राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील की
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने 19 मई 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। विभाग ने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराहट में ईंधन की जमाखोरी न करें।
मुख्य घटनाक्रम
विभाग के सचिव अंबरीश कुमार ने बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) — तीनों सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ — राजस्थान के सभी जिलों में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कोई कमी नहीं है।
कीमतों का अंतर और उसका असर
अंबरीश कुमार के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल पंपों पर डीजल की खुदरा कीमत लगभग ₹94 प्रति लीटर है, जबकि नायरा के पंपों पर यही डीजल करीब ₹97 प्रति लीटर पर उपलब्ध है। इस मूल्य अंतर के कारण उपभोक्ता सरकारी पंपों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जिससे वहाँ माँग बढ़ी है।
गौरतलब है कि संस्थागत डीजल की कीमत फिलहाल लगभग ₹160 प्रति लीटर है। इस भारी अंतर के चलते कई उद्योग और थोक उपभोक्ता भी खुदरा पंपों से डीजल खरीदने लगे हैं, जिससे कुछ स्थानों पर अतिरिक्त दबाव उत्पन्न हुआ है। तेल कंपनियाँ आम उपभोक्ताओं की ज़रूरतों को प्राथमिकता देते हुए नियमित आपूर्ति बनाए हुए हैं।
माँग में उल्लेखनीय वृद्धि
तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के अनुसार राजस्थान में पिछले वर्ष की तुलना में ईंधन की माँग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। IOCL ने राज्य में पेट्रोल बिक्री में 28% और डीजल बिक्री में 43% की वृद्धि दर्ज की है — जो राष्ट्रीय औसत (क्रमशः 20.2% और 20.8%) से काफी अधिक है।
HPCL ने पेट्रोल बिक्री में 13.7% और डीजल बिक्री में 16.8% की वृद्धि दर्ज की, जबकि BPCL ने पेट्रोल में 24% और डीजल में 30% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में औद्योगिक और कृषि गतिविधियाँ तेज़ हुई हैं।
सरकार की अपील और आश्वासन
सरकार ने नागरिकों को भरोसा दिलाया है कि बढ़ती माँग के बावजूद राज्य में ईंधन की कोई कमी नहीं है। अंबरीश कुमार ने विशेष रूप से अनुरोध किया कि लोग अफवाहों के आधार पर अतिरिक्त ईंधन न खरीदें, क्योंकि इससे पंपों पर अनावश्यक दबाव बनता है और वास्तविक ज़रूरतमंद उपभोक्ताओं को असुविधा होती है।
आगे क्या
तीनों सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियाँ राजस्थान में आपूर्ति श्रृंखला की निरंतर निगरानी कर रही हैं। यदि माँग इसी गति से बढ़ती रही, तो विशेषज्ञों का मानना है कि थोक और खुदरा ईंधन मूल्यों के अंतर पर नीतिगत समीक्षा आवश्यक हो सकती है।