कोल इंडिया, LIC, IOB और IRFC में OFS: सरकार का FY27 में ₹80,000 करोड़ विनिवेश लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली दो तिमाहियों में कोल इंडिया लिमिटेड (CIL), लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC), इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) में ऑफर फॉर सेल (OFS) लाने की योजना बनाई है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार शेयर बिक्री के दौरान बाज़ार की अस्थिरता से बचने के लिए स्थिर बाज़ार परिस्थितियों का इंतज़ार कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम
सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सरकार कोल इंडिया में करीब 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है। LIC में OFS वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई-सितंबर 2026 की अवधि में आ सकता है। IOB और IRFC में OFS को लेकर सक्रिय विचार-विमर्श जारी है, और बाज़ार स्थिरता की प्रतीक्षा की जा रही है।
गौरतलब है कि OFS वह प्रक्रिया होती है जिसमें शेयर बिक्री से प्राप्त राशि सीधे कंपनी के प्रमोटर — इस मामले में सरकार — के पास जाती है, न कि कंपनी के खाते में।
विनिवेश लक्ष्य और पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2027 में विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण के ज़रिए ₹80,000 करोड़ जुटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान ₹33,837 करोड़ से लगभग 135 प्रतिशत अधिक है — एक उल्लेखनीय छलांग जो सरकार की गैर-कर राजस्व बढ़ाने की प्राथमिकता को दर्शाती है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में उतार-चढ़ाव और घरेलू राजकोषीय दबाव के बीच सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं में अपनी हिस्सेदारी घटाकर संसाधन जुटाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
पिछले विनिवेश कदम
सरकार इस दिशा में पहले से सक्रिय है। उसने दिसंबर 2025 में IOB में 2.17 प्रतिशत हिस्सेदारी और फरवरी 2026 में IRFC में 2 प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश किया था। इसके अतिरिक्त, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की गई, जिसमें गैर-खुदरा बिक्री प्रस्ताव का हिस्सा 2.35 गुना सब्सक्राइब हुआ — जो निवेशकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया का संकेत है।
सरकार की रणनीति
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार के पास 'एक बहुत मज़बूत परिसंपत्ति मुद्रीकरण योजना' है, जिसे एक स्पष्ट रूप से परिभाषित पाइपलाइन का समर्थन प्राप्त है। अधिकारी ने कहा, 'एक पाइपलाइन तैयार है, और सरकार को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।'
सरकार का ज़ोर प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) में बड़े रणनीतिक विक्रय और OFS के संयोजन पर है, ताकि गैर-कर राजस्व को मज़बूत किया जा सके।
आगे क्या
बाज़ार विशेषज्ञों की नज़र इस बात पर होगी कि सरकार किस तिमाही में और किन परिस्थितियों में इन OFS को बाज़ार में उतारती है। LIC के OFS की टाइमिंग विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है और खुदरा निवेशकों में इसकी व्यापक पहुँच है। विनिवेश लक्ष्य की प्राप्ति काफी हद तक बाज़ार की स्थितियों और निवेशकों की भावना पर निर्भर करेगी।