का मामला क्या है?
पंजाब सरकार पर राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता (डीए) न देने का आरोप है। सरकार ने केंद्र की तर्ज पर डीए देना स्वीकार किया था, लेकिन वित्तीय तंगी का हवाला देकर भुगतान में देरी की। कुल बकाया राशि लगभग ₹14,191 करोड़ है।
हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को क्या आदेश दिया?
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने 3 अगस्त 2026 को आदेश दिया कि पंजाब सरकार 15 दिनों के भीतर डीए बकाया जारी करे। साथ ही, भुगतान होने तक सरकार बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियान नहीं चला सकती और देरी पर 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
पंजाब सरकार की 18 फरवरी 2025 की लिक्विडेशन योजना क्या थी?
पंजाब सरकार ने 18 फरवरी 2025 को कैबिनेट की मंज़ूरी से एक योजना जारी की थी जिसमें उम्र के आधार पर पेंशन बकाया किस्तों में चुकाने का प्रावधान था। सिंगल जज ने 8 अप्रैल को इसे मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए रद्द कर दिया।
क्या PSPCL कर्मचारी भी इस आदेश से प्रभावित होंगे?
हाँ, पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के कर्मचारी और पेंशनभोगी भी इस आदेश के दायरे में आते हैं। सिंगल जज ने राज्य सरकार के साथ PSPCL को भी डीए की लंबित किस्तें ऑल इंडिया सर्विसेज की दर पर जारी करने का निर्देश दिया था।
अगर पंजाब सरकार समय पर डीए नहीं चुकाती तो क्या होगा?
यदि 15 दिनों की निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं हुआ, तो बकाया राशि पर सालाना 6% की साधारण ब्याज दर लागू होगी। इसके अलावा, सरकार को अगस्त 2026 के अंत तक अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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