प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब सरकार को दी 48 घंटे की चेतावनी, अप्रैल वेतन तुरंत जारी करें

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प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब सरकार को दी 48 घंटे की चेतावनी, अप्रैल वेतन तुरंत जारी करें

सारांश

कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को सार्वजनिक रूप से घेरते हुए 48 घंटे में कर्मचारियों का अप्रैल वेतन जारी करने की चेतावनी दी। जीएसटी रिकॉर्ड राजस्व के दावों के बीच वेतन न मिलना पंजाब सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक मुश्किल बन सकता है।

मुख्य बातें

प्रताप सिंह बाजवा ने 4 मई 2026 को पंजाब सरकार को 48 घंटे में कर्मचारियों का अप्रैल वेतन जारी करने की चेतावनी दी।
बाजवा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनकी सलाह अनसुनी कर डीए पर उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी।
वित्त मंत्री के जीएसटी रिकॉर्ड संग्रह के दावे के बावजूद कर्मचारियों को अप्रैल माह का वेतन नहीं मिला।
AAP सांसदों के BJP में शामिल होने पर बाजवा ने कहा — यह विचारधारा नहीं, "पंजाब के खजाने की सुनियोजित लूट" की लड़ाई है।
बाजवा ने BJP और केंद्रीय जाँच एजेंसियों पर भी कथित तौर पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया।

पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने 4 मई 2026 को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को कड़ी चेतावनी देते हुए माँग की कि पंजाब सरकार के कर्मचारियों को 48 घंटों के भीतर उनका अप्रैल माह का वेतन जारी किया जाए। बाजवा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर यह चेतावनी सार्वजनिक रूप से पोस्ट की।

बाजवा ने क्या कहा

कांग्रेस नेता बाजवा ने अपनी पोस्ट में लिखा, "मुख्यमंत्री भगवंत मान, आपने विधानसभा में मुझसे सलाह माँगी थी और मैंने सद्भावनापूर्वक सलाह दी थी। आपने उसे अनसुना कर दिया और कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) पर उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी।" उन्होंने आगे कहा कि पंजाब सरकार के कर्मचारियों को अभी तक अप्रैल का वेतन नहीं मिला है और सरकार को अगले 48 घंटों के भीतर यह वेतन जारी करना चाहिए।

बाजवा ने वित्त मंत्री के उस दावे पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि जीएसटी संग्रह और राजस्व रिकॉर्ड ऊँचाई पर हैं। उन्होंने पूछा कि यदि राजस्व इतना मज़बूत है, तो सरकार चलाने वाले कर्मचारी अपने हक के वेतन का इंतज़ार क्यों कर रहे हैं।

आप में फूट पर बाजवा की प्रतिक्रिया

इससे पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के कई सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने पर बाजवा ने कहा था कि राज्यसभा में AAP के भीतर चल रही फूट ने पार्टी का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है। उनके अनुसार, इन घटनाक्रमों ने यह पुष्टि कर दी है कि पंजाब में AAP की राजनीति शासन-प्रशासन से कम और राज्य के खजाने तक पहुँचने की आंतरिक होड़ से अधिक प्रेरित रही है।

बाजवा ने यह भी कहा कि राघव चड्ढा ने दावा किया है कि वह पार्टी के भीतर चल रही कथित गलत हरकतों में भागीदार नहीं बने रह सकते थे, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान का आरोप है कि चड्ढा और अन्य लोग इसलिए पार्टी छोड़ गए क्योंकि उन्हें "भ्रष्टाचार करने की छूट" नहीं दी गई।

भ्रष्टाचार के आरोपों पर बाजवा का विश्लेषण

बाजवा ने कहा कि जब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हों, तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "यह लड़ाई कभी भी विचारधारा को लेकर नहीं थी। यह हमेशा से पैसे और पंजाब के सरकारी खजाने की सुनियोजित लूट को लेकर रही है।"

बाजवा ने BJP पर भी आरोप लगाया कि उसने इस पूरे घटनाक्रम में अपनी भूमिका निभाई है, जिसे उन्होंने 'जनता के जनादेश की सौदेबाजी' करार दिया। उनका कथित तौर पर यह भी आरोप था कि केंद्रीय जाँच एजेंसियों का इस्तेमाल अवैध रूप से जमा की गई संपत्ति का पता लगाने के बजाय लोगों पर दबाव बनाने और उन्हें राजनीतिक रूप से अपने पाले में लाने के लिए किया गया।

आगे क्या होगा

यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि भगवंत मान सरकार 48 घंटे की इस चेतावनी पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है। पंजाब में कर्मचारी संगठन लंबे समय से डीए बकाया और समय पर वेतन जारी करने की माँग को लेकर सक्रिय हैं, और बाजवा का यह कदम विधानसभा सत्र से बाहर भी विपक्षी दबाव को बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह विरोधाभास विपक्ष के लिए सबसे धारदार हथियार बन जाता है। AAP के भीतर फूट और भ्रष्टाचार के परस्पर आरोपों ने पंजाब की राजनीति को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जवाबदेही तय होनी चाहिए — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर कर्मचारियों की असल तकलीफ को राजनीतिक बयानबाजी के शोर में दबा देती है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब सरकार को क्या चेतावनी दी?
बाजवा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को 48 घंटों के भीतर पंजाब सरकार के कर्मचारियों का अप्रैल माह का वेतन जारी करने की चेतावनी दी। यह चेतावनी उन्होंने 4 मई 2026 को एक्स (X) पर सार्वजनिक रूप से पोस्ट की।
पंजाब कर्मचारियों का अप्रैल वेतन क्यों नहीं मिला?
इस बारे में पंजाब सरकार की ओर से कोई आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। विपक्ष के नेता बाजवा ने इस देरी को सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया, विशेषकर तब जब वित्त मंत्री ने जीएसटी संग्रह के रिकॉर्ड स्तर पर होने का दावा किया था।
डीए और उच्च न्यायालय के आदेश का विवाद क्या है?
बाजवा के अनुसार, पंजाब सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) से संबंधित उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी, जबकि उन्होंने सरकार को इस मामले में सद्भावनापूर्वक सलाह दी थी। इस विवाद का सटीक कानूनी विवरण सरकार की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया है।
AAP सांसदों के BJP में शामिल होने पर बाजवा ने क्या कहा?
बाजवा ने कहा कि यह घटनाक्रम पंजाब में AAP की राजनीति के असली चरित्र को उजागर करता है — जो उनके अनुसार विचारधारा नहीं, बल्कि राज्य के खजाने तक पहुँचने की आंतरिक होड़ से प्रेरित रही है। उन्होंने BJP पर भी 'जनादेश की सौदेबाजी' का आरोप लगाया।
बाजवा ने केंद्रीय जाँच एजेंसियों पर क्या आरोप लगाए?
बाजवा ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि केंद्रीय जाँच एजेंसियों का इस्तेमाल न्याय सुनिश्चित करने के बजाय लोगों पर दबाव बनाने और उन्हें राजनीतिक रूप से अपने पाले में लाने के लिए किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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