चुनाव आयोग के SIR स्पष्टीकरण का चिराग पासवान ने किया स्वागत, बोले — विपक्ष फैला रहा भ्रम
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने 26 सितंबर 2026 को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चुनाव आयोग (ECI) के बिंदुवार स्पष्टीकरण का स्वागत किया और कहा कि आयोग ने जनता की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि विपक्षी दल इस मुद्दे पर लोगों के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं।
चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण का स्वागत
पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि जनता के मन में जब भी कोई सवाल या चिंता उठती है, उसे सामने रखना और उसका स्पष्ट समाधान सुनिश्चित करना उनका दायित्व है। उन्होंने कहा कि एसआईआर को लेकर जनता की जो चिंताएँ उनके सामने आई थीं, उन्हें इसी जिम्मेदारी के साथ चुनाव आयोग के समक्ष रखा गया था।
उनके अनुसार, आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया, तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति और कैबिनेट सचिव से हुई बैठक से जुड़े तथ्यों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग की यह स्पष्टता लोकतंत्र में जनता के विश्वास को और मजबूत करती है।
एक दिन पहले की थी स्पष्टता की अपील
25 सितंबर को पासवान ने चुनाव आयोग से खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की अपील की थी। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में सवाल पैदा होना लोकतंत्र के हित में नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि उनकी चिंता विपक्ष के आरोपों को लेकर नहीं, बल्कि आम जनता के मन में उठने वाले सवालों को लेकर है।
गौरतलब है कि पासवान ने यह भी कहा था कि वे सरकार का हिस्सा होने के नाते किसी स्वतंत्र संवैधानिक संस्था का बचाव नहीं करना चाहते, लेकिन चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह जनता के मन में पैदा हुए संदेहों को दूर करे।
विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप
पासवान ने विपक्षी दलों पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि वे जनता के बीच भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं और चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण ने कहीं न कहीं उनके सवालों का जवाब दे दिया है। उन्होंने यह भी पूछा कि जब चुनाव आयोग के खिलाफ सवाल उठाए जाते हैं, तो विपक्ष उन राज्यों के बारे में जवाब क्यों नहीं देता जहाँ उनकी सरकारें हैं।
एनडीए सहयोगियों का भी एकसुर
पासवान अकेले नहीं हैं — राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेताओं ने भी विवाद के बीच चुनाव आयोग से पारदर्शिता और जनता का भरोसा बनाए रखने की आवश्यकता जताई थी। यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और NDA के भीतर से उठ रही पारदर्शिता की माँग यह संकेत देती है कि आने वाले दिनों में एसआईआर की प्रक्रिया और इसके राजनीतिक निहितार्थ सार्वजनिक बहस के केंद्र में बने रहेंगे।