NSE पर रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 13 करोड़ के पार, सात महीने में जुड़े 1 करोड़ नए निवेशक

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NSE पर रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 13 करोड़ के पार, सात महीने में जुड़े 1 करोड़ नए निवेशक

सारांश

भारतीय पूंजी बाजार में निवेशकों की बाढ़ आ गई है — NSE पर रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 13 करोड़ के पार पहुँच गई है, और यह उपलब्धि महज सात महीनों में हासिल हुई। युवा, महिलाएँ और टियर-3 शहरों के निवेशक इस बदलाव की अगुवाई कर रहे हैं — यह सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, भारत के वित्तीय लोकतंत्र की नई तस्वीर है।

Key Takeaways

NSE पर यूनिक रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 27 अप्रैल 2026 को 13 करोड़ के पार पहुँची। 12 करोड़ से 13 करोड़ का सफर महज 7 महीनों में पूरा हुआ; पिछले 5 वर्षों में 26.4% CAGR से वृद्धि। निवेशकों की औसत आयु घटकर 33 वर्ष ; 40% निवेशक 30 वर्ष से कम उम्र के; हर चार में से एक निवेशक महिला । महाराष्ट्र ( 2 करोड़ ), उत्तर प्रदेश ( 1.5 करोड़ ) और गुजरात ( 1.1 करोड़ ) शीर्ष राज्य; 99.85% पिन कोड्स तक पहुँच। वित्त वर्ष 2026 में 7.2 करोड़ नए SIP अकाउंट; मासिक SIP निवेश ₹29,132 करोड़ — एक दशक में 8 गुना वृद्धि। NSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूँजीकरण ₹460.6 लाख करोड़ ; 18% CAGR से विस्तार।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 27 अप्रैल 2026 को भारतीय पूंजी बाजार में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया — एक्सचेंज पर यूनिक रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या 13 करोड़ (130 मिलियन) के पार पहुँच गई। उल्लेखनीय यह है कि सितंबर 2025 में 12 करोड़ निवेशकों का आँकड़ा पार करने के महज सात महीने के भीतर यह उपलब्धि हासिल हुई, जो भारतीय शेयर बाजार में आम निवेशकों की तेज़ी से बढ़ती रुचि को रेखांकित करती है।

ट्रेडिंग अकाउंट्स और निवेश की रफ़्तार

NSE के एक आधिकारिक नोट के अनुसार, 25 अप्रैल 2026 तक एक्सचेंज पर कुल क्लाइंट कोड (ट्रेडिंग अकाउंट्स) की संख्या 25.7 करोड़ तक पहुँच चुकी है, जबकि फरवरी 2026 में ही यह 25 करोड़ का आँकड़ा पार कर चुकी थी। पिछले पाँच वर्षों (वित्त वर्ष 2021 से वित्त वर्ष 2026) में निवेशकों की संख्या 26.4 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ी है, जो इससे पहले के पाँच वर्षों (वित्त वर्ष 2016–वित्त वर्ष 2021) की तुलना में कहीं अधिक है। गौरतलब है कि जहाँ पहले 1 करोड़ नए निवेशक जोड़ने में कई वर्ष लग जाते थे, वहीं अब यह काम औसतन 6–8 महीनों में हो रहा है।

निवेशकों की बदलती प्रोफाइल

NSE के आँकड़ों के अनुसार निवेशकों की प्रोफाइल में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है। निवेशकों की औसत आयु घटकर 33 वर्ष रह गई है, जो वित्त वर्ष 2021 में 36 वर्ष थी। करीब 40 प्रतिशत निवेशक 30 वर्ष से कम उम्र के हैं, जो दर्शाता है कि युवा पीढ़ी तेज़ी से बाजार की ओर आकर्षित हो रही है। इसके साथ ही, अब हर चार में से एक निवेशक महिला है — वित्तीय बाजारों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का यह एक सशक्त संकेत है।

