4 अगस्त 2026
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एलआईसी शेयर 8% टूटा: सरकार ओएफएस से ₹31,000 करोड़ जुटाने की तैयारी, 6.5% हिस्सेदारी बिक्री पर

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एलआईसी शेयर 8% टूटा: सरकार ओएफएस से ₹31,000 करोड़ जुटाने की तैयारी, 6.5% हिस्सेदारी बिक्री पर

सारांश

सरकार के ₹31,000 करोड़ के ओएफएस ऐलान और ₹382 के डिस्काउंटेड फ्लोर प्राइस ने एलआईसी के शेयर को एक ही दिन में 8% नीचे खींच लिया। यह बिक्री सेबी की मई 2027 की डेडलाइन पूरी करने की दिशा में अनिवार्य कदम है — लेकिन मौजूदा निवेशकों के लिए यह तत्काल झटका है।

मुख्य बातें

एलआईसी का शेयर 4 अगस्त को NSE पर 7.54% गिरकर ₹396 पर कारोबार कर रहा था; इंट्राडे लो ₹390.50 रहा।
सरकार 2.5% बेस ओएफएस और 4% ग्रीनशू ऑप्शन के साथ कुल 6.5% हिस्सेदारी बेचेगी।
पूरा ग्रीनशू उपयोग होने पर सरकार को ₹31,000 करोड़ तक की प्राप्ति संभव।
ओएफएस का फ्लोर प्राइस ₹382 — सोमवार के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 11% कम।
बिक्री के बाद सरकार की हिस्सेदारी 96.5% से घटकर 90% रह जाएगी, जो सेबी की मई 2027 की डेडलाइन के अनुरूप होगी।
नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए ओएफएस मंगलवार को, रिटेल निवेशकों के लिए बुधवार को खुला।

लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलआईसी) के शेयर मंगलवार, 4 अगस्त को करीब 8 प्रतिशत लुढ़क गए, जब केंद्र सरकार ने ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के ज़रिए कंपनी में अपनी 6.5 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर दोपहर 12 बजे IST तक एलआईसी का शेयर 7.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹396 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा था।

ओएफएस की संरचना और फ्लोर प्राइस

सरकार ने 2.5 प्रतिशत बेस ऑफर और अतिरिक्त 4 प्रतिशत के ग्रीनशू ऑप्शन के साथ यह ओएफएस लाने का ऐलान किया है। ग्रीनशू ऑप्शन का पूरा उपयोग होने पर सरकार एलआईसी में 6.5 प्रतिशत इक्विटी बेचकर ₹31,000 करोड़ तक जुटा सकती है। ओएफएस का फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया गया है, जो सोमवार के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 11 प्रतिशत कम है — और यही डिस्काउंट निवेशकों की धारणा पर भारी पड़ा।

इंट्राडे कारोबार में शेयर का उच्चतम स्तर ₹402.40 और निम्नतम स्तर ₹390.50 रहा। बाज़ार में शेयरों की बड़ी आपूर्ति आने की आशंका और डिस्काउंटेड फ्लोर प्राइस ने मिलकर स्टॉक पर दबाव बनाए रखा।

ओएफएस की समयसीमा

यह ओएफएस मंगलवार को नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए खुला, जबकि बुधवार को रिटेल निवेशकों के लिए इसे खोला जाएगा। यह प्रक्रिया सेबी के मानक ओएफएस दिशानिर्देशों के अनुरूप है।

सेबी के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम

यह हिस्सेदारी बिक्री केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं है — यह भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों का पालन करने की दिशा में भी एक अनिवार्य कदम है। सेबी ने एलआईसी को सरकारी हिस्सेदारी 90 प्रतिशत तक घटाने के लिए मई 2027 तक की समयसीमा दी है।

