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विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में जुटाए ₹26,639 करोड़, चार साल का रिकॉर्ड

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विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में जुटाए ₹26,639 करोड़, चार साल का रिकॉर्ड

सारांश

वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती साढ़े तीन महीनों में ही सरकार ने विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से ₹26,639 करोड़ जुटा लिए — चार साल में सबसे तेज रफ्तार। कोल इंडिया, NHPC और GIC समेत सात कंपनियों में OFS के जरिए ₹20,272 करोड़ आए। ₹80,000 करोड़ के बजट लक्ष्य की दिशा में यह शुरुआत मजबूत है।

मुख्य बातें

वित्त वर्ष 2026-27 में 22 जुलाई तक विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से कुल ₹26,639.33 करोड़ जुटाए गए — चार वर्षों में सर्वाधिक।
इसमें ₹20,272.40 करोड़ OFS से और ₹6,366.93 करोड़ एसेट मोनेटाइजेशन से प्राप्त हुए।
सात सीपीएसई में OFS हुई — सर्वाधिक आय कोल इंडिया (₹5,500 करोड़+) और NHPC (₹4,300 करोड़+) से।
बजट अनुमान में 'मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स' के तहत ₹80,000 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित।
शेयर बाजार में सूचीबद्ध 68 सीपीएसई में सरकारी हिस्सेदारी का मूल्य ₹22.80 लाख करोड़ से अधिक ।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 से अलग विनिवेश लक्ष्य तय करना बंद किया गया।

केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 22 जुलाई 2026 तक विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन के माध्यम से कुल ₹26,639.33 करोड़ की राशि जुटाई है — जो पिछले चार वर्षों में किसी भी वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में सर्वाधिक है। सोमवार, 28 जुलाई 2026 को संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इसमें ₹20,272.40 करोड़ केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए और ₹6,366.93 करोड़ एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए प्राप्त हुए हैं।

संसद में क्या बताया गया

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 से अलग से विनिवेश लक्ष्य निर्धारित करना बंद कर दिया है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में ₹80,000 करोड़ को 'मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स' के अंतर्गत रखा गया है, जिसमें सरकारी इक्विटी हिस्सेदारी और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन से अनुमानित आय शामिल है।

सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि विनिवेश एक सतत प्रक्रिया है और किसी भी सौदे की समयसीमा बाजार की स्थिति, घरेलू व वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, निवेशकों की रुचि और प्रशासनिक तैयारियों जैसे अनेक कारकों पर निर्भर करती है।

किन कंपनियों से कितनी आय

डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में सात सीपीएसई में OFS के जरिए हिस्सेदारी बेची गई। इनमें प्रमुख हैं:

कोल इंडिया से ₹5,500 करोड़ से अधिक, एनएचपीसी से ₹4,300 करोड़ से अधिक, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC) से ₹3,000 करोड़ से अधिक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से ₹2,200 करोड़ से अधिक, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) से ₹2,000 करोड़ से अधिक, कोचीन शिपयार्ड से ₹1,700 करोड़ से अधिक और एनएलसी इंडिया से ₹1,200 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई गई।

OFS और एसेट मोनेटाइजेशन क्या है

OFS यानी ऑफर फॉर सेल एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत किसी सूचीबद्ध कंपनी के प्रमोटर या बड़े शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी आम निवेशकों को बेच सकते हैं। यह प्रक्रिया IPO या FPO की तुलना में कम दस्तावेजी औपचारिकताओं वाली और तेज मानी जाती है।

वहीं, InvITs और REITs के माध्यम से एसेट मोनेटाइजेशन ने नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि पहले ये निवेश केवल बड़े संस्थागत निवेशकों तक सीमित थे, लेकिन अब InvITs के जरिए आम निवेशक भी इन परियोजनाओं में हिस्सेदारी ले सकते हैं।

सरकारी पोर्टफोलियो की स्थिति

वर्तमान में शेयर बाजार में 68 केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (सीपीएसई) सूचीबद्ध हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी का कुल मूल्य ₹22.80 लाख करोड़ से अधिक है। इसके अतिरिक्त, 16 सार्वजनिक वित्तीय संस्थान — जिनमें बैंक और बीमा कंपनियां शामिल हैं — भी सूचीबद्ध हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी का मूल्य लगभग ₹19 लाख करोड़ है। यह विशाल पोर्टफोलियो सरकार को आने वाले महीनों में और अधिक विनिवेश की गुंजाइश देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

639 करोड़ की यह रफ्तार प्रभावशाली दिखती है, लेकिन ₹80,000 करोड़ के बजट लक्ष्य का यह महज एक-तिहाई है — और वित्त वर्ष की नौ महीने की राह अभी बाकी है। सरकार ने 2023-24 से अलग विनिवेश लक्ष्य हटाकर 'मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स' की छत्रछाया में इसे समेट दिया है, जिससे जवाबदेही की पारदर्शिता कम हुई है। गौरतलब है कि बाजार की अनुकूल परिस्थितियों में OFS आसान होता है — असली परीक्षा तब होगी जब वैश्विक अनिश्चितता या घरेलू मंदी बाजार को दबाएगी। InvITs और REITs के जरिए आम निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना सकारात्मक कदम है, पर इसके दीर्घकालिक रिटर्न का सत्यापन अभी बाकी है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने विनिवेश से कितनी राशि जुटाई?
22 जुलाई 2026 तक सरकार ने विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से कुल ₹26,639.33 करोड़ जुटाए हैं। इसमें ₹20,272.40 करोड़ OFS से और ₹6,366.93 करोड़ एसेट मोनेटाइजेशन से प्राप्त हुए।
ऑफर फॉर सेल (OFS) क्या होता है और यह IPO से कैसे अलग है?
OFS एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें किसी सूचीबद्ध कंपनी के प्रमोटर या बड़े शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी सीधे निवेशकों को बेचते हैं। यह IPO या FPO की तुलना में कम दस्तावेजी प्रक्रिया वाला और तेज होता है।
सरकार ने किन कंपनियों में OFS के जरिए हिस्सेदारी बेची?
चालू वित्त वर्ष में सात कंपनियों में OFS हुई — कोल इंडिया (₹5,500 करोड़+), NHPC (₹4,300 करोड़+), GIC (₹3,000 करोड़+), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (₹2,200 करोड़+), IRFC (₹2,000 करोड़+), कोचीन शिपयार्ड (₹1,700 करोड़+) और NLC इंडिया (₹1,200 करोड़+)।
सरकार ने विनिवेश का अलग लक्ष्य क्यों बंद कर दिया?
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि वित्त वर्ष 2023-24 से अलग विनिवेश लक्ष्य तय करना बंद किया गया है। अब इसे ₹80,000 करोड़ की 'मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स' श्रेणी में शामिल किया जाता है, क्योंकि बाजार-संवेदनशील लेनदेन के लिए पूर्व-निर्धारित समयसीमा व्यावहारिक नहीं होती।
InvITs के जरिए एसेट मोनेटाइजेशन से आम निवेशकों को क्या फायदा है?
InvITs (इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) के जरिए अब आम निवेशक भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी ले सकते हैं, जो पहले केवल संस्थागत निवेशकों तक सीमित था। इससे निवेशकों को नियमित आय और दीर्घकालिक रिटर्न की संभावना मिलती है, साथ ही सरकार को नई परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने में मदद होती है।
राष्ट्र प्रेस
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