अल-फलाह ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग: दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को अल-फलाह ट्रस्ट मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। सिद्दीकी ने अपनी पत्नी के स्टेज-चार ओवेरियन कैंसर का हवाला देते हुए मानवीय आधार पर छह सप्ताह की अस्थायी रिहाई की मांग की है।
सुनवाई का घटनाक्रम
जस्टिस सौरभ बनर्जी की सिंगल जज बेंच ने दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा। सिद्दीकी की ओर से सीनियर एडवोकेट विक्रम चौधरी पेश हुए, जिन्हें एडवोकेट विश्वेंद्र तोमर, तालिब मुस्तफा और अभिषेक सिंह ने जानकारी दी थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का पक्ष सीनियर एडवोकेट जोहेब हुसैन ने रखा।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही दिल्ली हाईकोर्ट ने सिद्दीकी की दो अंतरिम जमानत याचिकाओं को जस्टिस बनर्जी की बेंच में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था, क्योंकि उनकी एक नियमित जमानत याचिका भी उसी जज के समक्ष लंबित है।
बचाव पक्ष की दलीलें
सीनियर एडवोकेट चौधरी ने अदालत को बताया कि सिद्दीकी की पत्नी उस्मा अख्तर स्टेज-चार ओवेरियन कैंसर से जूझ रही हैं और वे उनकी एकमात्र मुख्य देखभालकर्ता हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस कठिन समय में परिवार को उनकी उपस्थिति और सहयोग की सख्त आवश्यकता है।
ईडी और ट्रायल कोर्ट का रुख
ईडी ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। इससे पहले साकेत कोर्ट के एक एडिशनल सेशन जज ने 9 जून को सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मेडिकल दस्तावेजों में अख्तर की बीमारी को 'स्थिर' बताया गया है और उपचार का 'अच्छा असर' हो रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिद्दीकी यह साबित नहीं कर पाए कि उनकी पत्नी की देखभाल के लिए कोई अन्य व्यक्ति उपलब्ध नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी के अनुसार, यह जांच दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर पर आधारित है, जिनमें अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संस्थाओं पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं। एजेंसी का आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने एनएएसी की एक्सपायर हो चुकी मान्यता को वैध बताया, अस्तित्वहीन यूजीसी मान्यता का दावा किया और मेडिकल कॉलेज के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की मंजूरी में गड़बड़ी की।
ईडी का दावा है कि 2016-17 से 2024-25 के बीच ₹493.24 करोड़ की अवैध कमाई हुई, जिसे कथित तौर पर सिद्दीकी और उनके परिवार से जुड़ी संस्थाओं के ज़रिए अन्यत्र भेजा गया। इस वर्ष की शुरुआत में ईडी ने अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और सिद्दीकी की ₹39.45 करोड़ की संपत्ति जब्त की थी। इसके अलावा यूनिवर्सिटी की ₹144 करोड़ से अधिक मूल्य की ज़मीन और इमारतें भी ज़ब्त की जा चुकी हैं।
आगे क्या होगा
अंतरिम जमानत पर आदेश जल्द अपेक्षित है। सिद्दीकी द्वारा दायर नियमित जमानत याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में 29 और 30 जुलाई को सुनवाई निर्धारित है। यह मामला उच्च शिक्षा संस्थानों में वित्तीय अनियमितताओं की जांच की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिस पर ईडी की नज़र लगातार बनी हुई है।