डीए मामला: पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने हाईकोर्ट से मांगी बिना शर्त माफी, 12 अक्टूबर को सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में महंगाई भत्ता (डीए) विवाद में 9 अक्टूबर 2026 को एक अहम घटनाक्रम सामने आया, जब पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा की ओर से बिना शर्त माफी की पेशकश की गई। अदालत ने निर्देश दिया कि आदेशों का पालन न करने और संभावित आपराधिक अवमानना से जुड़े इस मामले को रोस्टर के तहत संबंधित बेंच के सामने रखा जाए। अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
सुनवाई के दौरान राज्य के वकील विकास सिंह ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) में कमियों को दूर करने के बारे में गलत बयान देने का मुख्य सचिव का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय उचित समझे तो अधिकारी बिना शर्त माफी माँगने को पूरी तरह तैयार हैं।
चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की गरिमा और अधिकार की रक्षा प्राथमिक दायित्व है। बेंच ने कहा, 'इस कोर्ट की जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि कोर्ट की गरिमा पर किसी भी तरह की आंच न आए। यहाँ तक कि कार्यवाही की उचितता या आचरण पर सवाल उठाने वाले सुझावों से भी सावधानी से निपटा जाना चाहिए।'
विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद तब उभरा जब हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को डीए मामले में दिए गए अपने फैसले के विरुद्ध राज्य की अपील की स्थिति को लेकर मुख्य सचिव के बयान पर सवाल उठाए। राज्य ने हाईकोर्ट को सूचित किया था कि उसने एसएलपी के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है।
हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) की ओर से दायर अपीलों में अभी भी तकनीकी कमियाँ बनी हुई थीं। इसी विसंगति ने अवमानना की संभावित कार्यवाही का रास्ता खोल दिया।
अदालत का रुख
खंडपीठ ने इस मामले को अवमानना की कार्यवाही देखने वाली रोस्टर बेंच के सामने रखने का निर्देश देते हुए कहा, 'ऐसे हालात में हमें यह सही लगता है कि इस मामले को रोस्टर के अनुसार अधिकार क्षेत्र रखने वाली उस कोर्ट के सामने रखा जाए जो ऐसे मामलों को देखती है।' यह टिप्पणी इस बात का संकेत है कि अदालत इस मसले को सामान्य सुनवाई के दायरे से परे मानती है।
आम जनता और कर्मचारियों पर असर
डीए विवाद का सीधा संबंध पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते के भुगतान से है। गौरतलब है कि यह मामला लंबे समय से अदालत में लंबित है और इससे राज्य के हज़ारों कर्मचारी प्रभावित हैं। अवमानना की संभावित कार्यवाही से सरकार पर अनुपालन का दबाव और बढ़ सकता है।
क्या होगा आगे
12 अक्टूबर 2026 को रोस्टर बेंच के समक्ष होने वाली सुनवाई में तय होगा कि आपराधिक अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाएगी या नहीं। मुख्य सचिव की माफी की पेशकश को अदालत किस रूप में स्वीकार करती है, यह इस पूरे प्रकरण की आगे की दिशा निर्धारित करेगा।