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डीए बकाया पर हाई कोर्ट के आदेश में 'आप' सरकार डाल रही रोड़ा: पंजाब भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों

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डीए बकाया पर हाई कोर्ट के आदेश में 'आप' सरकार डाल रही रोड़ा: पंजाब भाजपा अध्यक्ष ढिल्लों

सारांश

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने AAP सरकार पर हाई कोर्ट के डीए भुगतान आदेश को वित्त विभाग की 'पूर्व सहमति' की शर्त लगाकर टालने का आरोप लगाया — और इसे न्यायिक अवमानना की दिशा में कदम बताया।

मुख्य बातें

पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने 18 अगस्त को AAP सरकार पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के डीए भुगतान आदेश को लागू न करने का आरोप लगाया।
उच्च न्यायालय ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया डीए और डीआर के भुगतान के लिए 15 दिन की समय-सीमा दी थी।
वित्त विभाग ने 17 अगस्त को सभी विभागों को निर्देश दिया कि बिना उसकी सहमति के अदालती आदेश लागू न करें — भाजपा ने इसे अवैध बताया।
ढिल्लों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को चेतावनी दी कि अदालती आदेश वैकल्पिक नहीं होते।
भाजपा ने माँग की कि सरकार तत्काल, पूर्ण और अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करे।

पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मंगलवार, 18 अगस्त को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के भुगतान के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा दी गई 15 दिन की समय-सीमा का पालन करने के बजाय प्रशासनिक अड़चनें खड़ी कर रही है। ढिल्लों ने इसे न्यायिक आदेश की अवहेलना करार दिया और सरकार से तत्काल अनुपालन की माँग की।

वित्त विभाग के पत्र पर विवाद

ढिल्लों ने 17 अगस्त को वित्त विभाग द्वारा जारी उस पत्र पर कड़ा एतराज जताया, जिसमें सभी प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिया गया था कि वे 2026 की सिविल रिट याचिका में उच्च न्यायालय के फैसले से उत्पन्न आदेशों को वित्त विभाग की पूर्व सहमति के बिना लागू न करें। उनके अनुसार, यह शर्त अदालत के न्यायिक आदेश का हिस्सा नहीं है और इसे थोपना संविधान-सम्मत नहीं है।

ढिल्लों ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "कार्यपालिका किसी न्यायिक निर्देश के खिलाफ अपील में नहीं बैठ सकती है या इसके अनुपालन से पहले प्रशासनिक अनुमोदन की एक अतिरिक्त परत नहीं बना सकती है। जहाँ अदालत ने 'ईमानदारी से अनुपालन' का निर्देश दिया है, वहाँ राज्य सरकार के लिए आंतरिक विभागीय परिपत्र के माध्यम से न्यायिक आदेश पर पुनर्विचार करने, अर्हता प्राप्त करने या चुनिंदा रूप से लागू करने की कोई गुंजाइश नहीं है।"

सरकार पर कर्मचारी-विरोधी रवैये का आरोप

प्रदेश भाजपा प्रमुख ने कहा कि यह गैर-अनुपालन यह सिद्ध करता है कि AAP सरकार न केवल कर्मचारी और पेंशनभोगी विरोधी है, बल्कि उच्च न्यायालय के आदेशों के प्रति भी उदासीन है। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी कोई सब्सिडी या राजनीतिक उपहार नहीं माँग रहे — वे वह धनराशि माँग रहे हैं जो कानूनी और वैध रूप से उनका बकाया है।

आम जनता और कर्मचारियों पर असर

ढिल्लों ने तीखा सवाल उठाया कि यदि पंजाब सरकार प्रचार, विज्ञापन और राजनीतिक ब्रांडिंग पर खर्च कर सकती है, तो कर्मचारियों को उनका पहले से अर्जित डीए और बकाया क्यों नहीं दिया जा रहा। उन्होंने इसे "आप सरकार का असली चेहरा" बताते हुए कहा — चुनाव से पहले वादे, चुनाव के बाद प्रचार और भुगतान के समय बहाने।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पंजाब में सरकारी कर्मचारियों के बकाया डीए का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और उच्च न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा।

भाजपा की माँग: तत्काल और पूर्ण अनुपालन

ढिल्लों ने राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि अदालती आदेशों को राजनीतिक सुझाव मानना बंद किया जाए। उन्होंने कहा, "अदालत का आदेश वैकल्पिक नहीं है। सरकार को इसका पूरी तरह, तुरंत और अक्षरशः पालन करना चाहिए।" भाजपा ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने समय-सीमा के भीतर अनुपालन नहीं किया, तो पार्टी आगे की कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका असर न्यायिक आदेश को निष्प्रभावी करने जैसा है — यह एक खतरनाक मिसाल है। गौरतलब है कि पंजाब पहले से ही गंभीर वित्तीय दबाव में है, और डीए बकाया का मुद्दा वर्षों से लंबित है, जो दर्शाता है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित टालमटोल हो सकती है। भाजपा का यह हमला राजनीतिक रूप से सटीक समय पर है, लेकिन मुख्य सवाल यह है कि क्या अदालत स्वयं सरकार को अवमानना के लिए नोटिस देगी — वही कदम जो इस विवाद को राजनीतिक बहस से कानूनी संकट में बदल सकता है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब हाई कोर्ट ने डीए भुगतान पर क्या आदेश दिया था?
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2026 की सिविल रिट याचिका में फैसला सुनाते हुए पंजाब सरकार को सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का बकाया महंगाई भत्ता (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) 15 दिन के भीतर अदा करने का निर्देश दिया था। अदालत ने 'ईमानदारी से अनुपालन' की शर्त रखी थी।
वित्त विभाग के 17 अगस्त के पत्र पर विवाद क्यों है?
वित्त विभाग ने 17 अगस्त को सभी प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिया कि हाई कोर्ट के आदेश से उत्पन्न किसी भी निर्देश को विभाग की पूर्व सहमति के बिना लागू न करें। भाजपा का कहना है कि यह शर्त अदालती आदेश का हिस्सा नहीं है और इस तरह कार्यपालिका न्यायिक आदेश को निष्प्रभावी नहीं कर सकती।
इस विवाद से कौन प्रभावित हो रहे हैं?
पंजाब के सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी सीधे प्रभावित हैं, जिनका बकाया डीए और डीआर वर्षों से लंबित बताया जा रहा है। यदि सरकार अदालती समय-सीमा में भुगतान नहीं करती, तो मामला अवमानना याचिका तक जा सकता है।
भाजपा ने सरकार से क्या माँग की है?
पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने माँग की है कि AAP सरकार हाई कोर्ट के आदेश का तत्काल, पूर्ण और अक्षरशः पालन करे। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को चेतावनी दी कि अदालती आदेश वैकल्पिक नहीं होते।
क्या कोई प्रशासनिक परिपत्र हाई कोर्ट के आदेश को रोक सकता है?
कानूनी सिद्धांत के अनुसार, कोई भी आंतरिक प्रशासनिक निर्देश किसी संवैधानिक अदालत के आदेश को खत्म, कमज़ोर या स्थगित नहीं कर सकता। भाजपा ने इसी आधार पर वित्त विभाग के पत्र को असंवैधानिक बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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