भौगोलिक विस्तार: टियर-2, टियर-3 शहरों तक पहुँच

निवेशकों की संख्या अब देश के 99.85 प्रतिशत पिन कोड्स तक पहुँच चुकी है, जो यह साबित करता है कि शेयर बाजार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा। राज्यवार आँकड़ों में महाराष्ट्र 2 करोड़ निवेशकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि उत्तर प्रदेश (1.5 करोड़) और गुजरात (1.1 करोड़) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में निवेशकों की संख्या में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस भौगोलिक विस्तार की सबसे उल्लेखनीय कड़ी है।

SIP और म्यूचुअल फंड में उछाल

निवेशकों का रुझान अनुशासित और दीर्घकालिक निवेश की ओर स्पष्ट रूप से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2026 के दौरान 7.2 करोड़ नए SIP अकाउंट खोले गए। मासिक SIP निवेश बढ़कर ₹29,132 करोड़ तक पहुँच गया है, जो पिछले एक दशक में आठ गुना वृद्धि को दर्शाता है। इसी अवधि में NSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूँजीकरण 18 प्रतिशत CAGR से बढ़कर ₹460.6 लाख करोड़ हो गया है। पिछले पाँच वर्षों में निफ्टी 50 इंडेक्स ने 10.8 प्रतिशत और निफ्टी 500 इंडेक्स ने 13.3 प्रतिशत का औसत वार्षिक रिटर्न दिया है।

जागरूकता और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका

NSE के चीफ बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर (CBDO) श्रीराम कृष्णन ने कहा कि

Point of View

लेकिन रजिस्टर्ड निवेशकों की संख्या और सक्रिय निवेशकों की संख्या में अंतर को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए — बड़ी संख्या में खाते खुलते हैं, पर निष्क्रिय भी रहते हैं। इसके साथ ही, F&O सेगमेंट में खुदरा निवेशकों के नुकसान पर SEBI की चिंताएँ अभी भी प्रासंगिक हैं। वित्तीय समावेश का असली पैमाना यह होगा कि टियर-3 शहरों और पूर्वोत्तर के नए निवेशक जोखिम-समायोजित रिटर्न अर्जित कर पाते हैं या नहीं — महज खाता खोलना पर्याप्त नहीं है।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

NSE पर 13 करोड़ रजिस्टर्ड निवेशकों का मील का पत्थर कब हासिल हुआ?
NSE ने 27 अप्रैल 2026 को 13 करोड़ यूनिक रजिस्टर्ड निवेशकों का आँकड़ा पार किया। यह उपलब्धि सितंबर 2025 में 12 करोड़ निवेशकों का स्तर पार करने के महज सात महीने बाद हासिल हुई।
NSE पर कुल ट्रेडिंग अकाउंट्स की संख्या कितनी है?
25 अप्रैल 2026 तक NSE पर कुल क्लाइंट कोड (ट्रेडिंग अकाउंट्स) की संख्या 25.7 करोड़ पहुँच चुकी है। यह आँकड़ा फरवरी 2026 में ही 25 करोड़ का स्तर पार कर चुका था।
भारत में मासिक SIP निवेश कितना हो गया है?
वित्त वर्ष 2026 में मासिक SIP निवेश बढ़कर ₹29,132 करोड़ तक पहुँच गया है, जो पिछले एक दशक में आठ गुना वृद्धि को दर्शाता है। इसी वित्त वर्ष में 7.2 करोड़ नए SIP अकाउंट खोले गए।
NSE के निवेशकों की औसत उम्र और महिला भागीदारी कितनी है?
NSE के आँकड़ों के अनुसार निवेशकों की औसत आयु घटकर 33 वर्ष रह गई है, जो वित्त वर्ष 2021 में 36 वर्ष थी। करीब 40 प्रतिशत निवेशक 30 वर्ष से कम उम्र के हैं और हर चार में से एक निवेशक महिला है।
किस राज्य में NSE के सबसे अधिक निवेशक हैं?
महाराष्ट्र 2 करोड़ निवेशकों के साथ शीर्ष पर है। उत्तर प्रदेश (1.5 करोड़) और गुजरात (1.1 करोड़) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है।
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