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कोचीन शिपयार्ड में OFS की खबरें निराधार, वित्त मंत्रालय ने हिस्सेदारी बिक्री की योजना से किया इनकार

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कोचीन शिपयार्ड में OFS की खबरें निराधार, वित्त मंत्रालय ने हिस्सेदारी बिक्री की योजना से किया इनकार

सारांश

वित्त मंत्रालय ने कोचीन शिपयार्ड में ₹16,000 करोड़ के OFS की अटकलों को एक झटके में नकार दिया। यह खंडन ऐसे वक्त आया जब सरकार चालू तिमाही में पाँच अन्य PSU में विनिवेश से ₹14,000 करोड़ पहले ही जुटा चुकी है और ₹80,000 करोड़ के एसेट मोनेटाइज़ेशन लक्ष्य की राह पर है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्रालय ने 22 जून 2026 को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में OFS लाने की सभी रिपोर्ट्स को खारिज किया।
मीडिया रिपोर्ट्स में ₹16,000 करोड़ जुटाने के लिए 6–8% हिस्सेदारी बेचने का दावा था, जिसे सरकार ने निराधार बताया।
कोचीन शिपयार्ड में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 67.91% और LIC की 3.34% है।
वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में पाँच PSU में विनिवेश से अब तक ₹14,000 करोड़ जुटाए गए; तिमाही कुल ₹15,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान।
सरकार का वित्त वर्ष 2026-27 एसेट मोनेटाइज़ेशन लक्ष्य ₹80,000 करोड़ है, जिसमें IDBI बैंक का रणनीतिक विनिवेश भी शामिल।

वित्त मंत्रालय ने 22 जून 2026 को उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार विनिवेश कार्यक्रम के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में ऑफर फॉर सेल (OFS) लाने की तैयारी में है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया, 'वर्तमान में कोचीन शिपयार्ड में हिस्सेदारी बिक्री की कोई योजना नहीं है।'

क्या था मीडिया रिपोर्ट्स में दावा

खारिज की गई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि केंद्र सरकार ₹16,000 करोड़ जुटाने के लिए कोचीन शिपयार्ड में 6 से 8 प्रतिशत हिस्सेदारी OFS के ज़रिये बेचने की योजना बना रही है। सरकार ने इन दावों को तथ्यहीन बताते हुए नकार दिया।

कोचीन शिपयार्ड में मौजूदा शेयरहोल्डिंग

ताज़ा शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 67.91 प्रतिशत है। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 87.74 लाख शेयर हैं, जो कुल हिस्सेदारी का 3.34 प्रतिशत बनता है। OFS एक स्थापित तंत्र है जिसके ज़रिये सरकार सूचीबद्ध सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाती है।

विनिवेश का व्यापक संदर्भ

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कई सार्वजनिक उपक्रमों में सक्रिय रूप से विनिवेश किया है। कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में हिस्सेदारी बिक्री से इस तिमाही में अब तक लगभग ₹14,000 करोड़ जुटाए जा चुके हैं। शेष लेनदेन के निपटान के बाद यह आँकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है।

राजकोषीय लक्ष्य और विनिवेश की भूमिका

अप्रैल-जून तिमाही में विनिवेश से होने वाली कुल कमाई ₹15,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है। यह राशि गैर-कर पूंजी प्राप्तियों को मज़बूत करेगी और वित्त वर्ष 2026-27 के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होगी। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पादों पर सब्सिडी का बोझ बढ़ा है, जिससे विनिवेश राजस्व की अहमियत और बढ़ गई है।

वित्त वर्ष 27 का एसेट मोनेटाइज़ेशन लक्ष्य

सरकार के वित्त वर्ष 2026-27 एसेट मोनेटाइज़ेशन कार्यक्रम का लक्ष्य ₹80,000 करोड़ की कमाई है। इसमें आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक विनिवेश और चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में आंशिक हिस्सेदारी बिक्री शामिल है। कोचीन शिपयार्ड के संदर्भ में सरकार की स्थिति स्पष्ट है — फ़िलहाल कोई OFS नहीं आएगा, हालाँकि भविष्य की रणनीति बाज़ार की स्थितियों और राजकोषीय ज़रूरतों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ OFS होता है, लेकिन रणनीतिक रक्षा-संबद्ध कंपनियों जैसे कोचीन शिपयार्ड को फ़िलहाल बचाया जा रहा है। यह ऐसे समय में है जब पश्चिम एशिया संकट और सब्सिडी के बढ़ते बोझ के बीच ₹80,000 करोड़ का एसेट मोनेटाइज़ेशन लक्ष्य महत्वाकांक्षी लगता है। असली सवाल यह है कि IDBI बैंक विनिवेश की प्रक्रिया कितनी तेज़ी से आगे बढ़ती है, क्योंकि उस पर ही इस वर्ष के राजकोषीय गणित का बड़ा दारोमदार है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोचीन शिपयार्ड में OFS क्या होता और इसे क्यों खारिज किया गया?
OFS यानी ऑफर फॉर सेल वह तरीका है जिससे सरकार सूचीबद्ध PSU में अपनी हिस्सेदारी घटाती है। वित्त मंत्रालय ने 22 जून 2026 को स्पष्ट किया कि कोचीन शिपयार्ड में फ़िलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है।
कोचीन शिपयार्ड में सरकार की कितनी हिस्सेदारी है?
ताज़ा शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार केंद्र सरकार के पास कोचीन शिपयार्ड की 67.91% हिस्सेदारी है। LIC के पास 87.74 लाख शेयरों के साथ 3.34% हिस्सेदारी है।
वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने विनिवेश से अब तक कितना जुटाया है?
अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, सेंट्रल बैंक और GIC में हिस्सेदारी बिक्री से अब तक लगभग ₹14,000 करोड़ जुटाए गए हैं। तिमाही का कुल आँकड़ा ₹15,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है।
सरकार का वित्त वर्ष 27 का एसेट मोनेटाइज़ेशन लक्ष्य क्या है?
सरकार का वित्त वर्ष 2026-27 में एसेट मोनेटाइज़ेशन से ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य है। इसमें IDBI बैंक का रणनीतिक विनिवेश और चुनिंदा PSU में आंशिक हिस्सेदारी बिक्री शामिल है।
कोचीन शिपयार्ड OFS की खबरें क्यों आईं और इनमें क्या दावा था?
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा था कि सरकार ₹16,000 करोड़ जुटाने के लिए कोचीन शिपयार्ड में 6 से 8 प्रतिशत हिस्सेदारी OFS के ज़रिये बेचेगी। वित्त मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यहीन बताकर खारिज कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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