झारखंड हाईकोर्ट: जेलों में रिक्त पद न भरने पर गृह सचिव के खिलाफ अवमानना कार्यवाही 7 दिसंबर तक स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को राज्य की जेलों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को न भरे जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए गृह सचिव वंदना दादेल के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही की अगली सुनवाई 7 दिसंबर 2026 तक के लिए स्थगित कर दी। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की खंडपीठ ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि इस तिथि से पहले हाईकोर्ट के आदेश का पूर्ण अनुपालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
सुनवाई में क्या हुआ
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शो कॉज का लिखित जवाब दाखिल किया। उन्होंने पीठ को बताया कि गृह विभाग ने असिस्टेंट जेलर और जेल वार्डन के रिक्त पदों की भर्ती के लिए विभिन्न जोन में फिजिकल टेस्ट की तिथियाँ निर्धारित कर दी गई हैं और प्रक्रिया तय समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाएगी। हालाँकि, अदालत ने सरकार के इस जवाब पर असंतोष व्यक्त करते हुए मामले को गंभीरता से लिया।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने भी अदालत में अपना पक्ष प्रस्तुत किया।
पृष्ठभूमि और पहले के आदेश
गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को राज्य सरकार और संबंधित चयन आयोगों को छह महीने का अल्टीमेटम दिया था कि राज्य की सभी जेलों में रिक्त पदों को अनिवार्य रूप से भरा जाए। यह आदेश हाईकोर्ट द्वारा जेल सुधारों और मॉडल जेल मैनुअल के क्रियान्वयन से संबंधित स्वतः संज्ञान वाद के अंतर्गत दिया गया था।
पिछली सुनवाई में जब सरकार ने बार-बार समय विस्तार की माँग की, तो खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए गृह सचिव वंदना दादेल और JSSC सचिव सुधीर कुमार गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अदालत ने दोनों अधिकारियों से पूछा था कि 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971' के तहत उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए, और एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था।
मामले का व्यापक संदर्भ
यह मामला झारखंड की जेल व्यवस्था में गहरी खामियों को उजागर करता है। रिक्त पदों के कारण जेल कर्मचारियों पर अत्यधिक कार्यभार है, जिससे सुरक्षा और प्रबंधन दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में जेल सुधार और कैदियों के अधिकारों पर व्यापक बहस जारी है।
हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान वाद इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका अब जेल प्रशासन को केवल कार्यपालिका के विवेक पर नहीं छोड़ रही — बल्कि संवैधानिक दायित्व के तौर पर देख रही है।
आगे क्या होगा
अब सरकार के पास 7 दिसंबर 2026 तक का समय है कि वह हाईकोर्ट के आदेश का पूर्ण अनुपालन साबित करे। यदि इस तिथि तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो गृह सचिव वंदना दादेल और JSSC सचिव सुधीर कुमार गुप्ता के खिलाफ औपचारिक अवमानना कार्यवाही आगे बढ़ सकती है। अदालत की इस सख्ती ने राज्य सरकार पर समयबद्ध कार्रवाई का दबाव काफी बढ़ा दिया है।