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चुनाव आयोग BJP की इकाई की तरह काम कर रहा है: कांग्रेस नेता उदित राज का सीधा हमला

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चुनाव आयोग BJP की इकाई की तरह काम कर रहा है: कांग्रेस नेता उदित राज का सीधा हमला

सारांश

कांग्रेस नेता उदित राज ने चुनाव आयोग पर BJP की इकाई की तरह काम करने का सीधा आरोप लगाते हुए पश्चिम बंगाल, बिहार, गोवा और कर्नाटक से ठोस उदाहरण पेश किए। पश्चिम बंगाल में 38 लाख वंचित मतदाताओं में से 93% के वास्तविक पाए जाने का दावा इस विवाद का केंद्र बिंदु बना है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता उदित राज ने 26 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग BJP की इकाई की तरह काम कर रहा है।
पश्चिम बंगाल में 38 लाख मतदाता शुद्धिकरण के चलते मतदान से वंचित रहे; बाद के सत्यापन में 93% वास्तविक पाए गए।
बिहार में शुद्धिकरण के बाद भी 1.32 करोड़ मतदाता रिकॉर्ड में नाम, पता या माता-पिता के नाम में गलतियाँ पाई गईं।
कर्नाटक में BJP से जुड़े लोगों के पास मतदाता नाम जोड़ने वाले वेबसाइट कनेक्शन का कथित मामला पकड़े जाने का दावा।
उदित राज ने माँग की कि पूरी मतदाता सूची इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने SIR विवाद को विपक्ष के बेबुनियाद आरोपों पर आधारित बताया।

कांग्रेस नेता उदित राज ने 26 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एक इकाई की तरह काम कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि फॉर्म-6 में किए गए बदलाव चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और इसी कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कटे हैं। यह बयान तब आया जब आयोग ने विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) को लेकर तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति का दावा किया था।

मतदाता सूची पर विवाद के केंद्र में क्या है

उदित राज ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि 38 लाख मतदाता ऐसे थे जिनका सत्यापन अथवा 'शुद्धिकरण' नहीं हुआ और वे मतदान के अधिकार से वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि बाद में हुए सत्यापन में इनमें से 93 प्रतिशत तक मतदाता वास्तविक पाए गए। उनका सवाल था — यदि ये मतदाता वैध थे, तो चुनाव आयोग के पास उनके मतदान से वंचित रहने का क्या जवाब है।

उन्होंने बिहार का भी उल्लेख किया और कहा कि शुद्धिकरण के बाद भी लगभग 1.32 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड में पता, माता-पिता के नाम या मतदाता के नाम से जुड़ी गलतियाँ पाई गईं। उन्होंने आयोग से इस स्थिति पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।

राज्यों से उठाए गए विशिष्ट उदाहरण

गोवा के संदर्भ में उदित राज ने दावा किया कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी 97 मतदाताओं के नाम जोड़ने का प्रयास करते रहे, किंतु केंद्रीय स्तर पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।

कर्नाटक के बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि BJP से जुड़े कुछ लोगों के पास वेबसाइट का ऐसा कनेक्शन था जिसके ज़रिए मतदाताओं के नाम जोड़ने की सुविधा थी, और यह मामला कथित तौर पर पकड़ा गया। उन्होंने एक ही व्यक्ति के कई स्थानों पर मतदान करने के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने माँग की कि यदि आयोग को मतदाता सूची में सब कुछ सही लगता है, तो पूरी सूची इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वेबसाइट पर सार्वजनिक की जानी चाहिए।

BJP और केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर पलटवार

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी की ओर से SIR विवाद को विपक्ष के 'बेबुनियाद आरोपों' पर आधारित बताए जाने पर उदित राज ने कहा कि कांग्रेस ने कई ठोस सवाल उठाए हैं और आयोग को उन सवालों का जवाब देना चाहिए। BJP द्वारा यह आरोप लगाए जाने पर कि कांग्रेस की लड़ाई संविधान या लोकतंत्र के लिए नहीं बल्कि गांधी परिवार को सत्ता दिलाने के लिए है, उदित राज ने कहा कि 2009 में राहुल गांधी के पास प्रधानमंत्री बनने का अवसर था किंतु उन्होंने पद स्वीकार नहीं किया। उन्होंने सोनिया गांधी का भी उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी परिवार ने देश की सेवा की है।

जयशंकर और मोदी पर टिप्पणी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर के संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक पाकिस्तानी पत्रकार को दिए जवाब पर उदित राज ने कहा कि वह जवाब उचित था। हालाँकि उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाने के दावे पर इसी तरह का स्पष्ट जवाब क्यों नहीं दिया जाता।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भजन क्लबिंग कार्यक्रम में शामिल होने पर उदित राज ने आरोप लगाया — जो कि कांग्रेस का अपना पक्ष है — कि मोदी कथित तौर पर फर्जी वोटरों, चुनाव आयोग, डेटा और EVM के दुरुपयोग के ज़रिए सत्ता में आए हैं। ये सभी आरोप उदित राज के अपने बयान हैं और चुनाव आयोग तथा BJP ने इन्हें खारिज किया है।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश के कई राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है। गौरतलब है कि विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग से अपेक्षा है कि वह इन आरोपों पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो जवाबदेही के उस शून्य को उजागर करता है जिसमें दोनों पक्षों के दावे बिना सत्यापन के तैरते रहते हैं।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उदित राज ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस नेता उदित राज ने 26 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग BJP की एक इकाई की तरह काम कर रहा है और फॉर्म-6 में किए गए बदलाव आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। उनका कहना है कि इसी कारण बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल और बिहार के मतदाता विवाद में क्या मामला है?
उदित राज के अनुसार पश्चिम बंगाल में 38 लाख मतदाताओं को शुद्धिकरण के नाम पर मतदान से वंचित किया गया, जिनमें से 93% बाद में वास्तविक पाए गए। बिहार में शुद्धिकरण के बाद भी 1.32 करोड़ मतदाता रिकॉर्ड में नाम, पता या माता-पिता के नाम से संबंधित गलतियाँ पाई गईं।
SIR (विशेष सारांश पुनरीक्षण) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण चुनाव आयोग की वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों को अद्यतन और शुद्ध किया जाता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वैध मतदाताओं के नाम भी हटाए जा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि सभी फैसले तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
कर्नाटक और गोवा में क्या कथित अनियमितताएँ बताई गई हैं?
उदित राज ने दावा किया कि कर्नाटक में BJP से जुड़े कुछ लोगों के पास वेबसाइट का ऐसा कनेक्शन था जिससे मतदाता नाम जोड़े जा सकते थे, और यह मामला कथित तौर पर पकड़ा गया। गोवा में मुख्य निर्वाचन अधिकारी 97 मतदाताओं के नाम जोड़ने का प्रयास करते रहे, किंतु केंद्रीय स्तर पर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
BJP और सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने SIR विवाद को विपक्ष के बेबुनियाद आरोपों पर आधारित बताया। BJP ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि उसकी लड़ाई संविधान या लोकतंत्र के लिए नहीं, बल्कि गांधी परिवार को सत्ता में वापस लाने के लिए है।
राष्ट्र प्रेस
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