सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर एनडीए का पलटवार: 'विपक्ष के पास कोई तर्क-साक्ष्य नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और विशेष सघन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों के जवाब में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने 27 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में कड़ी प्रतिक्रिया दी। एनडीए नेताओं ने एकस्वर में कहा कि चुनाव आयोग ने सभी बिंदुओं को स्पष्ट कर दिया है और विपक्ष के आरोप बिना किसी ठोस साक्ष्य के हैं।
भाजपा का रुख: संवैधानिक संस्थाओं की रक्षा ज़रूरी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता प्रतुल शाहदेव ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को दी गई कानूनी सुरक्षा किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि पूरी संस्था के लिए है। उन्होंने कहा, 'यह सुरक्षा संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि जो भी सरकार सत्ता में हो, चुनाव आयुक्तों को निशाना न बनाया जाए।'
शाहदेव ने यह भी आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में जमशेदपुर में कई कथित अफगान मतदाताओं की पहचान की गई थी, जिसने इस पूरे मुद्दे को विवादास्पद बनाया। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की इस्तीफे की मांग को 'बेतुकी' करार दिया।
एसआईआर और बंगाल विवाद पर भाजपा का स्पष्टीकरण
एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए प्रतुल शाहदेव ने कहा कि बंगाल में यह पुनरीक्षण सर्वोच्च न्यायालय के संरक्षण में संपन्न हुआ था। उन्होंने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि उनकी सरकार ने 'सनातनियों को निशाना बनाया।' शाहदेव के अनुसार, मतदाता सूची से मृत व्यक्तियों के नाम हटाने की प्रक्रिया पर विपक्ष की आपत्ति समझ से परे है।
जदयू की प्रतिक्रिया: 'पराजितों की व्याकुलता'
जनता दल (यूनाइटेड) — जेडीयू — के नेता श्याम रजक ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त सहित दोनों अन्य आयुक्तों ने समस्त स्थिति स्पष्ट कर दी है और जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी सभी बिंदुओं का खंडन कर दिया है। उन्होंने कहा, 'इसके बाद जिन लोगों की ओर से ऐसी बातें की जा रही हैं, उनके पास कोई तर्क और साक्ष्य नहीं है।'
रजक ने 'इंडिया' गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि 'पराजित लोगों की व्याकुलता इतनी चरम सीमा तक पहुँच गई है कि इन्हें संविधान, नियम और देश की जनता से कोई मतलब नहीं।' उन्होंने इसे 'सत्ता-लालसा' से प्रेरित राजनीति बताया।
भाजपा नेता राम कदम और जेडीयू सांसद का बयान
BJP नेता राम कदम ने कहा कि विपक्ष तथ्यों और मुद्दों के आधार पर सरकार की आलोचना करने में असमर्थ है, इसलिए लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने चुनौती दी कि यदि विपक्ष के पास एसआईआर को लेकर कोई ठोस सबूत है, तो वह सामने रखे।
जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने कहा कि विपक्ष लगातार एकतरफा आरोप लगा रहा है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी चुनाव हार चुकी हैं और उनकी पार्टी भी बिखर चुकी है, ऐसे में विपक्षी नेताओं को जनता के बीच जाना चाहिए, न कि संस्थाओं पर अनावश्यक दबाव डालना चाहिए।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग पर विपक्षी दलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कानूनी व राजनीतिक बहस जारी है। गौरतलब है कि विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच यह तनाव आगामी राज्य चुनावों की पृष्ठभूमि में और गहरा हो सकता है। सर्वोच्च न्यायालय में इससे संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई का भी इंतजार है, जो इस मसले की दिशा तय करेगी।