फिलहाल सरकार के पास एलआईसी की 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि पब्लिक शेयरधारकों के पास मात्र 3.5 प्रतिशत है। बेस इश्यू और ग्रीनशू ऑप्शन के तहत सभी 6.5 प्रतिशत शेयर बिक जाने पर सरकार की हिस्सेदारी घटकर 90 प्रतिशत रह जाएगी, जो सेबी की शर्त पूरी करेगी।

बाज़ार पर असर और निवेशक भावना

गौरतलब है कि एलआईसी का मई 2022 में हुआ आईपीओ भी इश्यू प्राइस से नीचे खुला था, और तब से शेयर की चाल उतार-चढ़ाव भरी रही है। विश्लेषकों के अनुसार, ओएफएस में भारी डिस्काउंट एक ओर जहाँ रिटेल निवेशकों के लिए अवसर हो सकता है, वहीं मौजूदा शेयरधारकों के लिए यह अल्पकालिक दबाव का कारण बना है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाज़ार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच पहले से ही सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

आगे क्या

रिटेल निवेशकों के लिए ओएफएस बुधवार को खुलेगा। यदि ग्रीनशू ऑप्शन का पूरा उपयोग होता है, तो सरकार को ₹31,000 करोड़ तक की प्राप्ति होगी और एलआईसी सेबी की पब्लिक शेयरहोल्डिंग अनुपालन की अनिवार्य सीमा पर पहुँच जाएगी। दीर्घकालिक दृष्टि से, बढ़ी हुई पब्लिक फ्लोट एलआईसी के शेयर में तरलता और संस्थागत रुचि को बढ़ा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ₹382 का फ्लोर प्राइस — बाज़ार भाव से 11% नीचे — यह संकेत देता है कि सरकार जल्दी में है। असली सवाल यह है कि क्या यह डिस्काउंट दीर्घकालिक निवेशकों को आकर्षित करेगा या बाज़ार में एलआईसी की छवि को और कमज़ोर करेगा — खासकर तब, जब 2022 का आईपीओ भी इश्यू प्राइस से नीचे खुला था। पब्लिक फ्लोट बढ़ने से तरलता सुधरेगी, लेकिन मौजूदा शेयरधारकों का भरोसा बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलआईसी का शेयर आज इतना क्यों गिरा?
सरकार द्वारा ओएफएस के ज़रिए 6.5% हिस्सेदारी बेचने की घोषणा और ₹382 के डिस्काउंटेड फ्लोर प्राइस ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया, जिससे 4 अगस्त को एलआईसी का शेयर करीब 8% टूट गया। बाज़ार में बड़ी मात्रा में शेयरों की आपूर्ति आने की आशंका ने भी दबाव बढ़ाया।
एलआईसी ओएफएस 2025 में सरकार कितनी हिस्सेदारी बेच रही है?
सरकार 2.5% बेस ओएफएस और 4% ग्रीनशू ऑप्शन मिलाकर कुल 6.5% तक हिस्सेदारी बेचेगी। पूरा ग्रीनशू उपयोग होने पर सरकार को ₹31,000 करोड़ तक की राशि प्राप्त हो सकती है।
एलआईसी ओएफएस का फ्लोर प्राइस क्या है?
ओएफएस का फ्लोर प्राइस ₹382 प्रति शेयर तय किया गया है, जो सोमवार के बाज़ार बंद भाव से लगभग 11% कम है। रिटेल निवेशकों को इस पर अतिरिक्त छूट मिल सकती है।
सरकार एलआईसी में हिस्सेदारी क्यों बेच रही है?
सेबी के न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियमों के तहत सरकार को मई 2027 तक एलआईसी में अपनी हिस्सेदारी 90% तक लानी अनिवार्य है। फिलहाल सरकार के पास 96.5% हिस्सेदारी है और पब्लिक के पास केवल 3.5%।
एलआईसी ओएफएस में रिटेल निवेशक कब आवेदन कर सकते हैं?
नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए ओएफएस मंगलवार 4 अगस्त को खुला, जबकि रिटेल निवेशकों के लिए यह बुधवार 5 अगस्त को खुलेगा।
राष्ट्र प्रेस
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