पंजाब कांग्रेस का AAP सरकार पर हमला: HC के DA आदेश को पलटने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा अमरिंदर सिंह वड़िंग ने सोमवार, 17 अगस्त को मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर न्यायपालिका की अवमानना का गंभीर आरोप लगाया। यह विवाद राज्य के वित्त विभाग द्वारा जारी उस परिपत्र के बाद भड़का है, जो सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता (DA) भुगतान के संबंध में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों को प्रभावहीन करता प्रतीत होता है।
मुख्य घटनाक्रम
वित्त विभाग ने सभी सरकारी विभागों को एक सामान्य परिपत्र जारी किया, जिसमें स्पष्ट किया गया कि वित्त विभाग की पूर्व सहमति या सामान्य निर्देश के बिना उच्च न्यायालय के किसी भी आदेश को लागू नहीं किया जा सकता। कांग्रेस का कहना है कि यह निर्देश न्यायिक आदेशों को कार्यपालिका की मंजूरी के अधीन बना देता है, जो संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन है।
वड़िंग ने तीखे शब्दों में कहा, 'यह अभूतपूर्व है। पंजाब वित्त विभाग पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों को पलटने की हिम्मत कर रहा है। क्या वास्तव में न्यायालय के आदेश वित्त विभाग की मंजूरी के अधीन लागू किए जाएंगे? आज के आदेश यही संकेत देते हैं।'
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री विजय इंदर सिंगला ने भी AAP सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि 'न्यायालय की अवहेलना करना, राज्य को अंधाधुंध कर्ज में डुबोना और दिल्ली में बैठे अपने राजनीतिक आकाओं के हितों को साधने के लिए कर्मचारियों के साथ अन्याय करना पंजाब की जनता का घोर अपमान है।'
सिंगला ने आगे कहा कि 'मुख्यमंत्री मान सरकार नहीं चला रहे हैं, वे एक भ्रष्टाचार की योजना चला रहे हैं। जब कोई मुख्यमंत्री यह मानता है कि उसका राजनीतिक अस्तित्व न्यायपालिका से ऊपर है, तो लोकतांत्रिक शासन ने आधिकारिक तौर पर घोर अहंकार के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है।' गौरतलब है कि ये आरोप विपक्षी दल की ओर से लगाए गए हैं और AAP सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
महंगाई भत्ता (DA) का मुद्दा पंजाब में लंबे समय से एक संवेदनशील विषय रहा है। सरकारी कर्मचारी संगठन न्यायालय के आदेशों के अनुसार समय पर DA भुगतान की माँग करते रहे हैं। यदि वित्त विभाग का परिपत्र प्रभावी रहता है, तो उच्च न्यायालय के आदेशों के बावजूद कर्मचारियों को बकाया राशि मिलने में और देरी हो सकती है।
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब पहले से ही वित्तीय दबाव में है और कर्मचारी संगठन अपने बकाया अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं।
क्या होगा आगे
कांग्रेस ने AAP सरकार से वित्त विभाग का परिपत्र तत्काल वापस लेने की माँग की है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मामला न्यायालय की अवमानना याचिका का रूप भी ले सकता है, यदि प्रभावित कर्मचारी या संगठन उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाते हैं। पंजाब के राजनीतिक गलियारों में इस विवाद ने न्यायिक अधिकार और कार्यपालिका की सीमाओं पर नई बहस छेड़ दी है।