विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन से सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में जुटाए ₹26,639 करोड़, चार साल का रिकॉर्ड
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 22 जुलाई 2026 तक विनिवेश और एसेट मोनेटाइजेशन के माध्यम से कुल ₹26,639.33 करोड़ की राशि जुटाई है — जो पिछले चार वर्षों में किसी भी वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में सर्वाधिक है। सोमवार, 28 जुलाई 2026 को संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, इसमें ₹20,272.40 करोड़ केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) में ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए और ₹6,366.93 करोड़ एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए प्राप्त हुए हैं।
संसद में क्या बताया गया
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 से अलग से विनिवेश लक्ष्य निर्धारित करना बंद कर दिया है। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में ₹80,000 करोड़ को 'मिसलेनियस कैपिटल रिसीट्स' के अंतर्गत रखा गया है, जिसमें सरकारी इक्विटी हिस्सेदारी और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के प्रबंधन से अनुमानित आय शामिल है।
सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि विनिवेश एक सतत प्रक्रिया है और किसी भी सौदे की समयसीमा बाजार की स्थिति, घरेलू व वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, निवेशकों की रुचि और प्रशासनिक तैयारियों जैसे अनेक कारकों पर निर्भर करती है।
किन कंपनियों से कितनी आय
डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में सात सीपीएसई में OFS के जरिए हिस्सेदारी बेची गई। इनमें प्रमुख हैं:
कोल इंडिया से ₹5,500 करोड़ से अधिक, एनएचपीसी से ₹4,300 करोड़ से अधिक, जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (GIC) से ₹3,000 करोड़ से अधिक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से ₹2,200 करोड़ से अधिक, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) से ₹2,000 करोड़ से अधिक, कोचीन शिपयार्ड से ₹1,700 करोड़ से अधिक और एनएलसी इंडिया से ₹1,200 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई गई।
OFS और एसेट मोनेटाइजेशन क्या है
OFS यानी ऑफर फॉर सेल एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत किसी सूचीबद्ध कंपनी के प्रमोटर या बड़े शेयरधारक स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी आम निवेशकों को बेच सकते हैं। यह प्रक्रिया IPO या FPO की तुलना में कम दस्तावेजी औपचारिकताओं वाली और तेज मानी जाती है।
वहीं, InvITs और REITs के माध्यम से एसेट मोनेटाइजेशन ने नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने और वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि पहले ये निवेश केवल बड़े संस्थागत निवेशकों तक सीमित थे, लेकिन अब InvITs के जरिए आम निवेशक भी इन परियोजनाओं में हिस्सेदारी ले सकते हैं।
सरकारी पोर्टफोलियो की स्थिति
वर्तमान में शेयर बाजार में 68 केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (सीपीएसई) सूचीबद्ध हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी का कुल मूल्य ₹22.80 लाख करोड़ से अधिक है। इसके अतिरिक्त, 16 सार्वजनिक वित्तीय संस्थान — जिनमें बैंक और बीमा कंपनियां शामिल हैं — भी सूचीबद्ध हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी का मूल्य लगभग ₹19 लाख करोड़ है। यह विशाल पोर्टफोलियो सरकार को आने वाले महीनों में और अधिक विनिवेश की गुंजाइश देता है।