कोचीन शिपयार्ड में OFS की खबरें निराधार, वित्त मंत्रालय ने हिस्सेदारी बिक्री की योजना से किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
वित्त मंत्रालय ने 22 जून 2026 को उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार विनिवेश कार्यक्रम के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में ऑफर फॉर सेल (OFS) लाने की तैयारी में है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया, 'वर्तमान में कोचीन शिपयार्ड में हिस्सेदारी बिक्री की कोई योजना नहीं है।'
क्या था मीडिया रिपोर्ट्स में दावा
खारिज की गई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि केंद्र सरकार ₹16,000 करोड़ जुटाने के लिए कोचीन शिपयार्ड में 6 से 8 प्रतिशत हिस्सेदारी OFS के ज़रिये बेचने की योजना बना रही है। सरकार ने इन दावों को तथ्यहीन बताते हुए नकार दिया।
कोचीन शिपयार्ड में मौजूदा शेयरहोल्डिंग
ताज़ा शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 67.91 प्रतिशत है। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 87.74 लाख शेयर हैं, जो कुल हिस्सेदारी का 3.34 प्रतिशत बनता है। OFS एक स्थापित तंत्र है जिसके ज़रिये सरकार सूचीबद्ध सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर सार्वजनिक भागीदारी बढ़ाती है।
विनिवेश का व्यापक संदर्भ
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कई सार्वजनिक उपक्रमों में सक्रिय रूप से विनिवेश किया है। कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में हिस्सेदारी बिक्री से इस तिमाही में अब तक लगभग ₹14,000 करोड़ जुटाए जा चुके हैं। शेष लेनदेन के निपटान के बाद यह आँकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है।
राजकोषीय लक्ष्य और विनिवेश की भूमिका
अप्रैल-जून तिमाही में विनिवेश से होने वाली कुल कमाई ₹15,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है। यह राशि गैर-कर पूंजी प्राप्तियों को मज़बूत करेगी और वित्त वर्ष 2026-27 के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने में सहायक होगी। गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण उर्वरक और पेट्रोलियम उत्पादों पर सब्सिडी का बोझ बढ़ा है, जिससे विनिवेश राजस्व की अहमियत और बढ़ गई है।
वित्त वर्ष 27 का एसेट मोनेटाइज़ेशन लक्ष्य
सरकार के वित्त वर्ष 2026-27 एसेट मोनेटाइज़ेशन कार्यक्रम का लक्ष्य ₹80,000 करोड़ की कमाई है। इसमें आईडीबीआई बैंक का रणनीतिक विनिवेश और चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में आंशिक हिस्सेदारी बिक्री शामिल है। कोचीन शिपयार्ड के संदर्भ में सरकार की स्थिति स्पष्ट है — फ़िलहाल कोई OFS नहीं आएगा, हालाँकि भविष्य की रणनीति बाज़ार की स्थितियों और राजकोषीय ज़रूरतों पर निर्भर करेगी।